पटाखों से भी बड़ा धमाका: दिवाली पर 400 करोड़ी फिल्में भी आईं, लेकिन 30 साल बाद भी खत्म नहीं हुई DDJL के लिए फैंस की दीवानगी
दिवाली पर ‘टाइगर 3’, ‘प्रेम रतन धन पायो’ और ‘ओम शांति ओम’ जैसी सैकड़ों करोड़ी फिल्में आईं. लेकिन 1995 में महज 4 करोड़ में बनी ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने जो इतिहास रचा, वो आज तक कोई नहीं दोहरा सका. चलिए बताते हैं कमाई से परे DDLJ के लिए कभी न खत्म होने वाली फैंस की दीवानगी की असली इनसाइड स्टोरी.
दिवाली और बॉलीवुड फिल्मों का रिश्ता बहुत पुराना है. जब भी इस खास मैके पर कोई नई फिल्म रिलीज होती है, तो सिनेमाघरों में गजब की भीड़ उमड़ती है. ‘कुछ कुछ होता है’, ‘ओम शांति ओम’, ‘प्रेम रतन धन पायो’ और ‘टाइगर 3’ जैसी फिल्मों ने दिवाली का पूरा फायदा उठाया और बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की. लोग अपनी फैमिली के साथ थियेटर पहुंचे और इन फिल्मों ने मेकर्स की तिजोरी पैसों से भर दी, लेकिन इन सबके बीच एक ऐसी फिल्म भी है, जिसने हिंदी सिनेमा का पूरा माहौल ही बदल कर रख दिया और 30 साल बीत जाने के बाद भी उसका जादू लोगों के दिलों पर वैसा ही छाया है.
साल 1995 की दिवाली के मौके पर ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. 20 अक्टूबर 1995 को जब ये फिल्म पर्दे पर आई, तब शायद फिल्म बनाने वालों ने भी नहीं सोचा होगा कि वे इतिहास रचने जा रहे हैं. आदित्य चोपड़ा के डायरेक्शन में बनी इस प्यारी सी स्टोरी स्टोरी ने उस जमाने में सिर्फ प्यार करने का अंदाज ही नहीं बदला, बल्कि त्योहारों पर रिलीज होने वाली फिल्मों की सक्सेस का एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया, जिसे आज 30 साल बाद भी कोई तोड़ नहीं पाया है. इस फिल्म ने लोगों के दिलों पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी, जिसका जादू आज भी वैसा ही बना हुआ है, खत्म नहीं हुआ.
4 करोड़ का दांव और 100 करोड़ का जादुई सफर
आजकल जब फिल्मों का बजट 200 से 500 करोड़ तक पहुंच जाता है, तब 1995 की इस फिल्म की याद आना लाजिमी है. यशराज फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) सिर्फ 4 करोड़ के बजट में तैयार हुई थी. उस वक्त ये कोई बहुत बड़ा बजट नहीं था, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसने जो तहलका मचाया, उसने पूरी इंडस्ट्री को हैरान कर दिया.
सस्ती टिकटों के उस दौर में फिल्म ने देश और विदेश मिलाकर 100 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर डाली थी, जो आज के करीब 1000 से 1500 करोड़ रुपये कमाने के बराबर है. राज और सिमरन की इस सिंपल सी लव स्टोरी ने देश के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीयों का दिल भी जीत लिया था. इसी फिल्म के बाद शाहरुख खान रातोंरात रोमांस के सबसे बड़े स्टार बन गए और काजोल के साथ उनकी जोड़ी हमेशा के लिए यादगार हो गई.
मुंबई का मराठा मंदिर और 25 साल का अटूट रिकॉर्ड
आजकल तो कोई भी नई फिल्म सिनेमाघरों में मुश्किल से दो या तीन हफ्ते टिक पाती है और फिर सीधे ओटीटी पर आ जाती है. पहले के दौर में फिल्म की कामयाबी इसी बात से तय होती थी कि वो थियेटर में कितने दिन तक जमी रहती है. इसी मामले में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ ने मुंबई के मराठा मंदिर सिनेमा हॉल में ऐसा कमाल कर दिखाया जो दुनिया भर में एक मिसाल बन गया. थियेटर के रिकॉर्ड बताते हैं कि ये फिल्म वहां बिना रुके 25 साल से भी ज्यादा समय तक रोज सुबह के शो में चलती रही.
