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72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का आयोजन मंगलवार को गुजरात में हुआ है.इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विनर्स को सम्मानित किया.नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के इतिहास में यह आयोजन इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से इन पुरस्कारों का जुड़ाव दिल्ली से रहा है. अब सरकार ने भविष्य में इन पुरस्कार समारोहों को देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में आयोजित करने की बात कही है.
हर साल सैकड़ों फिल्में नेशनल फिल्म अवॉर्ड की रेस में एंट्री करती हैं, लेकिन रिलीज होने से लेकर अवॉर्ड की ट्रॉफी तक पहुंचने का सफर इतना सीधा नहीं होता. अलग-अलग लेवल पर जूरी उसे परखती है. फीचर फिल्मों के लिए पांच रीजनल पैनल से शुरू होने वाली प्रक्रिया सेंट्रल जूरी तक पहुंचती है, जहां फिर अंतिम फैसला लिया जाता हैं. लेकिन आखिर जूरी किसी फिल्म में ऐसा क्या देखती है, जो उसे बाकी फिल्मों से अलग करता है? एंट्री से लेकर विनर घोषित होने तक पूरा सिस्टम कैसे काम करता है, आइए समझते हैं नेशनल फिल्म अवॉर्ड की पूरी प्रक्रिया. अगर आज आप नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स से जुड़ी खबरें देख रहे हैं और आपके मन में भी यह सवाल आया है कि क्या नेशनल फिल्म अवॉर्ड का कोई अलग टाइमटेबल है या फिर फिल्मों के चयन में इतना वक्त लगता है?
दरअसल, मामला थोड़ा अलग है. 2026 में दिए जा रहे 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स का संबंध वर्ष 2024 की फिल्मों से है. इन पुरस्कारों के विजेताओं की घोषणा जुलाई 2026 में हुई.
2024 की फिल्मों को 2026 में अवॉर्ड क्यों?

बता दें कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड का सिस्टम सिर्फ उस साल रिलीज हुई फिल्मों को उसी साल सम्मान देने पर बेस्ड नहीं है. बल्कि हर वर्जन एक तय टाइम में प्रमाणित फिल्मों को ध्यान में रखकर किया जाता है. 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए 2024 में CBFC से सर्टिफाइड हुई फिल्मों को एलिजिबल माना गया. यही वजह है कि इस साल 'आर्टिकल 370' 'आमरण', 'कल्कि 2898 AD', चंदू चैम्पियन', और 'स्त्री 2' जैसी 2024 की फिल्मों का नाम 2026 में नेशनल अवॉर्ड की लिस्ट में नजर आया. बता दें कि नेशनल अवॉर्ड के 72वें संस्करण में 'आर्टिकल 370' को बेस्ट फीचर फिल्म चुना गया है, जबकि 'आमरण' के डायरेक्टर राजकुमार पेरियासामी को बेस्ट डायरेक्शन का पुरस्कार मिला.
सिर्फ रिलीज डेट नहीं, CBFC सर्टिफिकेशन भी अहम
इसके साथ ही यह भी समझना काफी जरुरी है कि नेशनल अवॉर्ड के लिए किसी फिल्म की एलिजिबिलिटी सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वह थिरेटर में कब आई. बल्कि, नियमों में CBFC सर्टिफिकेशन की डेट ज्यादा मायने रखती है.
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स के लिए 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 के बीच CBFC सर्टिफिकेट पाने वाली फिल्में एलिजिबिलिटी के दायरे में आईं. इसका मतलब यह है कि किसी फिल्म की थिएट्रिकल रिलीज और उसके सर्टिफिकेशन की डेट में अंतर होने की स्थिति में भी अवॉर्ड की एलिजिबिलिटी निर्धारित नियम देखी जाती है.
इसलिए, सिर्फ '2024 में रिलीज हुई फिल्म को 2026 में अवॉर्ड' कहकर समझना अधूरा होगा. इसको सही मायने में कहें तो 72वां संस्करण साल 2024 के लिए है, जिसका ऐलान और पुरस्कार समारोह 2026 में हुआ.
