कौन था 'डॉन उदय शेट्टी' के पीछे का असली इंसान? 'नाना' नाम के पीछे की वो एक भावुक दास्तान... जो शायद ही आप जानते होंगे!
Nana Patekar Real Name: बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर के निधन की खबर ने सभी को हिलाकर रख दिया. 75 साल की उम्र में एक्टर ने गोवा के मणिपाल हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली. खबरों के मुताबिक, उन्हें अपने घर में बेहोश पाया गया था, जिसके बाद एक्टर को तुरंत अस्पताल ले जाया गया.
फिल्म 'वेलकम' में जब भी 'डॉन उदय शेट्टी' का किरदार स्क्रीन पर आता है, तो ऑडियंस के चेहरे पर खुद-ब-खुद मुस्कान आ जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पर्दे पर अपनी कड़क आवाज और धाकड़ अदाकारी से तहलका मचाने वाले इस दिग्गज कलाकार का असली नाम 'नाना पाटेकर' है ही नहीं? पर्दे के इस 'क्रांतिवीर' की पहचान असलियत में कुछ और ही है. एक आम इंसान से बॉलीवुड का आइकॉन बनने के बीच उनके नाम बदलने की ये दास्तान जितनी दिलचस्प है, उससे कहीं ज्यादा इमोशनल भी है.
महाराष्ट्र के आम परिवार में जन्म लेने वाले इस महान कलाकार का असली और पूरा नाम विश्वनाथ गजानन पाटेकर है. सिनेमा में आने से पहले और स्ट्रगल के दिनों में उनके दोस्त और परिवार वाले उन्हें इसी नाम से जानते थे. मुंबई के मशहूर सर जे.जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट्स में पढ़ाई और शुरुआती थिएटर के दिनों में भी वो 'विश्वनाथ' या प्यार से 'विशू' के नाम से ही पहचाने जाते थे.
'नाना' कहने के पीछे छिपा है गहरा प्यार
नाना पाटेकर का नाम बदलने के पीछे कोई फिल्मी पब्लिसिटी या ग्लैमर नहीं था, बल्कि इसके पीछे उनकी मां का एक बेहद खूबसूरत और भावुक रिश्ता जुड़ा हुआ है. दरअसल, बचपन में उनकी मां की एक बेहद खास और करीबी सहेली थीं, जो उनके लिए सगी बहन से भी ज्यादा बढ़कर थीं. वही सहेली बचपन में नन्हे विश्वनाथ को दुलारते हुए प्यार से 'नाना... नाना' कहकर पुकारा करती थीं. उनका द्वारा दिया गया ये नाम धीरे-धीरे परिवार, रिश्तेदार और मोहल्ला जानने लगा और एक्टर को उसी नाम से बुलाने लगा.
ऐसे अमर हुई ये पहचान
मां की सहेली द्वारा दिया गया ये प्यारभरा नाम कलाकार के दिल के इतना करीब था कि उन्होंने बड़े होने के बाद भी इसे कभी नहीं बदला. यहां तक कि जब वो बड़े पर्दे पर मशहूर हुए और सरकारी कागज बनने लगे, उस समय उन्होंने पासपोर्ट, आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे सभी ऑफिशियल कागजातों में भी अपना नाम नाना पाटेकर ही लिखवाया. जिसे दुनिया आज उनके खौफ, सम्मान और एक्टिंग की निशानी मानती है, वो असल में एक मासूम बचपन का प्यार और खूबसूरत तोहफा है.
सिनेमा के बेताज बादशाह
साल 1978 की फिल्म 'गमन' से अपने सफर की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर ने 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'प्रहार', 'अग्निसाक्षी' और 'अपहरण' जैसी फिल्मों से हिंदी सिनेमा में एक्टिंग के एक नए युग की शुरुआत की. वो न केवल तीन बार नेशनल फिल्म अवॉर्ड और पद्म श्री से नवाजे गए, बल्कि 'नाम फाउंडेशन' खोलकर वो किसानों के मसीहा भी बन गए. आज भले ही दुनिया उन्हें 'डॉन उदय शेट्टी' या 'प्रताप तिलक' के रूप में याद करे, लेकिन इस नाम के पीछे छिपी ये इमोशनल दास्तान उनके सादगी भरी पर्सनैलिटी को और भी खास बना देती है.