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Sanjay Mishra Birthday Special: बॉलीवुड एक्टर संजय मिश्रा का नाम आज हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा सितारों में शुमार है, जिन्होंने बिना किसी पारंपरिक हीरो बने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. फिल्मों में अपनी पहचान बनाने से कई साल पहले वह नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) के स्टूडेंट थे, जिसके किस्से किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थे. एनएसडी के दिनों में संजय मिश्रा और तिग्मांशु धूलिया हॉस्टल रूममेट्स थे. दोनों ने एक दिन हॉलीवुड फिल्म 'बेवर्ली हिल्स कॉप' देखी और एक्टर एडी मर्फी (Eddie Murphy) से इतना ज्यादा प्रभावित हो गए थे कि खुद को उन्हीं की तरह समझने लगे थे.
वहीं इसके अगले ही दिन संजय मिश्रा और तिग्मांशु धूलिया एक ऐसी घटना में उलझ गए थे, जिसमें डीटीसी बसें, ड्राइवर और पुलिस तक कहानी का हिस्सा बन गए थे. इस किस्से के बारे में संजय मिश्रा ने खुद खुलासा किया है. संजय मिश्रा कल (6 अक्टूबर) को अपना 63वां जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे. ऐसे में संजय मिश्रा के जन्मदिन के मौके पर आपको एक्टर के उन दिनों का यह दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं, जब वे स्टार बनने से पहले दिल्ली की सड़कों पर एडी मर्फी बनने निकले थे.
संजय मिश्रा ने दिल्ली में आयोजित 'कथाकार' स्टोरीटेलिंग फेस्टिवल में अपनी दिल्ली में गुजारे खास योगदान के बारे में खुलकर बात की थी. भले ही संजय मिश्रा का जन्म बिहार के दरभंगा में हुआ था और उनका बचपन वाराणसी में बीता था, लेकिन कहानियों और सिनेमा के शौकीन संजय को अब अभिनय का बुखार चढ़ा था तो उन्होंने 1989 में दिल्ली का रुख किया. यहां उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लेकर एक्टिंग की पढ़ाई शुरू की.

इस दौरान उन्होंने अपने एनएसडी के दिनों का एक मजेदार किस्सा याद करते हुए बताया कि फेमस निर्देशक और एक्टर तिग्मांशु धूलिया उनके हॉस्टल के रूममेट थे. तिग्मांशु के बड़े भाइयों को हॉलीवुड फिल्मों को देखने का बड़ा शौक था, इसलिए संजय मिश्रा भी उनके साथ फिल्में देखते थे. एक दिन उन्हें हॉलीवुड फिल्म 'बेवर्ली हिल्स कॉप' के बारे में पता चला और दोनों ने तुरंत उसे देखने का प्लान बनाया. फिल्म से वे इतने ज्यादा प्रभावित हुए थे कि खुद को फिल्म के हीरो एडी मर्फी समझ बैठे थे.
वहीं अगले ही दिन उन्हें कॉलेज में खबर मिली थी कि एक डीटीसी बस ड्राइवर ने उनकी कॉलेज की सीनियर एक्ट्रेस के साथ छेड़खानी की है. संजय और तिग्मांशु अपने दोस्तों के साथ बस रुकवाकर उस ड्राइवर को ढूंढने लगे. जैसे ही ड्राइवर मिला तो दोनों खुद को 'एडी मर्फी' समझने लगे और उसकी तरह एक्शन मूव्स दिखाने लगे. लेकिन तभी बाकी डीटीसी बस के ड्राइवर भी अपने हाथों में लोहे की छड़ी लेकर आ गए और उन्हें घेर लिया. यह देखने के बाद दोनों मौके से दुम दबाकर भाग निकले.

इसी दौरान दिल्ली में बिताए दिनों को याद करते हुए संजय ने बताया कि जब वे पहली बार दिल्ली आए थे, तो संजय दत्त की फिल्म 'रॉकी' (1981) सिनेमाघरों में लगी हुई थी. अपने पिता के साथ रिक्शे में जाते हुए उन्होंने पूछा कि इस शहर में कितने सिनेमा हॉल हैं, तो पिता ने बताया कि लगभग 100 और वाराणसी में सिर्फ 6 सिनेमा हॉल देखने वाले संजय मिश्रा काफी हैरान रह गए थे.

बता दें कि संजय मिश्रा ने इस दौरान दिल्ली से अपने रिश्ते को बयां करते हुए बताया था कि 'अगर वाराणसी मेरी जन्मभूमि और आधार है, तो दिल्ली मेरे बड़े भाई की तरह है. जब हम छोटे होते हैं तो माता-पिता सिखाते हैं, लेकिन बड़े होने पर हम अपने भाई-बहनों, दोस्तों और खुद की गलतियों से सीखते हैं. बढ़ते समय में दिल्ली ने मुझे बहुत कुछ सिखाया है. मैं इस शहर को हमेशा बड़े भाई की तरह प्यार और सम्मान देता रहूंगा.'