साल 2022 में नाना पाटेकर ने एक अवॉर्ड नाइट के दौरान एक ऐसा सवाल उठाया, जिसने मनोरंजन जगत के अलावा आम नागरिकों का भी ध्यान अपनी ओर खींचा. उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और तत्कालीन डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस से टैक्सपेयर्स की परेशानियों को लेकर कुछ सवाल पूछा. इस दौरान नाना पाटेकर ने पूछा था कि जब आम नागरिकों से उनकी कमाई और टैक्स को लेकर पूछताछ की जाती है, तो नेताओं के मामले में ऐसा क्यों नहीं होता? साथ ही उन्होंने भ्रष्ट नेताओं को लेकर भी कई सवाल उठाए.
उस समय नाना ने जो सवाल उठाया वो उनकी बेबाकी का एक नमूना था. वह हमेशा ही आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखते रहे हैं. गुरुवार को नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है. ऐसे में जब उनके पूरे सफर को याद किया जा रहा है, तो ये सवाल एक बार फिर चर्चा में है.
यह 'लोकमत महाराष्ट्रीयन ऑफ द ईयर अवॉर्ड्स 2022' का मौका था और पाटेकर को इंटरव्यू होना था. तब उन्होंने वही सवाल पूछे जो कई टैक्स देने वाले लोग निजी तौर पर कहते हैं. उन्होंने टैक्स, GST, जांच-पड़ताल और आम नागरिकों और चुने हुए नेताओं के साथ होने वाले बर्ताव में अंतर के बारे में सवाल किए. उन्होंने यह सब आमने-सामने मंच पर और राज्य के दो सबसे ताकतवर लोगों की मौजूदगी में किया.
नाना पाटेकर ने क्या पूछा?
उन्होंने एक कहानी से शुरुआत की. उन्होंने मराठी में कहा, 'जब यशवंतराव चव्हाण ने पद छोड़ा, तो उनके बैंक खाते में 25,000 रुपये भी नहीं थे. अब तो हमारे मंत्रियों की बात छोड़िए, आज चुना गया एक आम कॉरपोरेटर भी अगले साल तक करोड़पति बन जाता है. क्या उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए या नहीं, एकनाथ जी?'
फिर उन्होंने एक टैक्सपेयर के तौर पर बात की. उन्होंने कहा, 'हम और आप 100 रुपये कमाने के बाद 30 रुपये इनकम टैक्स देते हैं. फिर 18 परसेंट GST भी लगता है. यह सब चुकाने के बाद भी हमसे पूछताछ होती है. भ्रष्ट नेताओं की जांच क्यों नहीं होती?' उन्होंने आगे कहा, 'मुझे पता है कि वह भ्रष्ट है, लेकिन आप इस पर ध्यान क्यों नहीं देते?'
नेताओं ने क्या प्रतिक्रिया दी?
फडणवीस ने कहा कि भ्रष्टाचार सिर्फ राजनीति में ही नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में एक बीमारी की तरह है और इसे खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत होगी. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जाने वाले लोग भी कई बार भारी बहुमत से चुनाव जीत जाते हैं. उन्होंने कहा, 'समाज में भ्रष्टाचार के प्रति कोई नफरत नहीं है. जब तक समाज अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा नहीं कहेगा, तब तक यह स्थिति नहीं बदलेगी.'
शिंदे ने पूरे इंटरव्यू में पाटेकर के अन्य सवालों के भी जवाब दिए, जिनमें ठेकेदारों को जवाबदेह ठहराने से जुड़ा सवाल भी शामिल था.
उन्हें यह सवाल इतनी आसानी से कैसे सूझा?
शायद, इसलिए क्योंकि उन्होंने जिंदगी का वह पहलू खुद जिया था. पाटेकर के पिता ने सब कुछ तब गंवा दिया था, जब उनके एक करीबी व्यक्ति ने परिवार की संपत्ति हड़प ली थी. साल 2015 में बॉम्बे टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में पाटेकर ने बताया था कि उनका परिवार मिडिल क्लास से लोअर मिडिल क्लास और आखिर में लोअर क्लास में आ गया था. उस समय वे नौवीं क्लास में थे.
