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Explainer: एक रात, एक मौत और लंबी जांच...क्या है दिशा सालियान केस का पूरा किस्सा?

Disha Salian Death Case Explained :लगभग छह साल बाद दिशा सालियान की मौत का मामला फिर सुर्खियों में है. बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की है. अब एजेंसी मौत से जुड़े सभी पहलुओं और पुराने रिकॉर्ड की दोबारा पड़ताल करेगी.

Written By Swati Singh
Published: Sep 19, 2026, 05:05 PM IST | Updated: Sep 19, 2026, 08:53 PM IST
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सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की जून 2020 में हुई मौत लंबे समय से चर्चा में रही है. उनकी मौत के कुछ दिनों बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने इस मामले को और ज्यादा सुर्खियों में ला दिया. दोनों घटनाओं के बीच महज छह दिन का अंतर था, जिसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल उठने लगे. लेकिन अब लगभग छह साल बाद दिशा सालियान केस में एक बार फिर बड़ा मोड़ आया है. दरअसल, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने इस मामले में FIR दर्ज की है और अब जांच नए सिरे से आगे बढ़ाई जा रही है.

ये कहानी है, 8 जून 2020 की उस रात की कहानी. जब मुंबई में एक ऐसी घटना हुई, जिसने आने वाले सालों में कई सवालों को जन्म दिया. सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान की मौत मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद हुई. शुरुआती पुलिस कार्रवाई में इसे एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी एडीआर के तौर पर दर्ज किया गया. उनकी मौत के बाद जांच का फोकस मौत की परिस्थितियों और उसके कारण का पता लगाने पर रहा. बाद में पुलिस की जांच में इसे आत्महत्या माना गया और 2021 में ये केस बंद कर दिया गया.

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई...

दिशा की मौत के कुछ ही दिनों बाद बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया. एक्टर की मौत के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक बयानों तक कई तरह के दावे सामने आए. इतना ही नहीं, दिशा की मौत को सुशांत की मौत से जोड़कर भी सवाल उठाए गए. इसी दौरान जांच में कथित गड़बड़ियों पर सवाल खड़े किए.

इनमें से कई दावे सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा रहे, लेकिन हर दावा जांच में साबित हुआ हो. ऐसा कहना सही नहीं होगा. अब लगभग छह साल बाद यह केस एक बार फिर जांच के केंद्र में है. दरअसल, 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर दिशा की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह भी साफ किया कि किसी व्यक्ति को आरोपी तभी माना जाए, जब जांच में उसके खिलाफ पर्याप्त आधार मिले.

इस पूरी कहानी को एक-एक करके समझते हैं.

वो रात, जब दिशा की मौत हुई

दिशा सालियान सेलिब्रिटी मैनेजमेंट से जुड़ी थीं. वह Kwan Entertainment के साथ काम कर रही थी. इसी दौरान उनका प्रोफेशनल कांटेक्ट सुशांत सिंह राजपूत से भी हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने सुशांत के अलावा दूसरे कलाकारों से जुड़े काम भी संभाले थे. 8 जून 2020 की रात दिशा अपने मंगेतर रोहन राय के मलाड स्थित फ्लैट में थीं. पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज बयानों के मुताबिक, उस शाम वहां कुछ दोस्त मौजूद थे.

बॉम्बे हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2026 के आदेश में पुलिस रिकॉर्ड के हवाले से बताया गया कि उस शाम दोस्तों ने पार्टी की थी और शराब का सेवन किया था. रिकॉर्ड में यह भी बताया गया कि दिशा ने लंदन में रहने वाली अपनी दोस्त अंकिता से वीडियो कॉल पर बात भी की थी. इसके बाद वह अपने मास्टर बेडरूम में चली गईं. फिर कुछ समय बाद दोस्तों ने दरवाजा खोला तो वह कमरे में नहीं थीं और बाद की घटनाओं में उनके ऊंचाई से गिरने की बात सामने आई.

पुलिस को खबर मिली?

कोर्ट में दायर रिकॉर्ड के मुताबिक, उस रात में ही पुलिस इमारत तक पहुंच गई थी. CCTV रिकॉर्ड के मुताबिक, पुलिस की मौजूदगी करीब 12:59 बजे से 2:14 बजे के बीच दिखाई देने की बात कोर्ट में दायर की गई है. हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड में यह साफ नहीं किया गया कि पुलिस को इस बात की खबर किसने दी और उस दौरान उसने क्या कार्रवाई की.ऐसे में यह जांच का एक अहम सवाल बन गया.