आखिर नेशनल फिल्म अवॉर्ड में किन फिल्मों को मौका मिलता है?
नेशनल फिल्म अवॉर्ड सिर्फ हिंदी फिल्मों के लिए नहीं है. बल्कि, इसमें भारतीय सिनेमा की अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों को भी शामिल किया जाता है. आधिकारिक तौर पर पुरस्कारों के मेन सेक्शन फीचर फिल्म, नॉन-फीचर फिल्म और बेस्ट राइटिंग ऑन सिनेमा हैं. इसके अलावा दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड अलग सम्मान के रूप में दिया जाता है.
वहीं, गौर करने वाली बात यह है कि फीचर फिल्म सेक्शन में लंबी अवधि की कहानी फिल्मों को जगह मिलती है. वहीं, नॉन-फीचर सेक्शन में डॉक्यूमेंट्री, शॉर्ट फिल्म और दूसरी गैर-फिक्शन फिल्में शामिल होती हैं. इसके अलावा बेस्ट राइटिंग ऑन सिनेमा के तहत सिनेमा पर लिखी गई किताबों और फिल्म क्रिटिक्स को सम्मानित किया जाता है.
नेशनल अवॉर्ड के लिए फिल्म की एंट्री कैसे होती है?
किसी फिल्म के नेशनल अवॉर्ड की रेस में पहुंचने से पहले उसकी एलिजिबिलिटी देखी जाती है. फिल्म को निर्धारित नियमों के आधार पर एंट्री करनी होती है और जरूरी कंटेंट मौजूद कराना होता है. साल 2024 की फिल्मों के लिए आयोजित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में एंट्री प्रोसेस के दौरान 2024 में CBFC सर्टिफिकेट और इंग्लिश सबटाइटल जैसी शर्तें लागू थीं. वहीं, फीचर फिल्म के लिए मिनिमम टाइम की शर्त भी है.
ऐसे में कोई फिल्म सिर्फ इसलिए नेशनल अवॉर्ड की रेस में नहीं शामिल हो सकती कि वह सिनेमाघरों में रिलीज हुई या दर्शकों के बीच पॉपुलर हुई है. पहले उसे सेट एलिजिबिलिटी और एंट्री नियमों को पूरा करना होता है.
फिर शुरू होती है जूरी की असली परीक्षा
फिल्म के एलिजिबल होने के बाद फिर सबसे अहम स्टेज होता है, जो है जूरी का. नेशनल फिल्म अवॉर्ड के विनर्स का फैसला जूरी करती है. जूरी के तौर पर सिनेमा और उससे जुड़े क्षेत्रों के अनुभवी लोग शामिल होते हैं. बता दें कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड की ज्यूरी किसी एक फिल्म इंडस्ट्री या सिर्फ फिल्म स्टार्स का पैनल नहीं होती. इसमें सिनेमा के साथ-साथ कला और मानविकी के क्षेत्रों से जुड़े प्रतिष्ठित लोगों को शामिल किया जाता है.
2026 में घोषित 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड के फीचर फिल्म ज्यूरी के चेयरपर्सन फिल्ममेकर जयराज थे. उनके साथ ओम राउत, असीम बजाज, प्रिया कृष्णास्वामी, राकेश रंजन, नेपोलियन आरजेड थंगा, मीरा चोपड़ा, श्रीलेखा मुखर्जी, अर्चना उडुपा, वीएन आदित्य और जी कला जैसे सदस्य केंद्रीय ज्यूरी में शामिल थे. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अंतिम फैसला एक व्यक्ति नहीं, बल्कि कई सदस्यों वाली ज्यूरी की सामूहिक प्रक्रिया से होता है. ऑफिसियल रिपोर्ट्स के मुताबिक, विनर्स का चुनाव सिनेमाई अचीवमेंट और अलग-अलग केटेगरी में श्रेष्ठता के बेस्ड पर होता है.
