SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

Opinion : बॉलीवुड में सुपरस्टार्स की बादशाही फीस पर ब्रेक! अब फिल्म हिट कराओ, फिर करोड़ों पाओ...

घाटे से जूझता बॉलीवुड अब भारी-भरकम फीस का दौर पीछे छोड़ रहा है. धर्मा और यशराज जैसे बड़े बैनर 'नो-प्रॉफिट, नो-पे' और प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल अपना रहे हैं. इसमें स्टार्स को शुरुआत में कम पैसे मिलते हैं और फिल्म के मुनाफे पर हिस्सा तय होता है. इससे बजट सुधरेगा और जोखिम दोनों तरफ बराबर बंटेगा.

Written By Jyoti Rajput
Published: Nov 04, 2026, 11:33 AM IST | Updated: Nov 04, 2026, 01:13 PM IST
Image Credit: बॉलीवुड ट्रेंड्स
Join

पिछले कुछ सालों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री यानी बॉलीवुड ने सिनेमाघरों में जो उतार-चढ़ाव देखे हैं, उसने मेकर्स और स्टार्स दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. 400 से 500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट वाली फिल्में जब बॉक्स ऑफिस पर फेल होती हुई नजर आती हैं, तो सबसे पहले उंगलियां कलाकारों की फीस पर उठती हैं. स्थिति ये हो गई थी कि कई बड़े स्टार्स एक फिल्म के लिए 80 से 100 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की अपफ्रंट यानी पहले से तय फीस ले रहे थे, भले ही फिल्म का हाल सिनेमाघरों में कुछ भी हो. लेकिन अब बॉलीवुड में हवा का रुख बदल रहा है. धर्मा प्रोडक्शंस, यशराज फिल्म्स और टी-सीरीज जैसे दिग्गज प्रोडक्शन हाउस ने इस पुरानी और घाटे वाली व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

हां, ये बदलाव अब केवल बातों या मैगजीन के पन्नों तक सीमित नहीं है, बल्कि कई मेकर्स अब इसे अपनाने भी लगे हैं. इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह पिछले दो-तीन सालों में लगातार फ्लॉप होती बड़ी बजट की फिल्में और बॉक्स ऑफिस का अनिश्चित माहौल है. जब कोई फिल्म अपनी लागत भी वसूल नहीं कर पाती, तो 100 करोड़ की स्टार फीस मेकर्स के लिए गले की हड्डी बन जाती है. कोविड के बाद ऑडियंस का टेस्ट बदला है, ओटीटी के आने से लोग हर फिल्म के लिए सिनेमाघर नहीं दौड़ रहे हैं. ऐसे में, प्रोड्यूसर्स अब अंधाधुंध पैसा झोंकने के मूड में नहीं हैं. वो समझ चुके हैं कि बिना सोचे-समझे दी जाने वाली भारी-भरकम फीस इंडस्ट्री को दीवालिया बना रही है.

कैसे काम करता है 'नो-प्रॉफिट, नो-पे' और प्रॉफिट शेयरिंग मॉडल?

इस नए सिस्टम को 'अपफ्रंट-प्लस-बैकएंड' या 'प्रॉफिट-शेयर' मॉडल कहा जा रहा है. इसमें स्टार को शुरुआत में एक नॉर्मल या कम फीस दी जाती है. यानी 'नो-प्रॉफिट, नो-पे' का सीधा मतलब ये है कि अगर फिल्म घाटे में रहती है या लागत नहीं निकाल पाती, तो स्टार को तय से एक पैसा भी ज्यादा नहीं मिलेगा. वहीं, बैक-एंड मॉडल में ये तय होता है कि जब फिल्म अपनी लागत वसूल कर लेगी और बॉक्स ऑफिस, सैटेलाइट और डिजिटल राइट्स से मुनाफा कमाने लगेगी, तो उस मुनाफे का एक तय हिस्सा जैसे 20%, 30% या पार्टनरशिप के आधार पर कलाकार को दिया जाएगा. इससे स्टार्स की कमाई फिल्म के हिट होने पर ही आसमान छूती है, फ्लॉप होने पर नहीं.

