2 करोड़ का बजट और 200 करोड़ का धमाका: जानिए कैसे घर के मंदिर का गाना बना फिल्म की जान, संगीत का भी है ‘डिवाइन कनेक्शन’
Hanuman Ansh: 2 करोड़ रुपये के कम बजट में बनी फिल्म 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये से अधिक का आंकड़ा पार कर लिया है. जानिए इसके अनोखे संगीत, डिजाइन कनेक्शन और गायक श्रेयस धर्माधिकारी के संघर्ष और आध्यात्मिक सफर की पूरी कहानी-
Hanuman Ansh: 'हनुमान अंश' हाल के दिनों की सबसे बड़ी बॉक्स ऑफिस सनसनी बनकर उभरी है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है. 2 करोड़ रुपये से भी कम के बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार कर लिया है और अब यह वैश्विक स्तर पर रिलीज हो रही है.
इस सफलता ने अभिनेता, निर्देशक और निर्माता के प्रयासों को सुर्खियों में ला दिया है. हालांकि, अगर इस फिल्म के गाने और बैकग्राउंड म्यूजिक न होते, तो यह कहानी शायद इतनी प्रभावशाली नहीं बन पाती.
फिल्म के संगीत में क्या खास है?
फिल्म के संगीत की पड़ताल करते हुए 'स्क्रीन' ने इसके दो प्रमुख गायकों- 'जय हनुमान' गाने के गायक श्रेयस धर्माधिकारी और 'सियावर रामचंद्र की जय' के गायक और संगीतकार धीरेंद्र मूल कलाकार से खास बातचीत की. दिलचस्प बात यह है कि 'हनुमान अंश' की खूबसूरती इस बात में है कि इसमें पूरी फिल्म के लिए किसी एक संगीतकार को चुनने की पारंपरिक प्रथा को छोड़ दिया गया. इसके बजाय, अलग-अलग गानों के लिए अलग-अलग गायकों और संगीतकारों को एक साथ लाया गया, जिससे साउंडट्रैक को विभिन्न आवाजों और संगीतमय विविधता का अनोखा रूप मिला.
क्या है इस संगीत का डिवाइन कनेक्शन?
गानों और खुद इस फिल्म को जो चीज सबसे ज्यादा दिलचस्प बनाती है, वह है उस दिव्य ऊर्जा का बार-बार जिक्र, जिसने सभी को एक साथ जोड़ा. श्रेयस धर्माधिकारी और धीरेंद्र मूल कलाकार, दोनों का ही जब अपने-अपने गानों के लिए संपर्क किया गया, तो उनका नीम करोली बाबा और भगवान हनुमान से अपना विशेष आध्यात्मिक जुड़ाव था.
कौन हैं गायक श्रेयस धर्माधिकारी?
ग्वालियर में जन्मे महाराष्ट्रीयन श्रेयस धर्माधिकारी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद गायक बनने का सपना लेकर 2014 में मुंबई आए थे. ग्वालियर स्थित उनके घर में एक छोटा हनुमान मंदिर है और 'हनुमान अंश' में सुना गया गाना मूल रूप से उन्होंने उसी मंदिर के भगवान हनुमान के लिए लिखा था. अपने अनुभव के बारे में बताते हुए श्रेयस ने कहा, 'मैं हमेशा से आध्यात्मिक झुकाव रखता था, क्योंकि हमारे घर में हनुमान जी का एक छोटा मंदिर है. जब मैं मुंबई आया, तो मैं प्रसिद्धि के बारे में बहुत सोचता था, लेकिन अपने गुरुजी (जिनसे मैं शास्त्रीय संगीत सीखता हूं) से मिलने के बाद मेरा नजरिया बदल गया. मुझे एहसास हुआ कि संगीत में कितना कुछ है और यह कैसे इंसान को ईश्वर से जोड़ सकता है. वहीं से ईश्वर से जुड़ने का मेरा सफर शुरू हुआ.' उनकी यह कहानी 'हनुमान अंश' के मुख्य पात्र की कहानी से भी मिलती-जुलती है. एक बच्चा जो ईश्वर की खोज में निकलता है और आगे चलकर नीम करोली बाबा बनता है.
मुंबई में श्रेयस ने कैसे किया संघर्ष?
मायानगरी मुंबई में खुद को स्थापित करने और गुजर-बसर करने के लिए श्रेयस ने छोटे-बड़े हर तरह के काम किए. इन अनुभवों ने उनके संगीत निर्माण के कौशल को निखारने में मदद की, जबकि इसके साथ ही उन्होंने शास्त्रीय संगीत पर अपना ध्यान केंद्रित रखा.
'हनुमान अंश' से कैसे जुड़े श्रेयस?
