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शाहरुख खान को आज दुनिया 'किंग ऑफ बॉलीवुड' के नाम से जानती है. उनके घर मन्नत के बाहर हजारों फैंस उनकी एक झलक के लिए घंटों खड़े रहते हैं, लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक ऐसा दर्द छुपा है जिसने एक आम दिल्ली के लड़के को दुनिया का सबसे बड़ा स्टार बना दिया. शाहरुख कभी एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई नहीं आए थे. उन्हें तो फिल्म इंडस्ट्री के तौर-तरीकों से चिढ़ हुआ करती थी. फिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा और सब कुछ बदल दिया.
शाहरुख खान का बॉलीवुड तक का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. आज भले ही हम उन्हें स्क्रीन पर देखकर तालियां बजाते हैं, पर एक वक्त था जब SRK फिल्मों से दूर भागते थे. 1991 में डेक्कन हेराल्ड को दिए एक इंटरव्यू में शाहरुख ने खुद कबूल किया था कि उन्हें फिल्मों की दुनिया से कभी कोई लगाव नहीं रहा. जब भी वो फिल्म इंडस्ट्री की बातें सुनते थे तो उनका मन अजीब सा हो जाता था. वो इस चकाचौंध का हिस्सा कभी नहीं बनना चाहते थे. उनके मन में अपनी एक अलग दुनिया थी जहां बॉलीवुड के लिए कोई खास जगह नहीं थी.
फिर शाहरुख की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने उनकी पूरी सोच बदल कर रख दी. साल 1990 में उनकी मां लतीफ फातिमा खान का निधन हो गया. यह शाहरुख के लिए लाइफ का सबसे बड़ा झटका था. शाहरुख अपनी मां से बेहद प्यार करते थे. उनकी मां का हमेशा से एक ही सपना था कि वो अपने बेटे को बड़े पर्दे यानी सिल्वर स्क्रीन पर देखें. मां के जाने के बाद शाहरुख पूरी तरह टूट चुके थे. उन्होंने तय किया कि वो अपनी मां का यह सपना हर हाल में पूरा करेंगे. उन्होंने कहा भी था कि शायद अब बहुत देर हो चुकी है पर फिर भी वो यह सब अपनी मां के लिए ही कर रहे हैं.
मां के जाने के बाद शाहरुख खान के लिए दिल्ली में रहना नामुमकिन सा हो गया था. दिल्ली के अपने पुराने घर का कोना-कोना उन्हें अपनी मां की याद दिलाता था. वो उस दर्द से बाहर निकलना चाहते थे. शाहरुख ने तय किया कि वो दिल्ली छोड़कर बॉम्बे शिफ्ट हो जाएंगे ताकि खुद को काम में दिन-रात बिजी रख सकें. यही वो फैसला था जिसने हिंदी सिनेमा को उसका नया सुपरस्टार दिया. शाहरुख ने 1989 में फेमस टीवी शो 'फौजी' से अपने करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद 1992 में फिल्म 'दीवाना' से उन्होंने बॉलीवुड में अपना धमाकेदार डेब्यू किया.
शाहरुख खान का एक्टिंग को लेकर नजरिया हमेशा से बहुत अलग रहा है. यूथ के लिए उनकी सोच काफी इंस्पायरिंग है. SRK कभी किसी बड़े एक्टिंग इंस्टीट्यूट या क्लास में जाने के फेवर में नहीं रहे. उनका मानना था कि एक्टिंग कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे कोई टीचर आपको क्लासरूम में बैठकर सिखा सके. शाहरुख कहते हैं कि उन्होंने एक्टिंग बुरे एक्टर्स को देखकर सीखी है. जब वो दूसरों को स्क्रीन पर गड़बड़ करते देखते थे तो समझ जाते थे कि क्या नहीं करना है. उनका मानना है कि गलतियों से सीखना और लोगों को ऑब्जर्व करना ही असली एक्टिंग स्कूल है.
शाहरुख का साफ कहना था कि एक्टिंग आपके अंदर खुद होनी चाहिए. अगर यह आपके अंदर है तो प्रैक्टिस के साथ बेहतर होती जाएगी और अगर नहीं है तो दुनिया का कोई भी टीचर आपको एक्टर नहीं बना सकता. शाहरुख की यही ऑनेस्टी और मेहनत उन्हें बाकी सब से अलग बनाती है. उन्होंने अपनी जिंदगी में गलतियां कीं उनसे सीखा और खुद को तराशा. आज वही लड़का जिसने बिना किसी गॉडफादर के मुंबई में कदम रखा था वो पूरी दुनिया पर राज कर रहा है.
काम की बात करें तो शाहरुख खान का जलवा आज भी वैसा ही बरकरार है. 'पठान' और 'जवान' जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद अब फैंस उनकी अगली फिल्म का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. SRK जल्द ही डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद की मच-अवेटेड फिल्म 'किंग' में नजर आने वाले हैं. यह फिल्म 24 दिसंबर को थिएटर्स में रिलीज होने के लिए तैयार है. शाहरुख खान का यह सफर हर उस यंगस्टर के लिए एक बड़ी मिसाल है जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है.