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Haryana News: INDI अलायंस 8 अक्टूबर को डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर पर चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रोटेस्ट करेगा. रोहतक से कांग्रेस शहरी जिलाध्यक्ष कुलदीप केडी ने यह जानकारी दी और कहा कि विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व हरियाणा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष उदय भान करेंगे. हर जिले में वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं की ड्यूटी लगाई गई है. प्रदर्शन के दौरान वे ज्ञानेश कुमार का पुतला भी जलाएंगे और उनके इस्तीफे की मांग करेंगे.
उन्होंने आरोप लगाया कि CEC ने दोनों को-इलेक्शन कमिश्नरों को साइडलाइन किया और वोट चुराने के लिए BJP के साथ मिलीभगत की. उन्होंने दावा किया कि रोहतक लोकसभा सीट पर 3,26,000 वोट हटा दिए गए. इनमें से 80,320 को एब्सेंट मार्क किया गया, 1,43,358 वोट शिफ्ट किए गए, 17,387 डुप्लीकेट वोट डिलीट किए गए और 85,593 वोटर्स को डेड दिखाया गया।
जनवादी महिला समिति की नेशनल उपाध्यक्ष जगमती सांगवान ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए पूरे देश में 13 करोड़ वोट डिलीट किए गए हैं, जिसकी वे निंदा करती हैं. उन्होंने दावा किया कि अब पूरे देश के लोग एक हो गए हैं.
जगमती सांगवान ने आगे आरोप लगाया कि SIR के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को चुप करा दिया जा रहा है. पूरे देश में डिलीट किए गए 13 करोड़ वोटों में से 63% महिलाओं के थे. डिलीट किए गए ज्यादातर वोट समाज के गरीब तबके के लोगों के थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने साजिश के तहत चुनाव आयोग को सरकार बनाने का हथियार बना लिया है. ज्ञानेश कुमार को 2023 में कानून बनाकर पहले ही राहत दे दी गई थी. उन्होंने कहा कि जिस दिन विपक्ष को लोकसभा से हटाया गया, उसी दिन एक प्रस्ताव पास किया गया जिसके तहत CEC के खिलाफ कोई केस दर्ज नहीं किया जा सकता.
दिल्ली में प्रदर्शन
बता दें कि दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बीते कई दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों चल रहा है. इसमें विपक्षी दलों, छात्र संगठनों (जैसे AISA, SFI, NSUI) और सिविल सोसाइटी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है. बुधवार को भी कांग्रेस और आम आम पार्टी के नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और कई को पुलिस ने हिरासत में भी ले लिया.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि चुनाव आयोग की 'सिस्टमैटिक इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) प्रक्रिया के जरिए करोड़ों पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जिससे जिंदा लोगों को भी सूची में मृत या अयोग्य दर्शाया गया है.