उन्होंने बताया, 'तब अचानक 13 साल की उम्र में ही मुझे काम करना पड़ा.' बता दें कि स्कूल के बाद वे फिल्मों के पोस्टर पेंट करने के लिए आठ किलोमीटर दूर चुनाभट्टी पैदल जाते थे. जहां उन्हें महीने के 35 रुपये और दिन में एक बार खाना मिलता था. उन्होंने इसे कोई बहुत अच्छी या सुखद बात की तरह नहीं बताया. उन्होंने कहा, 'उस बेइज्जती और भूख ने मुझे इतना कुछ सिखा दिया कि मुझे किसी एक्टिंग स्कूल जाने की जरूरत ही नहीं पड़ी.'
उन्हें याद करते हुए बताया था कि वे खाने के समय दोस्तों के घर पहुंच जाते थे, इस उम्मीद में कि उन्हें खाने के लिए बुलाया जाएगा. वो कहते थे, 'मेरे लिए रोटी की खुशबू से बेहतर कोई खुशबू नहीं हो सकती.' उन्होंने मिठाइयां खाना छोड़ दिया था, क्योंकि बचपन में वे उन्हें खरीद नहीं सकते थे और उन्होंने कहा कि बाद में भी उन्होंने कभी मिठाइयां खाना शुरू नहीं किया.
क्या उनका गुस्सा सच में राजनीति की वजह से था?
उन्होंने कहा कि यह किसी पुरानी बात की वजह से था. दर्शकों ने एक गुस्सैल एक्टर को देखा और उन्होंने खुद इसकी वजह बताई. उन्होंने कहा, 'यह उस बेइज्जती की वजह से है जो मैंने तब झेली थी. लोगों ने मेरे साथ जैसा बर्ताव किया, जब भी मुझे वह पल याद आता है, तो मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं.'
उन्होंने कहा कि बचपन में उन्हें बेबस और कमतर महसूस होता था और यही भावना बाद में गुस्से के रूप में बाहर निकली. उन्होंने कहा कि उन्हें हिंसा पसंद नहीं थी और वे शायद ही कभी हिंसा पर उतरते थे. इस नजरिए से देखें तो 2022 का वह सवाल कोई दिखावा या स्टंट नहीं था. यह एक ऐसे व्यक्ति का सवाल था जो कभी सत्ता के गलत पक्ष का शिकार रहा था, और अब जिसके पास माइक था और उसका इस्तेमाल करने की हिम्मत भी.
क्या शोहरत ने उन्हें बदल दिया?
उनके अपने शब्दों में कहें तो नहीं, साल 2015 में उन्होंने कहा था, 'मैंने अपनी जरूरतें बिल्कुल नहीं बढ़ाई हैं. अगर आप मेरे घर आएंगे, तो हैरान रह जाएंगे.' वह फ्लैट 750 स्क्वेयर फीट का था और 1.1 लाख रुपये में खरीदा गया था. आज भी मैं वहीं रहता हूं.'
एक्टर परेश रावल ने पिछले साल 'द लल्लनटॉप' को बताया था कि पाटेकर ने एक बार एक रोल के लिए 1 करोड़ रुपये मांगे थे. एक ऐसी फीस जिसे मांगने में उस समय के बड़े हीरो भी हिचकिचाते थे और उन्हें वह फीस मिली भी. रावल ने हंसते एक प्रोड्यूसर से जुड़ा किस्सा भी सुनाया था, जिन्हें पाटेकर ने घर बुलाया था. प्रोड्यूसर ने मटन खाया और पाटेकर ने उनसे बाद में बर्तन धुलवाए. रावल ने कहा, 'वो बाप हैं.' रावल के बताए अनुसार, जो व्यक्ति 1 करोड़ रुपये की मांग कर सकता था, वह भी अपना घर ऐसे चलाता था जैसे कोई ऐसा लड़का हो जो कभी रोटी मिलने का इंतजार करता रहा हो.