चीनी सामान को पीछे छोड़ फिर चमका मिट्टी के दीयों का कारोबार, दिवाली से पहले सिरसा के कुम्हारों की चांदी
दीपावली से पहले सिरसा में मिट्टी के दीयों की मांग बढ़ने से कुम्हारों का कारोबार फिर रफ्तार पकड़ रहा है. 70 से ज्यादा परिवारों समेत जिले के सैकड़ों परिवारों को रोजगार मिल रहा है.
दीपों के त्योहार दीपावली को अब कुछ दिन ही बचे है. इस बार दीपावली पर मिट्टी के दीयों का कारोबार करने वालो में खुशी साफतौर पर देखी जा सकती है. हरियाणा के सिरसा जिले में बड़े पैमाने पर मिट्टी के दीयों को बनाने का कारोबार पिछले काफी सालो से चल रहा था, लेकिन चाइनीज सामान ने उनका काम-धंधा ठप कर दिया था. मगर एक बार फिर से वोकल फॉर लोकल का असर देखने को मिला है और एक बार फिर से मिट्टी के दीयो की मांग बढ़ गई है. पिछले कई सालों से प्रतिवर्ष दीयों की मांग बढ़ती जा रही है, जिससे मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों के भी चेहरे खिले हुए हैं. यही नहीं मिट्टी के दिए हरियाणा, पंजाब सहित देश के कई राज्यों तक बिकते है. सिरसा शहर में तकरीबन 70 से ज्यादा परिवार दिए बनाने का काम करते है और पूरे जिले भर में सैंकड़ों परिवार इस धंधे से जुड़े हुए है.
मिट्टी के दीयों व अन्य सामान चाक पर सैकड़ों परिवार बनाते हैं. दीपावली पर्व व करवा चौथ के व्रत को लेकर पिछले तीन महीने से दीयों, करवा व अन्य समान बनाने शुरू कर देते हैं. यहां से बने दीयों को चंडीगढ़, हिसार व फतेहाबाद में यहां तक कई प्रदेशों में भी भेजा जाता है. अब इस बार भी चाइनीज आइटमों की मांग घटी है. दीपावली पर्व को लेकर मिट्टी के भी आकर्षक व सुंदर दीयों की भरमार है. इसमें अनेक तरह के डिजाइनर दीये भी शामिल हैं.
कुम्हार मनीष कुमार ने बताया कि पिछले 20 सालों से दीयों व मिट्टी के वस्तुओं को बनाने में लगा हुआ हूं. इससे पहले हमारे पूर्वज ये काम करते आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि एक बार ऐसा समय आया कि मिट्टी के दीयों की मांग काफी घटने लगी. मगर पिछले कई सालों में मिट्टी की बनी वस्तुओं की डिमांड में तेजी आई है. इससे हमारा कारोबार काफी बढ़ा है. अब वो केवल मिट्टी के दिए ही बनते है. साथ ही उन्होंने कहा कि आज के बच्चे भी इस काम में रूचि दिखा रहे है.
वहीं हनुमान दास ने बताया कि वह 20 साल से लगातार इस कारोबार से जुड़े हुए हैं. पहले उनके पिता ये काम करते थे और अब उनका परिवार इस कारोबार को आगे बढ़ा रहा है. उन्होंने कहा कि अब फैंसी चीजों का जमाना आ गया है, मिट्टी के दिये और अन्य वस्तुएं भी फैंसी बनाकर वह सेल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि उनके द्वारा तैयार किए गए दिये व अन्य वस्तुएं पंजाब, हरियाणा तक बेची जाती हैं. पहले के मुकाबले अब मुनाफा भी ज्यादा है और जिस तरह डिमांड बढ़ रही है तो रेट भी बढ़ रहे हैं.
(विजय कुमार की रिपोर्ट)