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बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर रविवार को हुए फायरिंग मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. इस वारदात के पीछे कोई छोटा-मोटर क्रिमिनल नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर फैला एक बड़ा गैंगस्टर सिंडिकेट काम कर रहा था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि महज 35 हजार रुपए और विदेश भेजने के लालच में इन शूटर्स को टाइगर पर हमला करने के लिए भेजा गया था. पुलिस ने शानदार कार्रवाई करते हुए वारदात के महज 15 घंटे के भीतर ही आरोपियों को राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार कर लिया, जो नेपाल भागने की योजना बना रहे थे.
पुलिस जांच के मुताबिक, इस खतरनाक हमले को अंजाम देने वाले शूटर्स को सिर्फ 35 हजार रुपए में हायर किया गया था. एक बड़े फिल्म स्टार की जान की कीमत इन क्रिमिनल्स के लिए महज कुछ हजार रुपए आंकी गई थी. काम पूरा होने के बाद इन पैसों को शूटर्स तक पहुंचाया जाना था, लेकिन उससे पहले ही मुंबई, गुजरात और राजस्थान की पुलिस टीमों ने ऐसा मास्टरप्लान चलाया कि बदमाशों के अरमान धरे के धरे रह गए.
इस पूरे मामले की गहराई में जाने पर पता चलता है कि इसके तार किसी साधारण गैंग से नहीं जुड़े हैं. जांच में गैंगस्टर रणदीप मलिक का नाम सबसे ऊपर आ रहा है. रणदीप पिछले 10 साल से विदेश में रह रहा है और अमेरिका से बैठकर अपना ट्रांसपोर्ट का काम संभालते हुए भारत में आपराधिक नेटवर्क चला रहा है. बताया जा रहा है कि लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ के रास्ते अलग होने के बाद रणदीप मलिक ही इस गैंग के बड़े हिस्से को ऑपरेट कर रहा है. उसका खास आदमी अनिल पंडित इस नेटवर्क का इस्तेमाल करता है. अनिल ने ही इस केस में हिरासत में धराए आरोपी समीर के जरिए रेहान नाम के शूटर से संपर्क किया था और करीब डेढ़ महीने पहले पूरी साजिश रची गई थी.
गैंगस्टर रणदीप मलिक के इस तथाकथित 'डिब्बा कनेक्शन' के पीछे का सच यह है कि रणदीप का खास चेला और एसोसिएट माना जाने वाला अनिल पंडित नवंबर 2025 से उसका खाने का डिब्बा बिजनेस चला रहा था. खुद रणदीप ने जनवरी 2026 से अपनी सोशल मीडिया पोस्ट्स में अनिल का नाम लिखना शुरू किया था और उसे पूरी ट्रेनिंग दी थी. भारत के अलावा यूएसए, पुर्तगाल, यूरोप, यूके और कनाडा के साथ-साथ हरियाणा, दिल्ली और पंजाब तक अपना खतरनाक नेटवर्क फैला चुके रणदीप ने दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में कई हत्याएं और क्लबों पर ग्रेनेड हमले करवा रखे हैं और अब वही अनिल पंडित इस इंटरनेशनल नेटवर्क का खुलकर इस्तेमाल कर रहा है.
रेहान वही शूटर है जो पहले भी सोनीपत में फायरिंग की वारदातों में शामिल रह चुका है. मार्च 2026 में रेहान ने रणदीप मलिक के कहने पर न्यूट्रिशन बालगढ़ चौक सोनीपत पर भी फायरिंग की थी. जब वह जमानत पर बाहर आया, तो रणदीप मलिक ने उसे और उसके साथियों को मुंबई भेज दिया. इन बदमाशों को यह लालच दिया गया था कि वे टाइगर श्रॉफ पर हमला करें, जिसके बाद उन्हें पैसे तो मिलेंगे ही, साथ ही उन्हें विदेश भी भेज दिया जाएगा. इस बड़े लालच में आकर रेहान और फूल सिंह जैसे शूटर इस खतरनाक खेल का हिस्सा बन गए. वारदात वाले दिन इन लोगों ने योजना के तहत टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर गोलियां बरसाईं और तुरंत वहां से फरार हो गए.
वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाशों का प्लान बहुत पक्का था. हमले की सूचना मिलते ही मुंबई पुलिस एक्टिव हो गई. पुलिस की 15 विशेष टीमों ने मिलकर लगभग 900 किलोमीटर तक का पीछा किया और तकनीकी सर्विलांस की मदद से आरोपियों की मूवमेंट ट्रैक कर ली. हमलावर पहले मुंबई से सूरत भागे, उसके बाद सूरत से पुणे और जयपुर की ट्रेन पकड़ी. वे राजस्थान के कोटा पहुंच चुके थे और वहां से नेपाल बॉर्डर पार करके हमेशा के लिए गायब होने की फिराक में थे. लेकिन पुलिस ने नेपाल भागने से ठीक पहले उन्हें कोटा रेलवे स्टेशन से दबोच लिया.

पुलिस की पूछताछ में अब लगातार नए खुलासे हो रहे हैं. इस मामले में सिर्फ ये तीन शूटर ही नहीं, बल्कि कई और लोग भी पुलिस के रडार पर आ चुके हैं. आने वाले दिनों में देश और विदेश के कई अन्य शहरों से भी कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां होने की पूरी संभावना है. फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से सख्ती से पूछताछ कर रही है, ताकि इस पूरे इंटरनेशनल सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंचा जा सके.
राजस्थान के कोटा से गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों को गिरफ्तारी के ठीक बाद ट्रांजिट रिमांड के लिए सक्षम अदालत के सामने पेश किया गया था, जहां से अदालत ने तुरंत ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर ली और उन्हें मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके बाद लंबी यात्रा और लगातार पूछताछ के कारण थकी हुई पुलिस टीम ने सुरक्षा कारणों और एहतियात के तौर पर रात में ही सफर करने से परहेज किया और वे कोटा में ही रुके रहे, जबकि कोटा पुलिस की ओर से यह साफ किया गया कि मुंबई पुलिस के अनुरोध पर उन्हें राज्य की सीमा तक पूरी सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है और आगे भी उनकी मांग के अनुसार मदद दी जाएगी.
इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों की पहचान फूल सिंह नरेश, रेहान रहीउसुद्दीन अंसारी और ऋतिक कुमार उर्फ रोशन के रूप में हो चुकी है, जिनमें से हरियाणा के सोनीपत के रहने वाले 18 साल के फूल सिंह और रेहान के साथ-साथ बिहार के बेगूसराय का रहने वाला 22 वर्षीय ऋतिक शामिल है, जिन्होंने इस घटना को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई पल्सर बाइक को महज 25 हजार रुपए में खरीदा था. पुलिस अब इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि बाइक के कागजात समय पर ट्रांसफर क्यों नहीं हुए थे और क्या इसे पूरी तरह सोच-समझकर इस खतरनाक साजिश को अंजाम देने के लिए ही खरीदा गया था, क्योंकि अंधेरी में गाड़ी छोड़कर नेपाल भागने की फिराक में जुटे इन शूटरों को आखिरकार कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन से दबोच लिया था.