'हनुमान अंश' का हिस्सा बनने के पल को याद करते हुए श्रेयस धर्माधिकारी ने बताया, 'मैं एक कंसर्ट में शामिल होने इस्कॉन (ISKCON) मंदिर गया था, जहां मेरी मुलाकात विशाल चतुर्वेदी से हुई. हम एक-दूसरे को लंबे समय से जानते थे और इससे पहले उनकी एक शॉर्ट फिल्म 'दिवाली' में साथ काम कर चुके थे. उन्होंने मुझे अपने ऑफिस में बुलाया और 'हनुमान अंश' के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन वे अभी भी एक ऐसे गाने की तलाश में हैं, जो नीम करोली बाबा द्वारा गांव में मंदिर स्थापित करने के लिए हनुमान जी की मूर्ति तराशने वाले प्रसंग के साथ सही बैठे. उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मेरे पास ऐसा कोई गाना है?
घर के मंदिर का गाना फिल्म में कैसे आया?
संयोग से श्रेयस के पास वैसा ही गाना तैयार था. उन्होंने याद करते हुए बताया, 'मैंने ग्वालियर में अपने घर के हनुमान मंदिर के लिए एक गाना लिखा था. मैंने उन्हें वह गाना सुनाया और वे हैरान रह गए. सब कुछ इतनी खूबसूरती से बैठ गया, मानो यह सब पहले से तय था.' हालांकि, श्रेयस ने खुलासा किया कि शुरुआत में उन्होंने गाने को भव्य रूप देने की कोशिश की थी, लेकिन विशाल चतुर्वेदी ने उनसे इस गाने को जितना संभव हो सके, उतना प्राकृतिक और सादा रखने को कहा.
बजट की कमी से कैसे पाए पार?
बजट की चुनौती से निपटने के लिए धीरेंद्र ने अपने संगीतकार दोस्तों के नेटवर्क का सहारा लिया. धीरेंद्र कहते हैं, 'मेरे कई दोस्त, जो बेहतरीन संगीतकार हैं, उन्होंने मेरी मदद की. उन्होंने बदले में कभी किसी चीज की उम्मीद नहीं की. उनमें से ज्यादातर ने अध्यात्म के प्रति अपने झुकाव के कारण यह काम किया, जबकि अन्य ने केवल मेरी दोस्ती के कारण ऐसा किया. हमारे पास गाना रिकॉर्ड करने के लिए स्टूडियो बुक करने का बजट नहीं था, इसलिए हमने अपने घर को ही एक स्टूडियो में बदल दिया जहां हमने गाने रिकॉर्ड किए. इसी तरह हम इसे पूरा कर पाए.'
कैंची धाम और फिल्म का क्या है दिव्य कनेक्शन?
कैंची धाम पहुंचने के अपने अनुभव के बारे में धीरेंद्र ने बताया, 'मैं चार साल से कैंची धाम जाना चाहता था, लेकिन यह योजना पिछले साल ही बन गई. दो महीने के भीतर, मैं विशाल से मिला, जिन्होंने फिल्म के लिए 43 दिनों का हनुमान चालीसा अनुष्ठान शुरू किया था. मैं उनके एक सत्र में शामिल हुआ, जब उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या मैं इस गाने को कंपोज़ कर सकता हूं. यह मेरे लिए एक अविश्वसनीय और अकथनीय अनुभव था, क्योंकि मैंने अभी-अभी कैंची धाम का दौरा किया था और अब मुझे बाबा जी पर बन रही फिल्म में संगीत देने का अवसर मिल रहा था. फिल्म बनाना शुरू करने से पहले ही मैं विशाल को जानता था, फिर भी उन्हें बाबा जी के साथ मेरे जुड़ाव के बारे में नहीं पता था। इसीलिए यह सब दिव्य है और टीम के हर सदस्य की ऐसी ही कहानियां हैं.'
पैसों को लेकर क्या थी टीम की सोच?
धीरेंद्र ने आगे कहा, 'हमने कभी आपस में पैसों के बारे में बात नहीं की. काम को पूरा करने के लिए जितनी कम से कम जरूरत थी, सिर्फ उतने ही संसाधनों का इस्तेमाल किया गया. हमने फिल्म के व्यावसायिक पहलू या संसाधनों के बारे में नहीं सोचा, बल्कि खुद को समर्पित कर दिया. हर बार जब हम किसी समस्या में फंसते थे, तो वे परेशानियां अपने आप ही हल हो जाती थीं.'
धीरेंद्र का बैकग्राउंड और पिछले काम कौन से हैं?
'सियावर रामचंद्र की जय' गाने के अलावा, धीरेंद्र इस फिल्म के बैकग्राउंड स्कोर के पीछे भी मुख्य चेहरा हैं. इससे पहले वे 'आर्टिकल 15' और 'उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी प्रसिद्ध फिल्मों में भी अपने संगीत का जादू बिखेर चुके हैं.