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नितेश तिवारी की मेगा बजट और मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ 5 नवंबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जिसने सिर्फ 2 दिनों के अंदर दुनियाभर में 200 करोड़ की कमाई कर ली. वैसे अगर देखा जाए तो विदेश में भारतीय फिल्मों का ऐसा क्रेज कम ही देखने को मिलता है, जैसा नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण: राइज ऑफ अ लेजेंड’ के लिए दिखा. हफ्ते के बीच में रिलीज होने के बावजूद दिन के तीनों शो पूरी तरह हाउसफुल रहे. ट्रेलर और गानों से भले ही बहुत उम्मीदें नहीं बंधी थीं, लेकिन बड़े पर्दे पर फिल्म का स्केल देखकर आंखें खुली रह गईं. सवा 3 घंटे की ये फिल्म कहीं बोर नहीं करती. इस फिल्म की कहानी और हर एक सीन न लोगों को बांधकर रखा.
हमारे लिए ये कहना गलत नहीं होगा कि हम सभी ने रामानंद सागर की ‘रामायण’ और अपने आस-पास की रामलीलाएं देखकर भगवान राम की कहानी को समझा है. इस नई फिल्म से उम्मीद थी कि ये आज के दौर के हिसाब से बनी होगी, लेकिन सबसे बड़ा सरप्राइज इसका रावण निकला. साउथ सुपरस्टार यश ने रावण का रोल निभाया है. पुरानी फिल्मों की तरह यहां रावण कोई सीधा-साधा जालिम खलनायक नहीं दिखता. शुरुआत के दो घंटों में तो वो किसी शोषित तबके के लिए लड़ने वाले हीरो की तरह दिखाया जाता है. मेकर्स ने इस किरदार को इतनी गहराई दी है कि देखने वाला एक पल के लिए सोचने पर मजबूर हो जाता है. एक बार को तो लोगों को उसके लिए हमदर्दी होने लगती है.
कहानी शुरू होती है देवताओं और असुरों की पुरानी लड़ाई से, जिसमें हार के बाद असुर पाताल लोक में जाकर छिप जाते हैं. वहां उनकी हालत बहुत खराब होती है, लोग दाने-दाने को मोहताज और बिल्कुल लाचार दिखते हैं. इसी मुश्किल दौर में रावण सामने आता है, जिसे उसकी मां कैकसी अपने लोगों का खोया हुआ सम्मान लौटाने के लिए तैयार करती है. इसके बाद रावण कड़ी तपस्या करके जबरदस्त ताकत हासिल करता है और कुबेर से लंका छीन लेता है. गद्दी संभालते ही वो साफ कहता है, ‘जो खाना राजा की थाली में होगा, वही प्रजा को मिलेगा और अगर राजा का महल सोने का बनेगा, तो गरीब की झोपड़ी भी सोने की ही चमकेगी’.
धार्मिक किताबों में हम सब ने रावण के अहंकार के कई किस्से सुने हैं, लेकिन इस फिल्म में कहानी को बिल्कुल नए नजरिए से पेश किया गया है. यहां रावण को किसी ‘विलेन’ की तरह नहीं, बल्कि एक अलग ही रूप में दिखाया गया है. कहानी के एक सीन में जब रावण का बहनोई शराब परोसने वाली दासी के साथ बदतमीजी करता है, तो रावण उस दासी के मान-सम्मान की खातिर अपने ही बहनोई को मौत के घाट उतार देता है. ये देखकर साफ लगता है कि रावण नहीं, बल्कि मरने वाला शख्स ‘अहंकारी’ था. साधु-संतों को सताने और लूटपाट मचाने वाली पुरानी बातों को यहां किनारे रख दिया गया है. इसके उलट रावण को अपनी प्रजा और औरतों की हिफाजत के लिए किसी भी हद तक जाने वाला राजा दिखाया गया है.

फिल्म में सीता हरण वाले सीन को बिल्कुल अलग और नए नजरिए से पेश किया गया है, जिसको देखने के बाद एक बार को तो थोड़ी हैरान भी होती है. पुरानी कहानियों में अक्सर शूर्पणखा का मजाक उड़ाया जाता था, पर यहां उसे काफी मजबूत दिखाया है. जब लक्ष्मण उसकी नाक काटते हैं, तो सीता खुद उन्हें ऐसा करने से रोकती हैं. बहन के साथ हुई इस बदसलूकी की खबर सुनकर रावण गुस्से में आगबबूला हो जाता है. कहानी में उसका इरादा सीता की खूबसूरती पाना नहीं, बल्कि अपनी बहन के अपमान का बदला चुकाना है, लेकिन एक औरत की इज्जत के बदले दूसरी औरत को उठा ले जाना ही उसकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित होता है.
भगवान राम के रोल में रणबीर कपूर के काम पर लोगों की अलग-अलग राय आ रही है. कुछ दर्शकों का कहना है कि उनके चेहरे के एक्सप्रेशन जरूरत से ज्यादा शांत हैं और उनमें ठहराव कुछ ज्यादा ही दिखता है. मगर हकीकत ये भी है कि आज के समय में ऐसे पूजनीय किरदारों को पर्दे पर उतारना बिल्कुल भी आसान नहीं है. थोड़ी सी भी गलती तुरंत किसी बड़े विवाद की वजह बन सकती है. इसी वजह से रणबीर ने अपने किरदार को बहुत शांत, गंभीर और संतुलित रखकर एक सेफ रास्ता चुना है. जब वे माता कैकेयी से विदा लेते हैं या फिर जंग का ऐलान करते हैं, तब उनके काम की असली गहराई साफ नजर आती है. दूसरी तरफ रवि दुबे ने भी लक्ष्मण के रोल में सबका दिल जीत लिया है.
सीता के रोल में साई पल्लवी ने कमाल का काम किया है. उन्होंने इस किरदार को बड़ी सादगी और शालीनता से निभाया है. पहले लोग उनके चुनाव पर सवाल उठा रहे थे, पर स्क्रीन पर उन्हें देखने के बाद सबका मुंह बंद हो जाता है. हालांकि, पुष्पक विमान वाले सीन में मन थोड़ा खट्टा जरूर होता है. एक तरफ जटायु अकेले रावण से जान लड़ाकर भिड़ रहे होते हैं, वहीं दूसरी तरफ सीता बस डरी-सहमी खड़ी नजर आती हैं. फिल्म की शुरुआत में उन्हें एक निडर योद्धा की तरह दिखाया गया था, इसलिए उनका अचानक यूं लाचार दिखना थोड़ा अखरता है. अगर वे भी पलटकर रावण को जवाब देतीं, तो उस पूरे सीन में अलग ही जान आ जाती.
थोड़ी-बहुत कमियों को छोड़ दें तो फिल्म का बेस एकदम सॉलिड तैयार किया गया है. पहले पार्ट ने लोगों के दिलों में अगले हिस्से को लेकर जबर्दस्त हाइप बना दी है. जब अगले भाग में रणबीर कपूर पूरी ताकत के साथ भगवान राम के अवतार में उतरेंगे और सनी देओल हनुमान जी बनकर दहाड़ेंगे, तो थिएटर्स में सीटियां और तालियां बजना पक्का है. शो खत्म होते ही लोग हॉल से बाहर निकलते हुए आपस में यही चर्चा कर रहे थे कि दूसरा पार्ट तो लंका में अपने देसी ‘एवेंजर्स’ जैसा भौकाल मचाएगा. अगर मेकर्स ने यही जोश और पकड़ बनाए रखी, तो ये मूवी इंडियन सिनेमा के इतिहास का सबसे बड़ा धमाका साबित होगी.