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शान का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू: 80 साल होने को आए, अब तो आजादी के बाद के नायकों की कहानियां सुनाओ...

Shan Interview: बॉलीवुड के फेमस सिंगर शान ने नेशनलिज्म को लेकर अपनी सोच शेयर करते हुए कहा कि देशभक्ति किसी प्रतियोगिता का विषय नहीं है, बल्कि देशहित में सोचने और काम करने की भावना है. उन्होंने क्रांतिकारियों के बलिदान के साथ छात्र आंदोलन पर भी अपनी राय रखी.

Written By Alkesh Kushwaha
Published: Sep 18, 2026, 06:58 AM IST | Updated: Sep 18, 2026, 07:26 AM IST
Image Credit: shaan interview
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सिंगर शान ने नेशनलिज्म, क्रांतिकारियों के बलिदान, युवाओं के लिए सही आदर्श और छात्र विरोध-प्रदर्शन जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद किसी प्रतियोगिता का विषय नहीं है, बल्कि देश के हित में सोचने और काम करने की भावना है. इसके साथ ही उन्होंने छात्रों के विरोध-प्रदर्शन को सही बताते हुए सरकार और पुलिस के रवैये पर भी सवाल उठाए. शान अपनी गायकी के लिए तो लंबे समय से लोगों के बीच फेमस हैं, लेकिन वह सामाजिक मुद्दों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखते रहे हैं. उन्होंने जी न्यूज से हालिया बातचीत में राष्ट्रवाद को लेकर अपनी सोच शेयर की. चलिए देखते हैं कि आखिर जी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने किन मुद्दों पर चर्चा की?

रिपोर्टर- क्या आज के दौर में राष्ट्रवाद के मायने काफी बदल गए हैं? जिंगोलिज्म और नेशनलिज्म में एक बहुत ही महीन लाइन हो गई है? इस पर आपका क्या कहना है?

शान- नेशनलिज्म कोई कॉम्पिटिशन नहीं है कि नेशनलिज्म में आप आगे हैं, मैं पीछे हूं. मैं ये कर लूं तो मैं आगे चला जाऊंगा. ऐसी कोई तय चीज नहीं है. आखिरकार नेशनलिज्म क्या है? यही कि आप अपने देश के हित में जो भी सोचें, वह देश के हित में आप सोचें और देश इन सभी चीजों से ऊपर है. ये बात भी मैं समझता हूं कि हम जो अपने क्रांतिकारियों के बलिदान के बारे में कहते हैं, तो लोग कहेंगे कि वो तो हो चुका है और अब ये बात पुरानी हो चुकी है. देश को आजाद हुए 80 साल हो जाएंगे, लेकिन दुख की बात है कि उसके बाद भी हमें कहानियां बनानी पड़ रही हैं. अगले दौर में हमें स्वतंत्रता के बाद के लोगों पर कहानियां बनानी चाहिए, जिन्होंने अपनी सोच और जीवन में जो भी किया है, वह देश के हित में किया है. हमारे कितने आर्मी ऑफिसर्स हैं.

हम हमेशा आजकल नकारात्मक चीजों की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं. उनको देखकर एक एडवांटेज ये होता है कि हम इतने बुरे तो नहीं हैं, हम ऐसे तो नहीं हैं. हम वो मीम्स देखेंगे, कोई अजीब सी हरकत कर रहा है, उसे देखकर हंसेंगे और उसका मजा लेंगे. लेकिन अगर किसी के अंदर कोई गंभीर बात है, जिस पर हमें मनन करना चाहिए, सोचना चाहिए, तो वह हमें बोरिंग लगती है. हम कहते हैं- ‘यार, ये भाषण दे रहा है.’ कहीं न कहीं जो आकांक्षा होती है कि मुझे बेहतर बनना है और अच्छा बनना है, वो चीज कहीं न कहीं खत्म होती जा रही है. हमें अपने युवाओं के सामने सही आदर्श रखने होंगे, ताकि उन्हें देखकर उनके अंदर एक चेतना जागे और एक पॉजिटिव प्रभाव पड़े कि मुझे भी कुछ अच्छा करना है.'

रिपोर्टर- एक पैरेंट के तौर पर छात्र विरोध-प्रदर्शन पर आपकी क्या राय है?