वहीं, फिर मलवानी पुलिस स्टेशन में 9 जून 2020 को सुबह 3:07 बजे एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट यानी ADR नंबर 85/2020 दर्ज की गई थी. ADR में घटना का समय 2:25 बजे बताया गया. दिशा के परिवार को भी घटना की जानकारी रात में ही दे दी गई. बॉम्बे हाईकोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक, दिशा के पिता सतीश सालियान ने अपने बयान में बताया था कि उन्हें करीब 3 बजे पुलिस स्टेशन से फोन आया. पुलिस ने उनसे शताब्दी अस्पताल, कांदिवली पहुंचने के लिए कहा. उनके पिता लगभग सुबह 4 बजे अस्पताल पहुंचे, जहां उन्हें बेटी की मौत की जानकारी मिली. शुरुआती जांच में पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच की. दोस्तों और परिवार के बयान भी दर्ज किए. पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बने.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया सामने?

दिशा की पोस्टमार्टम रिकॉर्ड में सिर और शरीर पर कई चोटों के बारे में बताया गया. बाद में सामने आए रिकॉर्ड में सिर की हड्डियों और पसलियों में फ्रैक्चर समेत कई चोटों का विवरण दर्ज था. शुरुआती रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि पोस्टमार्टम में यौन हमले के सबूत नहीं मिले.

दिशा की मौत के बाद धीरे-धीरे सोशल मीडिया पहोआ ज्ञर बयानों में कई तरह के दावे सामने आने लगे. कई दावों में कहा गया कि दिशा किसी ऐसी पार्टी में थीं, जिसमें प्रभावशाली लोग मौजूद थे. वहीं, कुछ लोगों ने उनकी मौत को सुशांत सिंह राजपूत की मौत से जोड़ना शुरू किया. ऐसे में मुंबई पुलिस ने उस समय इन दावों की जांच की थी. पुलिस के मुताबिक, दिशा के मंगेतर के घर हुई छोटी सी पार्टी में कोई राजनीतिक नेता मौजूद नहीं था. CCTV से जुड़ी जांच के बारे में भी पुलिस ने कहा था कि ऐसे दावों की पुष्टि नहीं हुई.

लेकिन फिर एक और दावा किया गया, जिसमें दिशा के गर्भवती होने को लेकर खबर सामने आई. लेकिन तब पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस की जांच में इस दावे को गलत बताया गया.

दिशा और सुशांत सिंह राजपूत का कनेक्शन क्या था?

दिशा और सुशांत का कनेक्शन पर्सनली नहीं, बल्कि प्रोफेशनल था. दिशा की कंपनी ने सुशांत सिंह राजपूत के लिए भी टैलेंट मैनेजमेंट का काम किया था. ऐसे में दिशा ने सुशांत के साथ काम किया था और दोनों का पेशेवर संपर्क था. दिशा की मौत 8-9 जून 2020 की रात हुई. फिर सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को हुई. ऐसे में दिशा की मौत को सुशांत की मौत से जोड़कर सवाल उठने लगे. हालांकि, सिर्फ समय का टाइम और प्रोफेशनल रिलेशन को लेकर अपने आप दोनों मामलों के बीच कनेक्शन साबित नहीं किया जा सकता था.

साल 2020 में सुशांत मामले की जांच के दौरान भी दिशा से जुड़ा पहलू चर्चा में आया था. मौजूद रिकॉर्ड में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है कि उस समय सुशांत मामले की जांच ने दिशा की मौत में कोई ऐसा लिंक था, जिससे दोनों मामलों को एक ही अपराध का हिस्सा माना जा सके. लेकिन अब CBI के सामने दिशा की मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम की अलग से जांच का आदेश है.

पहली पुलिस जांच का निष्कर्ष क्या था?

केस की सबसे अहम टाइमलाइन-

2020: मलवानी पुलिस ने ADR दर्ज की और जांच शुरू की. जांच के दौरान परिवार, दोस्तों और अन्य संबंधित लोगों के बयान लिए गए. मेडिकल और फॉरेंसिक सामग्री भी जांच में शामिल की गई.

2021: पुलिस की पहली जांच में किसी आपराधिक साजिश या foul play का सबूत नहीं मिलने की बात सामने आई. 4 फरवरी 2021 को जांच रिपोर्ट ACP के सामने रखी गई और 2021 में इसे बंद कर दिया गया. 
दिसंबर 2023: महाराष्ट्र सरकार ने मामले को फिर से देखने के निर्देश दिए. इसके बाद मुंबई पुलिस ने दोबारा जांच शुरू की और एक SIT बनाई गई. 
अप्रैल-मई 2026: दिसंबर 2023 में शुरू हुई आगे की जांच के बाद रिपोर्ट 14 अप्रैल 2026 को ACP और Special Executive Magistrate के सामने रखी गई. रिपोर्ट का नतीजा पहले जैसा ही रहा. इसमें कहा गया कि कोई नया सबूत नहीं मिला और दिशा की मौत को आत्महत्या माना गया. 6 मई 2026 को यह समरी स्वीकार कर ली गई.

