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सच्ची घटना पर आधारित है विजय देवरकोंडा की 'रणबाली', क्या है 1876-78 के महाअकाल का असली इतिहास; जानिए पूरी कहानी

विजय देवरकोंडा की फिल्म 'रणबाली' को लेकर चर्चा के बीच 1876-78 के महाअकाल का इतिहास भी सुर्खियों में है. इस दौर में भारत के कई हिस्सों में भयंकर सूखा और खाद्य संकट देखने को मिला था. आखिर इस त्रासदी की वजह क्या थी और फिल्म का इससे क्या कनेक्शन है?

Written BySwati Singh
Published: Oct 09, 2026, 03:51 PM IST|Updated: Oct 09, 2026, 04:17 PM IST
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सच्ची घटना पर आधारित है विजय देवरकोंडा की 'रणबाली', क्या है 1876-78 के महाअकाल का असली इतिहास; जानिए पूरी कहानी
Image Credit: विजय देवरकोंडा की 'रणबाली' और 1876-78 का अकाल

About the Author

Swati Singh

Swati Singh

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की आने वाली ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म 'रणबाली' का ट्रेलर गुरुवार को रिलीज हुआ है. फिल्म का ट्रेलर देख दर्शकों को भारत के औपनिवेशिक अतीत के एक भयानक दौर में ले जाएगी. 1876-78 के भीषण अकाल पर बेस्ड बनी यह फिल्म उस समय की कहानी बताती है जब सूखे, भुखमरी और औपनिवेशिक शासन ने अनगिनत लोगों को जीवन-मरण के संकट में डाल दिया था.

फिल्म में विजय देवरकोंडा लीड रोल में हैं और रश्मिका मंदाना उनकी पत्नी 'जयम्मा' का किरदार निभा रही हैं. राहुल सांकृतियन के निर्देशन में बनी यह फिल्म 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होगी.

'रणबाली' का 1876-78 के महाअकाल से क्या है कनेक्शन?

'महाअकाल', जिसे 'मद्रास अकाल' के नाम से भी जाना जाता है. भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुई सबसे भयानक मानवीय त्रासदियों में से एक थी. इसने 1876 और 1878 के बीच दक्षिण और पश्चिम भारत के बड़े इलाकों को प्रभावित किया. सूखे की मार झेल रहे रायलसीमा क्षेत्र (जो अब आंध्र प्रदेश का हिस्सा है) पर इसका सबसे बुरा असर पड़ा. 1876 में मॉनसून के फेल होने से पहले ही बार-बार सूखे के दौर ने खेती-बाड़ी को कमजोर कर दिया था.

फसलें बर्बाद होने और खाने-पीने की चीजों की कमी होने के चलते किसान परिवारों की आजीविका का मुख्य जरिया भी खत्म हो गया. यह संकट जल्द ही खेतों से बाहर फैल गया और परिवार पेट भरने के लिए संघर्ष करने लगे.

मानसून की विफलता एक बड़ी वजह थी, लेकिन इतिहासकारों ने अकाल को और गंभीर बनाने में औपनिवेशिक आर्थिक नीतियों की भूमिका की भी जांच की है. भारत ब्रिटिश शासन के अधीन था और सरकार की प्राथमिकताओं में राजस्व वसूली और व्यापार शामिल थे. ऐतिहासिक विवरणों से पता चलता है कि प्रभावित क्षेत्रों में भोजन की कमी बढ़ने के बावजूद अनाज का निर्यात जारी रहा. औपनिवेशिक प्रशासक अक्सर खाद्य आपूर्ति में बड़े पैमाने पर सरकारी हस्तक्षेप के बजाय बाजार-आधारित वितरण को प्राथमिकता देते थे. आलोचकों का तर्क है कि ऐसी नीतियों ने कमजोर समुदायों को तब असुरक्षित छोड़ दिया जब भोजन की कमी हो गई और उसे खरीदना तेजी से मुश्किल हो गया.

जानिए उस दौर का असली इतिहास

इस अकाल में भुखमरी और बीमारी की वजह से बहुत से लोगों की जान गई. हालांकि, अलग-अलग इलाकों और समय के हिसाब से ऐतिहासिक अनुमान अलग-अलग हैं. 'रणबाली' ट्रेलर में 80 लाख लोगों की मौत का जिक्र है. अकाल के बारे में दूसरी रिपोर्टों में इस बड़ी आपदा में मरने वालों की संख्या 1 करोड़ से ज्यादा बताई गई है. वहीं, बीबीसी के अनुमान के मुताबिक, मद्रास अकाल में मरने वालों की संख्या लगभग 40-50 लाख थी. इसके अलावा 'द बेटर इंडिया' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ रायलसीमा में ही लगभग 7 लाख लोगों की जान गई थी.

इस संकट पर ब्रिटिश प्रशासन का रवैया विवाद का एक बड़ा कारण बन गया. अकाल राहत कार्यों की देखरेख करने वाले सर रिचर्ड टेम्पल ने सरकारी खर्च पर कंट्रोल रखने के लिए कड़े उपाय लागू किए. ऐतिहासिक विवरणों में राहत शिविरों में खाद्य राशन पर लगाई गई कड़ी पाबंदियों का जिक्र भी मिलता है. बताया जाता है कि राशन की मात्रा इतनी कम कर दी गई थी कि कई बार अकाल पीड़ितों को मिलने वाले राशन में कैलोरी की मात्रा औपनिवेशिक जेलों में कैदियों को दिए जाने वाले राशन से भी कम होती थी.

1876-78 के महाअकाल की पूरी कहानी

वहीं, अकाल का समय विरोध का दौर भी था. ऐतिहासिक विवरणों में बताया गया है कि जिंदा रहने की कोशिश में ग्रामीणों ने टैक्स वसूली का विरोध किया, जमा किए गए अनाज पर कब्जा किया और स्थानीय लेवल पर विद्रोह किए. ब्रिटिश अधिकारी अक्सर ऐसी गतिविधियों को आपराधिक या विद्रोही मानते थे. हालांकि, रायलसीमा की स्थानीय लोक-कथाओं में इन घटनाओं की एक अलग ही समझ मिलती है. औपनिवेशिक सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में ऐसे लोगों के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने बेहद मुश्किल समय में अपने समुदायों की रक्षा की.

'रणबाली' की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एक योद्धा की कहानी को अकाल से जूझ रहे समुदायों के बड़े दुख और उनके संघर्ष से जोड़ती है. विजय देवरकोंडा लीड रोल में हैं, जबकि रश्मिका मंदाना जयम्मा का किरदार निभा रही हैं. फिल्म की कहानी एक ऐसे योद्धा के इर्द-गिर्द घूमती है जो अपने लोगों की रक्षा करते हुए ब्रिटिश औपनिवेशिक सत्ता का सामना करता है. राहुल सांकृतियन द्वारा निर्देशित और 'मैथ्री मूवी मेकर्स' द्वारा निर्मित 'रणबाली' 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है.
 

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