कभी खुद को जलाया, तो कभी हुए लहूलुहान ... जब को-एक्टर्स और डायरेक्टर्स को भी नहीं पता था कि नाना पाटेकर क्या करेंगे!
Nana Patekar's Unscripted Scene: हिंदी सिनेमा में कई बड़े स्टार्स आए और गए, लेकिन दिग्गज कलाकार नाना पाटेकर जैसा कोई दूसरा न हुआ और न ही होगा. जब वो पर्दे पर आते हैं, तो डायलॉग सिर्फ सुने नहीं जाते, सीधे सीने में उतरते हैं. नाना की सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वो कभी कैमरे के सामने रटे-रटाए पन्ने पढ़ने नहीं आए थे.
नाना पाटेकर जब भी सीन को शूट करने जाते थे, तो स्क्रिप्ट को अपनी जेब में रखते थे और सीन में उतरकर ऐसा तूफान खड़ा करते थे कि सेट पर मौजूद को-एक्टर्स से लेकर डायरेक्टर तक हैरान रह जाते थे. अपनी इसी बेखौफ एक्टिंग के चक्कर में उन्होंने कई बार अपनी जान जोखिम में डाली, शरीर पर गहरे जख्म सहे और आग में झुलसे, लेकिन पर्दे पर जो जादू रचा, वो आज भी हिंदी सिनेमा के आइकॉनिक सीन में से एक हैं.
साल 1989 में विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म 'परिंदा' का क्लाइमेक्स आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है. इस फिल्म में नाना ने अंडरवर्ल्ड डॉन 'अन्ना' का रोल निभाया था. फिल्म के आखिरी सीन में अन्ना को आग में जलते हुए दिखाया जाना था. शूटिंग के दौरान नाना ने किसी बॉडी डबल या सेफ्टी मेजर्स की परवाह किए बिना उस सीन को खुद किया.
'परिंदा' के क्लाइमेक्स में झुलसे थे नाना पाटेकर
फिल्म 'परिंदा' का क्लाइमेक्स सीन शूट करते समय दुर्भाग्य से सेट पर आग बेकाबू हो गई और नाना पाटेकर असल जिंदगी में बेहद गंभीर रूप से झुलस गए. वो कई महीनों तक अस्पताल में जिंदगी और मौत से लड़ते रहे. दर्द और जलन इतनी भयानक थी कि वो लंबे समय तक एक्टिंग से दूर रहे, लेकिन अन्ना का वो खौफनाक और जलता हुआ चेहरा हमेशा के लिए आइकॉनिक बन गया.
जब 'क्रांतिवीर' में बिना स्क्रिप्ट के हिला डाला पूरा देश
नाना पाटेकर के करियर का सबसे यादगार सीन चुनना हो, तो फिल्म 'क्रांतिवीर' का वो फांसी वाला सीन और मशहूर डायलॉग 'ये मुसलमान का खून है, ये हिंदू का खून है...' सबसे पहले याद आता है. लेकिन बहुत ही कम ही लोग जानते हैं कि इस सीन की आधी से ज्यादा लाइनें और नाना का वो पागलपन भरा हंसना और रोना पूरी तरह से इम्प्रोवाइज्ड यानी स्क्रिप्ट में था. नाना ने डायरेक्टर मेहुल कुमार से कहा था कि वो अपने हिसाब से बोलेंगे. जब नाना ने कैमरे के सामने चिल्लाना और हंसना शुरू किया, तो सेट पर सन्नाटा छा गया।. सामने खड़े को-एक्टर्स भूल गए कि वो शूटिंग कर रहे हैं, क्योंकि नाना के चेहरे का जुनून पूरी तरह से असली था और इसी सीन ने उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिलवाया.
जब मनीषा कोइराला के छूटे थे पसीना
फिल्म 'तिरंगा' में जब नाना पाटेकर और राजकुमार साहब एक साथ आए, तो हर किसी को लग रहा था कि दो बड़े दिग्गज आपस में टकराएंगे. नाना ने 'शिवाजीराव वाघले' के किरदार में बिना किसी भारी-भरकम लिखावट के अपने ही अंदाज में सिगरेट सुलगाने और डायलॉग बोलने का तरीका खोज लिया. वहीं 'अग्नि साक्षी' में उन्होंने एक सनकी और शक्की पति का किरदार निभाया. उस फिल्म के कई सीन्स में जब नाना अचानक चिल्लाते या अपनी मेज पटकते, तो मनीषा कोइराला के चेहरे पर दिखने वाला डर कोई एक्टिंग नहीं, बल्कि असली घबराहट होती थी, क्योंकि किसी को नहीं पता होता था कि नाना अगले ही पल क्या कर बैठेंगे.
गुस्सैल मिजाज, लेकिन जिंदादिल इंसान
नाना पाटेकर के स्वभाव को लेकर इंडस्ट्री में हमेशा दो तरह की बातें होती हैं. कुछ लोग उन्हें बेहद गुस्सैल और सनकी मानते हैं, तो वहीं उन्हें करीब से जानने वाले कहते हैं कि उनका दिल सोने की तरह था. जो बात दिल में होती है, वो बिना किसी लाग-लपेट और झिझक के मुंह पर बोल देते हैं. चाहे सामने कोई कितना भी बड़ा स्टार क्यों न हो. वो दिखावे की चकाचौंध से दूर रहना पसंद करते हैं. महाराष्ट्र में जब किसान सूखे की मार झेल रहे थे, तब नाना ने 'नाम फाउंडेशन' बनाकर हजारों किसानों की मदद की. एक्टर का कहना था कि जब तक आप इंसानियत से नहीं जुड़ते, तब तक आप एक अच्छे कलाकार नहीं बन सकते हैं.
नाना का गुस्सा, बालकनी के बाहर बच्ची को लटकाया
मीरा नायर की सुपरहट फिल्म 'सलाम बॉम्बे' का एक बहुत असरदार और आइकॉनिक सीन आज भी लोगों को याद है, जो फिल्म में कहानी की रफ्तार को एक अलग मोड़ दे देता है. इस सीन में नाना पाटेकर गुस्से में अकेले बालकनी में खड़े दिखाई देते हैं, तभी उनकी बेटी उनके पास आती है और उनके साथ खेलने की जिद्द करती है. लेकिन नाना गुस्से में आकर, उसे गोद में उठाते हैं और जोर-जोर से हिलाते हुए बालकनी के किनारे पर लटका देते हैं.
फिल्म का ये सीन कई बार ऑडियंस को चौंका देता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म में काम करने वाले बच्चे असल में सड़कों पर रहने वाले बच्चे थे. फिल्म में आने से पहले, सभी कलाकारों को बॉम्बे में एक वर्कशॉप में एक्टिंग की क्लास दी गई थी. मगर नाना द्वारा किया गया ये सीन न तो स्क्रिप्ट की डिमांड थी और न ही ये डिस्किशन का हिस्सा था, फिर भी उन्होंने इतनी आसानी से इसे परफॉर्म किया कि लोग आज भी इस सीन को भूल नहीं पाए.