शान- देखिए, ये बहुत अच्छी बात है कि छात्रों ने विरोध-प्रदर्शन किया. हम कई बार सोशल मीडिया पर डाल देते हैं और छोड़ देते हैं. इस मुद्दे पर मैंने बहुत काफी हद तक रिसर्च की कि NEET की एग्जाम कब से शुरू हुई, कब क्या हुआ. NEET की परीक्षाएं 2013 से शुरू हुई थीं और 2016 में अनिवार्य हुईं. आप समझ रहे हैं, ये 10 साल पुरानी बात है. जब से ये पेपर शुरू हुआ है कि आपको अगर मेडिकल में दाखिला चाहिए, तो आपको NEET का पेपर देना पड़ेगा. पहली बार 2026 में दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया. सोचिए, आप पूरा मैराथन दौड़ते हो और उसके बाद कहा जाता है कि नहीं, फिर से दौड़ो. वो थका हुआ बच्चा महीनों, सालों से एक चीज के लिए तैयारी करता है. सरकारी कॉलेज में मौका 2.6 से 3 प्रतिशत का होता है. प्राइवेट कॉलेजों में 58 प्रतिशत संभावना है कि आप पास भी नहीं होंगे. वो करते-करते आप वहां पहुंचते हो, पेपर देते हो, आपको पता होता है कि आपने बहुत अच्छा किया है और तनाव खत्म होता है, फिर दोबारा परीक्षा देनी होती है. लेकिन उनके नजरिए से यह सही है कि किसी को पेपर आसानी से मिल गया और उसे अच्छे अंक मिले, जबकि आपको वो अंक नहीं मिलेंगे क्योंकि आपके पास वो पेपर नहीं मिला, तो दोबारा परीक्षा की मांग तार्किक है.

अगर इस पेपर का लीक भी आप देखें, तो किस लेवल पर हुआ था कि जब सेंटर ने पेपर लीक किया. किसी ने किसी को बोल दिया और वहां से पेपर लीक हुआ. तो ये सब कर-कराकर मुझे लगा कि आधी जानकारी पूरी तरह से कनवे सही तरीके से नहीं की गई, जो लोग प्रोटेस्ट पर भी आए और आजकल ये बहुत चलन आ गया है और उसमें मुझे यही मानना है कि आप सोल्यूशन दो. जैसे आईएमएम के साथ पार्ट ऑफ डायरेक्टर बोर्ड, बहुत सारे ऑर्गनाइजेशन कि आप एजुकेशन में क्या दे रहे हो. बेसिक एजुकेशन में आपको क्या शामिल करना है और उस लेवल के बच्चों को बहुत जरूरत है कि आप समझाएं.

शायद रेजिग्नेशन तक बात नहीं पहुंचती. आप बताओ सोल्यूशन क्या है? अगर आप मान जाते हैं, तो भी सोल्यूशन नहीं मिल रहे हैं. आजकल ये आदत डाल ली है कि हम प्रोटेस्ट करेंगे. सरकार को थोड़ा पहले प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी. आप बातचीत शुरू कर सकते थे कि बताइए, इसका समाधान क्या है? पुलिस का व्यवहार बेहद खराब था और मामला जरूरत से ज्यादा आगे तक चला गया. उनके मुताबिक ऐसी स्थिति को समय रहते संभाला जाना चाहिए था. डायलॉग एक बहुत अच्छा ऑप्शन है. हमारे सिंगर्स की एक संस्था है सामरा. हमारे जो सिंगर्स से म्यूजिसियन हैं, उनके हक पर एक रिवेन्यू कलेक्शन बनाया है.

रिपोर्टर: मुकेश खन्ना पर आपकी क्या राय है?

शान- मुकेश जी काफी ऑथेंटिक पर्सन हैं. वो अपनी सोच पर बहुत चलते हैं. वो ऐसे नहीं हैं कि आज ये बोल रहे हैं और कल कुछ. वो काफी साफ दिल के हैं. मैं तो बस एक इंटरव्यू करने गया था उनके साथ. हम एक रियलिटी शो कर रहे थे और उसमें एक बच्ची गा रही थी. उसकी दिली इच्छा थी कि राम रहीम बाबा से उनको मिलना था. क्योंकि वो उनके फॉलोअर्स में थे, तो उस चक्कर में मुझे किसी ने बोला कि उनकी एक फिल्म आ रही है. तो मैंने कहा, चलो बच्ची को लेकर मैं जाता हूं. मैं उनको लेकर वहां पहुंच गया, उनकी फोटो वगैरह हो गई. इमोशनली आप कुछ कर देते हैं और बाद में पता चलता है कि कुछ और ही था.

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About the Author

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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