फीचर फिल्म सेक्शन में चुनाव का प्रोसेस दो लेवल पर होता है. पहले क्षेत्रीय जूरी फिल्में देखती हैं और फिर सेंट्रल जूरी के सामने चुनाव का प्रोसेस आगे बढ़ती है. पीआईबी की 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, फीचर फिल्मों के लिए पांच क्षेत्रीय पैनल पहले फिल्मों की स्क्रीनिंग करती है, जिसके बाद सेंट्रल पैनल विनर पर फैसला करती है. यानी किसी फिल्म को नेशनल अवॉर्ड मिलने के पीछे सिर्फ एक जूरी की बैठक नहीं होती.

फीचर फिल्मों के लिए पांच क्षेत्रीय पैनल बनाए जाते हैं. इनमें नॉर्थ, वेस्ट, साउथ-1, साउथ-2 और ईस्ट पैनल शामिल हैं. अलग-अलग भाषाओं और क्षेत्रों की फिल्मों को संबंधित क्षेत्रीय पैनल के सामने रखा जाता है. इन ज्यूरी का काम सिर्फ यह देखना नहीं है कि फिल्म अच्छी है या नहीं. वे यह भी तय करती हैं कि कौन सी फिल्म आगे केंद्रीय ज्यूरी तक पहुंचने लायक है और किस कैटेगरी में उसे विचार के लिए रखा जा सकता है. आधिकारिक नियमों के अनुसार प्रत्येक क्षेत्रीय ज्यूरी अधिकतम 10 फीचर फिल्मों या उस क्षेत्र से आई कुल एंट्री के 30 प्रतिशत तक फिल्मों की सिफारिश कर सकती है, इनमें से जो संख्या कम हो.
नेशनल फिल्म अवॉर्ड के लिए किसी फिल्म की कमाई या सोशल मीडिया पर उसकी पॉपुलैरिटी को नहीं देखा जाता है. चुनाव के लिए सिर्फ फिल्म की सिनेमाई क्वालिटी होती है. इसमें फिल्म की कहानी, निर्देशन, एक्टिंग, म्यूजिक, सिनेमैटोग्राफी, एडिटिंग और दूसरे तकनीकी पहलुओं के अलावा फिल्म का विषय और उसका सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व भी मूल्यांकन को भी देखा जाता है. आधिकारिक नियमों में पुरस्कारों का उद्देश्य क्रिएटिविटी और तकनीक वाली फिल्मों को प्रोत्साहित करना बताया गया है. ऐसे में यह साफ है कि बॉक्स ऑफिस पर किसी भी फिल्म की बड़ी सफलता अपने आप नेशनल अवॉर्ड की गारंटी नहीं बनती.
2024 से 2026 तक क्या हुआ?
इसे आसान टाइमलाइन से समझें.

क्या नेशनल अवॉर्ड देने में हमेशा दो साल लगते हैं?
ऐसा कोई स्थायी नियम नहीं है कि फिल्म के प्रमाणन या रिलीज के ठीक दो साल बाद ही नेशनल अवॉर्ड दिया जाएगा. 2026 में 2024 की फिल्मों को सम्मानित किए जाने को समझने का सही तरीका यह है कि 72वां पुरस्कार संस्करण वर्ष 2024 के लिए है, जबकि उसकी घोषणा और समारोह बाद में हुए.
बीते कई सालों में अवॉर्ड और समारोह के कैलेंडर साल के बीच अंतर दिखाई दिया है. उदाहरण के लिए 70वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में साल 2022 की फिल्मों को सम्मानित किया गया और उनकी घोषणा 2024 में हुई थी. 71वें संस्करण ने वर्ष 2023 की फिल्मों को कवर किया. यही वजह है कि साल 2026 में 2024 की फिल्मों का नेशनल अवॉर्ड जीतना किसी नए नियम या अचानक हुए बदलाव का नतीजा नहीं है. यह उस पुरस्कार संस्करण के निर्धारित साल और बाद में हुई घोषणा के बीच का अंतर है.
इसी वजह से स्क्रीन पर साल 2024 की फिल्म और अवॉर्ड के मंच पर 2026 का साल एक साथ दिखाई दे सकता है. फिल्म पुरानी होने की वजह से नहीं, बल्कि नेशनल फिल्म अवॉर्ड की पूरी चुनाव के प्रोसेस और उसके पुरस्कार साइकल की वजह से ऐसा होता है.