इस लंबे सफर में पीढियां बदल गईं, सिनेमा रील से डिजिटल स्क्रीन पर पहुंच गया, लेकिन सुबह साढ़े ग्यारह बजे का शो देखने आने वाले दर्शकों की भीड़ कभी कम नहीं हुई. ये कोई आम बात नहीं है, ये साफ दिखाता है कि ये फिल्म सिर्फ एक त्योहार पर रिलीज हुई कोई सिंपल सी फिल्म नहीं थी, बल्कि सचमुच लोगों के दिलों और जज्बातों में हमेशा के लिए बस चुकी थी. आज भी इस फिल्म और इसके गानों के लिए लोगों की जो दीवानगी देखने को मिलती है, वो किसी और फिल्म के लिए देखने को मुश्किल ही कभी मिलती होगी.
जब 400 करोड़ी फिल्में भी फीकी पड़ गईं
अगर हम सिर्फ कमाई के आंकड़ों की बात करें, तो बाद के सालों में दिवाली पर आई कई फिल्मों ने DDLJ को बहुत पीछे छोड़ दिया. मिसाल के तौर पर सलमान खान की ‘प्रेम रतन धन पायो’ ने दुनिया भर में 400 करोड़ से ज्यादा बटोरे. वहीं 2023 की दिवाली पर रिलीज हुई ‘टाइगर 3’ ने करीब 460 करोड़ का कारोबार किया. खुद शाहरुख खान की ‘हैप्पी न्यू ईयर’ भी 380 करोड़ से ऊपर निकल गई थी, लेकिन असल बात ये है कि ये फिल्में रिलीज के कुछ ही हफ्तों बाद लोगों के दिमाग से उतर गईं.
आज कोई इनके गानों या डायलॉग्स को उस तरह याद नहीं करता, जैसे DDLJ के ‘जा सिमरन जा, जी ले अपनी जिंदगी’ या ‘बड़े बड़े देशों में ऐसी छोटी छोटी बातें होती रहती हैं’ आज भी लोग आम बातचीत में बोल देते हैं. बस यही बड़ा फर्क होता है अंधाधुंध कमाई करने वाली फिल्मों में और लोगों के दिलों में हमेशा के लिए बस जाने वाली फिल्मों में.
'ओम शांति ओम' और नए जमाने की दिवाली
आजकल के जमाने की दिवाली फिल्मों पर नजर डालें, तो साल 2007 में आई ‘ओम शांति ओम’ ने सिनेमाघरों में गजब का तहलका मचाया था. फराह खान के डायरेक्शन में तैयार इस फिल्म ने कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे और उस साल की सबसे धांसू फिल्म बनकर उभरी. इस फिल्म की सबसे यादगार बात ये भी रही कि इसी से दीपिका पादुकोण ने अपना फिल्मी सफर शुरू किया और पहली ही कोशिश में रातोंरात स्टार बन गईं.
खैर, इतनी बड़ी सक्सेस के बाद भी जब दिवाली पर आई फिल्मों की आपस में तुलना होती है, तो बाजी हमेशा 1995 वाली ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे’ ही मार ले जाती है. नो डाउट ‘ओम शांति ओम’ ने ऑडियंस को खूब हंसाया और जमकर एंटरटेन किया, मगर जो सुकून, सादगी और दिल को छू लेने वाला अपनापन राज और सिमरन की उस पुरानी कहानी ने दर्शकों को दिया, वो जादू आज तक किसी दूसरी फिल्म के हिस्से नहीं आ पाया.
परंपरा और मॉर्डन का बेजोड़ संगम
‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) की असली ताकत उसकी कहानी की सोच में थी. फिल्म का हीरो राज एकदम आज के जमाने का लड़का है, जो लंदन में मजे से घूमता है, पर जब बात प्यार की आती है तो वो सिमरन को लेकर भागने से मना कर देता है. वो सिमरन के बाबूजी का दिल जीतकर और बड़ों की इज्जत रखकर ही उसे अपना बनाना चाहता है. बस यही बात दिवाली के मौके पर हर किसी के दिल में उतर गई.
दादा-दादी से लेकर बच्चे तक, पूरा परिवार साथ बैठकर हंसा भी और रोया भी. दिवाली पर कई बड़ी फिल्में आईं और चली गईं, लेकिन 1995 में आई इस फिल्म ने जो कमाल किया, उसका असर तीस साल बाद भी वैसा ही दिखता है. ये बात साफ है कि कमाई के रिकॉर्ड तो वक्त के साथ पुराने हो जाते हैं, पर जो फिल्में सीधे दिल में बस जाती हैं, उनका जादू कभी कम नहीं होता जैसे हम सबकी फेवरेट ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’.