दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार (8 अक्टूबर) सुबह गोवा के डोना पाउला स्थित उनके घर पर 75 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें उनके घर पर बेहोशी की हालत में पाया गया और पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. भारतीय सिनेमा में कुछ सबसे दमदार किरदार निभाने के लिए मशहूर इस अनुभवी अभिनेता का नाम मुंबई के अंडरवर्ल्ड से जुड़ा था. नाना पाटेकर का नाम गैंगस्टर मनोहर 'मान्या' सुर्वे से जोड़ा गया था.
नाना पाटेकर का गैंगस्टर मान्या सुर्वे से रिश्ता उनकी मां के परिवार की तरफ से था. शहर के सबसे खतरनाक गैंगस्टरों में से एक मनोहर 'मान्या' सुर्वे, नाना पाटेकर के मामा के बेटे थे.
नाना पाटेकर ने एक बार गैंगस्टर किरदारों के तौर-तरीकों को समझने के बारे में बताते हुए मान्या सुर्वे का जिक्र किया था. उन्होंने बताया कि उनकी मां के परिवार में कुछ लोग आपराधिक सोच वाले थे और उन्होंने मान्या सुर्वे को अपना ममेरा भाई बताया. हालांकि, एक्टर की मां अपने बच्चों को उस माहौल से दूर रखने के लिए पक्का इरादा कर चुकी थीं. टेरिटोरियल आर्मी के पूर्व अधिकारी नाना पाटेकर ने याद किया कि उनकी मां उन्हें और उनके भाई-बहनों को मुंबई से दूर ले गई थीं ताकि वे अपने रिश्तेदारों के माहौल में न फंस जाएं.
'कौन बनेगा करोड़पति 16' के एक एपिसोड के दौरान उन्होंने बताया था कि वो फैसला कितना अहम था. उन्होंने यह भी माना कि अगर उन्होंने एक्टिंग का रास्ता नहीं चुना होता, तो वे अंडरवर्ल्ड में जा सकते थे. उन्होंने आगे कहा कि बचपन में ऐसे लोगों के संपर्क में रहने से उन्हें यह पता चल गया था कि अपराधी आम तौर पर कैसा व्यवहार करते हैं.
मान्या सुर्वे पढ़े-लिखे गैंगस्टरों में से एक था, जिसने कीर्ति कॉलेज से ग्रेजुएशन किया था. 1970 के दशक के आखिर और 1980 के दशक की शुरुआत में मान्या सुर्वे शहर की गैंग वॉर में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर उभरा. उसे एक मर्डर केस में यरवदा जेल भेजा गया था, लेकिन बाद में वह जेल से भागकर मुंबई लौट आया. यहां उसने अपना गैंग बनाया और पठान गैंग से जुड़ गया.
मान्या सुर्वे का नाम फरवरी 1981 में दाऊद इब्राहिम के बड़े भाई शब्बीर इब्राहिम कास्कर की हत्या में आया, जिससे मुंबई के गैंग्स के बीच दुश्मनी और बढ़ गई. इसके एक साल से भी कम समय बाद 11 जनवरी 1982 को वडाला में अंबेडकर कॉलेज के पास मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच के अफसरों इसाक बागवान और राजा तंबत ने मान्या सुर्वे को गोली मारकर मार डाला. इस ऑपरेशन को आम तौर पर मुंबई का पहला आधिकारिक पुलिस एनकाउंटर माना जाता है और बाद में इसी घटना पर 2013 की फिल्म 'शूटआउट एट वडाला' बनी.
कई इंटरव्यू में नाना पाटेकर ने माना था कि लोग उनसे डरते थे, क्योंकि वे बहुत हिंसक थे और ज्यादा बात नहीं करते थे. हालांकि, नाना ने इस बात पर जोर दिया कि उस झगड़े का उनकी जिंदगी या करियर पर कोई असर नहीं पड़ा.
नाना पाटेकर ने खुलकर माना था कि उनकी कड़वी बातों से फिल्ममेकर नाराज हो सकते थे, लेकिन साथ ही कहा, 'मैं इसे अपनी गलती नहीं मानता. अगर हम एक-दूसरे को इतनी अच्छी तरह जानते हैं, तो छोटी-मोटी गलतफहमियों को समझाने की क्या जरूरत है?' नाना ने सुलह की गुंजाइश बनाए रखी और कहा, 'सही समय आने पर हम इसे सुलझा लेंगे.'
नाना पाटेकर का गुरुवार (8 अक्टूबर) सुबह 5:20 बजे उनके घर पर संदिग्ध कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ने) के कारण निधन हो गया. वे 75 वर्ष के थे. वे अपने घर पर बेहोश पाए गए और उन्हें इलाज के लिए तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया. खबरों के अनुसार, उन्होंने रात करीब 2:30 बजे अपने दोस्त को मैसेज करके बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं है. उनके दोस्त सुबह 4 बजे उनके घर पहुंचे.
यह अनुभवी अभिनेता अपने केयरटेकर के साथ रह रहे थे. वहीं अब ताजा जानकारी के मुताबिक, मिले दस्तावेज़ों से पता चला है कि नाना पाटेकर की मौत अननेचुरल थी. पणजी पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत अप्राकृतिक मौत (UD) का मामला दर्ज किया है. मामले की आगे की जांच चल रही है.