जांच में आखिर कौन-कौन से सवाल उठे?

2 सितंबर 2026 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश ने इस केस में सबसे महत्वपूर्ण नया रिकॉर्ड सामने रखा.

कोर्ट ने खुद किसी घटना को साबित तथ्य नहीं माना. लेकिन उसने यह जरूर कहा कि पुलिस की छह साल लंबी प्रक्रिया में ऐसी कई विसंगतियां थीं, जिनके कारण FIR नए सिरे से दर्ज हुए.

घटनास्थल का पंचनामा
कोर्ट ने नोट किया कि स्पॉट पंचनामा घटना के कई घंटे बाद किया गया था. कोर्ट के रिकॉर्ड के मुताबिक यह करीब 9:40 से 9:45 बजे सुबह हुआ, जबकि पुलिस इससे पहले रात में ही इमारत में पहुंच चुकी थी.

पुलिस की रात में मौजूदगी
CCTV रिकॉर्ड के मुताबिक पुलिस की मौजूदगी करीब 12:59 बजे से 2:14 बजे तक दिखाई गई. लेकिन कोर्ट में सवाल उठे कि ADR और बाद की रिपोर्ट में इस शुरुआती पुलिस मौजूदगी और उसके चलते का साफ उल्लेख क्यों नहीं था?

ADR में समय और बयान का सवाल
ADR सुबह 3:07 बजे दर्ज हुई थी. कोर्ट ने नोट किया कि ADR में परिवार के बयान का उल्लेख था, जबकि पिता के रिकॉर्डेड बयान के मुताबिक, वह करीब 4 बजे अस्पताल पहुंचे थे. कोर्ट  ने इस अंतर को भी जांच के दायरे में माना.

घटनास्थल पर खून को लेकर सवाल
कुछ गवाहों के बयानों में गिरने वाली जगह पर खून देखने की बात दर्ज थी. कोर्ट ने कहा कि पुलिस द्वारा घटनास्थल से ब्लड स्टेन अर्थ बरामद किए जाने का रिकॉर्ड नहीं था. ऐसे इस पोइत्न को भी कोर्ट ने आगे जांच की जरूरत वाले पहलू के तौर पर देखा.

चोटों का पैटर्न
पोस्टमार्टम रिकॉर्ड में कई चोटों और स्कल तथा रिब्स में फ्रेक्चर के बारे में था. कोर्ट ने चोटों के पैटर्न को भी ऐसे सवालों में शामिल किया जिन पर विशेषज्ञ जांच जरूरी है. कोर्ट ने खुद कोई मेडिकल निष्कर्ष घोषित नहीं किया.

FSL रिकॉर्ड से जुड़े रिकॉर्ड 
पोस्टमार्टम रिकॉर्ड में वरजाइनल और एनल स्वैब के बारे में भी था, जबकि FSL को भेजे गए मटिरियल में स्लाइड्स का उल्लेख मिला. बाद में मेडिकल अधिकारी ने इसे डॉक्यूमेंटेशन गलती बताते हुए साफ किया कि समेअर लिया गया था. कोर्ट ने इस रिकॉर्ड के अंतर को भी जांच के लिए अहम माना. FSL रिकॉर्ड में मेल डीएनए नहीं मिलने की बात भी आदेश में दर्ज है.

मोबाइल और लैपटॉप
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि दिशा का मोबाइल फोन और लैपटॉप 9 जून के स्पॉट पंचनामा के समय जब्त नहीं किए गए थे. बाद में 17 जून को रोहन राय की कस्टडी से जब्त किए गए. कोर्ट ने इसे भी जांच में देरी और प्रक्रिया से जुड़ा सवाल माना. हालांकि, इन सभी पॉइंट्स का मतलब यह नहीं है कि इनमें से किसी एक से हत्या या किसी दूसरे अपराध का सबूत साबित हो गया. लेकिन कोर्ट का निष्कर्ष यह था कि इन परिस्थितियों के कारण FIR दर्ज कर व्यापक आपराधिक जांच जरूरी है.

कोर्ट तक कैसे पहुंचा मामला?

