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मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद आज बुधवार को राजपाल यादव एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां उनके द्वारा दिए गए भुगतान प्रस्ताव और कोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन को लेकर सुनवाई हुई. अभिनेता राजपाल यादव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ी टिप्पणी की. जस्टिस बागची ने चेतावनी दी कि अगर स्थिति ऐसी ही रही, तो उनकी सजा बढ़ाई भी जा सकती है.
राजपाल यादव ने कोर्ट में कहा, "‘अता पता लापता’ फिल्म में मेरा काफी नुकसान हो चुका है. मेरे 17 करोड़ रुपये डूब गए. आप जब चाहें, जहां भेजें, मैं जाने के लिए तैयार हूं. लेकिन कुल रकम 22 करोड़ रुपये थी. फिल्म से मैंने एक रुपया भी नहीं कमाया और यह फिल्म एक भी थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई." आज राजपाल यादव ने 1.15 करोड़ रुपये के डिमांड ड्राफ्ट पेश किए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने कोर्ट रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया.
सुप्रीम कोर्ट से बाहर निकलते वक्त पत्रकारों से राजपाल यादव ने बातचीत की. उन्होंने कहा, "फिल्मों के लिए कभी लोन नहीं लिया जाता है. घर बनाने या जमीन खरीदने के लिए लोन लिया जाता है. फिल्में बनाने के लिए या तो पैकेज डील होती है या फिर इन्वेस्टमेंट डील होता है. जब राजपाल यादव खुद ही 100 फिल्म कर रहा है तो फिल्मों के लिए लोन क्यों लेगा?"
उन्होंने आगे कहा, "माननीय सुप्रीम कोर्ट में यह मसला है. हमारे लीगल्स इस मामले में बयान देंगे. मैं अपने देश, अपने सुप्रीम कोर्ट की दिल से सम्मान करता हूं. जो भी जहां भी फैसला होगा. वह सर्वमान्य होगा."
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव और 'मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' के बीच विवाद की शुरुआत 5 करोड़ रुपये के लोन से हुई थी, जो उन्होंने एक फिल्म बनाने के लिए लिया था. फिल्म समय पर न बनने पर चार समझौते हुए, जिसमें तीसरे समझौते के तहत 8 सिक्योरिटी चेक दिए गए. बाद में 21 अप्रैल 2013 को चौथे सहमति समझौते में 10-10 करोड़ रुपये के चार नए चेक जारी करने और पुराने 8 चेक वापस करने की बात हुई. राजपाल यादव का आरोप है कि कंपनी ने पुराने चेक वापस नहीं किए और उनमें से 7 चेक बैंक में लगा दिए जो बाउंस हो गए. इसके बाद 'नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट' की धारा 138 के तहत आपराधिक शिकायतें दर्ज हुईं.
मई 2024 में सेशंस कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 6 महीने की जेल की सजा सुनाई, जिस पर दिल्ली हाई कोर्ट ने समझौता होने के भरोसे पर रोक लगाई. हालांकि, बार-बार वादे के बावजूद भुगतान न करने पर फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने सरेंडर का आदेश दिया. 5 फरवरी को सरेंडर के बाद 1.5 करोड़ रुपये जमा करने पर उन्हें अंतरिम राहत मिली, लेकिन बाकी रकम न चुकाने पर 3 महीने की सजा सुनाई गई, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. उनका तर्क है कि नए समझौते के बाद पुराने चेक अमान्य हो गए थे.
#WATCH | Delhi | Actor Rajpal Yadav arrives at the Supreme Court in connection with a cheque bounce case in which the Court had directed him to deposit Rs 2 crores with the Supreme Court registry https://t.co/AQI6Z9QR1v
— ANI (@ANI) October 7, 2026
मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 8 सितंबर को उन्हें पैसे जमा करने की शर्त पर सरेंडर से छूट दी और बाद में 15 सितंबर को समयसीमा बढ़ाकर 5 अक्टूबर तक की. हालांकि, 5 अक्टूबर 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने जब 5 करोड़ रुपये जमा न होने की बात सामने आई, तो कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई. राजपाल यादव के वकील ने बैंक छुट्टियां और 50 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट की कॉपी पेश कर बैंक प्रोसेसिंग का हवाला दिया, जिस पर बेंच ने ड्राफ्ट के असली होने पर संदेह जताया.
शिकायतकर्ता के वकील द्वारा कोर्ट की गरिमा का सम्मान न करने और कुल 7.5 करोड़ रुपये की देनदारी पर अवमानना का मामला चलाने की मांग की गई. इस पर जस्टिस बागची ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि एक्टर ने शिकायतकर्ता को ठगकर गरीब बना दिया है, उनके घमंड को सही जगह लाने की जरूरत है और उनकी जगह जेल में है. सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पैसे वसूलने के अधिकार को ध्यान में रखते हुए याचिका तुरंत खारिज करने से परहेज किया और निष्पक्षता बनाए रखी.