दिशा के पिता सतीश सालियान ने बाद में मामले में एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच की मांग की. सतीश की याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची. कोर्ट के सामने उनका मुख्य पक्ष यह था कि दिशा की मौत सामान्य आत्महत्या या दुर्घटना का मामला नहीं थी और मामले में आपराधिक साजिश की जांच होनी चाहिए. वहीं, दूसरी ओर महाराष्ट्र सरकार की ओर से कहा गया कि पुलिस ने पहले और बाद में दो चरणों में जांच की थी और दोनों में किसी फाउल प्ले का सबूत नहीं मिला.

इसके बाद कोर्ट के सामने सवाल आया कि क्या पुरानी जांच काफी थी? या उपलब्ध रिकॉर्ड में ऐसे सवाल हैं जिनकी जांच FIR के जरिए नए सिरे से होनी चाहिए? ऐसे में 2 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट ने दूसरी बात को स्वीकार किया.

2 सितंबर 2026 का हाईकोर्ट आदेश

बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को दिशा सालियान की मौत की जांच करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच लगभग छह साल तक चली और सिर्फ सेक्शन 174 CrPC के तहत हुई कार्रवाई इस मामले की परिस्थितियों में काफी नहीं थी. कोर्ट के मुताबिक, कॉग्निजेबल ऑफेंस की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर सब्सटेंटिव इन्वेस्टिगेशन की जरूरत थी. लेकिन कोर्ट ने एक बेहद अहम सुरक्षा भी रखी. कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए, जब तक जांच में उसके खिलाफ रीजनेबल सस्पिसियस के लिए काफी सबूत सामने न आए. यानी कोर्ट ने किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना.

सीबीआई FIR में क्या है?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI ने दिशा सालियान की मौत के मामले में एफआईआर दर्ज की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एफआईआर में हत्या, गैंगरेप, आपराधिक साजिश और सबूतों को दबाने, नष्ट करने या उनमें हेरफेर जैसे आरोपों की जांच का उल्लेख है. FIR में कई लोगों के नाम ऐसे व्यक्तियों के तौर पर सामने आए हैं, जिनकी भूमिका जांच के दायरे में रखी गई है. इनमें आदित्य ठाकरे, रोहन राय, डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती और अन्य नाम शामिल हैं. बता दें कि FIR में किसी भी व्यक्ति का नाम आना और उस व्यक्ति का आरोपी या दोषी साबित नहीं कर सकता है.

CBI ने भी इस लेवल पर किसी व्यक्ति को आरोपी घोषित नहीं किया है. हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भी साफ किया था कि जांच के दौरान पर्याप्त आधार मिलने पर ही किसी को आरोपी माना जाए.

अब किन चीजों की जांच करेगी CBI?

पुराने पुलिस रिकॉर्ड और ADR.
घटनास्थल से जुड़े पंचनामे.
CCTV फुटेज और उनकी जांच.
दिशा के दोस्तों और उस रात मौजूद लोगों के बयान.
परिवार के बयान.
पोस्टमार्टम रिकॉर्ड.
FSL और केमिकल एनालाइजर की रिपोर्ट.
मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़ा डिजिटल एविडेंस.
बिल्डिंग के सिक्योरीटी गार्ड्स और अन्य गवाह.
उस रात की पार्टी से जुड़े लोगों के बयान.
पुलिस अधिकारियों और जांच से जुड़े अधिकारियों की भूमिका.
पुराने रिकॉर्ड में सामने आई विसंगतियां.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CBI पहले की जांच, गवाहों, फोरेंसिक और ऑटोप्सी और घटनास्थल से जुड़े रिकॉर्ड को दोबारा देख रही है.

अब केस कहां पहुंचा?

पहला चरण: 2020 में दिशा की मौत के बाद पुलिस ने ADR दर्ज की और जांच शुरू की.
दूसरा चरण: पुलिस की जांच में फ़ाउल प्ले का सबूत नहीं मिलने की बात कही गई और 2021 में मामला बंद हुआ. 
तीसरा चरण: दिसंबर 2023 में महाराष्ट्र सरकार के निर्देश पर मामले की आगे की जांच शुरू हुई.
चौथा चरण: अप्रैल 2026 में आगे की पुलिस जांच की रिपोर्ट में भी पुराने निष्कर्ष को दोहराया गया और मई 2026 में समरी स्वीकार की गई. 
पांचवां चरण: दिशा के पिता की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2026 को CBI जांच का आदेश दिया. 
छठा चरण: CBI ने इसके बाद FIR दर्ज की और मामले में गंभीर आपराधिक आरोपों की जांच शुरू की. 
सातवां चरण: अभी CBI की जांच चल रही है. जिन लोगों के नाम FIR में जांच के लिए सामने आए हैं, उन्हें इस स्तर पर आरोपी या दोषी नहीं माना गया है. 
 

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About the Author

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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