बजट घटेगा, सुधरेगा कॉस्ट-टू-प्रॉफिट रेशियो

ईटी नाउ ने इंडस्ट्री रिपोर्टिंग का हवाला देते हुए लिखा कि इस मॉडल के आने से सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि फिल्मों का अनाप-शनाप बजट नीचे आएगा. जब स्टार्स की गारंटीड फीस कम होगी, तो प्रोडक्शन कॉस्ट अपने आप कंट्रोल में आ जाएगी. इससे फिल्मों का 'कॉस्ट-टू-प्रॉफिट रेशियो' सुधरेगा. मेकर्स पर आर्थिक दबाव कम होगा और वो उस पैसे को वीएफएक्स, बेहतर कहानी और मेकिंग पर खर्च कर पाएंगे. यानी अब फिल्म सिर्फ स्टार के नाम पर नहीं, बल्कि अपनी क्वालिटी के दम पर मुनाफे में आ सकती है.

क्या सुपरस्टार्स इसे आसानी से स्वीकार करेंगे?

ये रास्ता इतना आसान भी नहीं है. ऑडियंस से चली आ रही परंपरा को बदलना आसान नहीं होता है. कई बड़े सुपरस्टार्स आज भी अपनी पुरानी भारी-भरकम फीस की मांग पर अड़े रहते हैं. हालांकि, बदलते वक्त को देखते हुए कुछ समझदार कलाकारों ने इस जोखिम को शेयर करना शुरू कर दिया है. लेकिन जो स्टार्स अभी भी जिद पर अड़े हैं, उनके साथ बड़े बैनर्स काम करने से कतराने लगे हैं.आने वाले समय में इसे लेकर कलाकारों और प्रोड्यूसर्स के बीच थोड़ी खींचतान और टकराव देखने को मिल सकता है, क्योंकि हर कोई अपने हिस्से का जोखिम कम करना चाहता है.

क्या ये बदलाव पूरे बॉलीवुड का नया नियम बनेगा?

इस बदलाव की शुरुआत भले ही यशराज फिल्म्स, धर्मा और टी-सीरीज जैसे बड़े स्टूडियोज ने की हो, लेकिन जिस तरह से बॉक्स ऑफिस के आंकड़े डरा रहे हैं, उसे देखते हुए ये मॉडल पूरे इंडस्ट्री में नया नॉर्म बनता दिख रहा है. छोटे और मिड बजट के मेकर्स तो पहले से ही इस पर चल रहे थे, लेकिन अब बड़े बजट की फिल्मों के लिए भी ये जीने-मरने का सवाल बन गया है. जो प्रोडक्शन हाउस या स्टार्स इस बदलाव को नहीं अपनाएंगे, उनके लिए टिक पाना मुश्किल होगा.

कुछ हिट और फ्लॉप फिल्मों का आईना

अगर हम उदाहरण की बात करें तो, ये साफ समझ आ जाता है कि खेल कहां बिगड़ रहा है. पिछले कुछ सालों में कई ऐसी फिल्में आईं जिनमें स्टार्स ने भारी-भरकम फीस वसूली, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर वो औंधे मुंह गिर गईं, जिससे स्टूडियोज को करोड़ों का घाटा हुआ. इसके उलट, जिन फिल्मों में बजट पर कंट्रोल रखा गया और कंटेंट मजबूत था, उन्होंने कम लागत में भी बंपर मुनाफा कमाया. यही वजह है कि अब मेकर्स गारंटीड नुकसान उठाने के बजाए प्रॉफिट शेयरिंग के जरिए स्टार्स को भी इस नाव का साथी बन रहे हैं, ताकि नफा-नुकसान दोनों में सबकी हिस्सेदारी बराबर हो.

वो फिल्में, जो भारी फीस और बजट के बोझ तले दबकर फ्लॉप हो गईं

'बड़े मियां छोटे मियां'

साल 2024 में अक्षय कुमार और टाइगर श्रॉफ स्टारर फिल्म'बड़े मियां छोटे मियां' रिलीज हुई. इस मूवी का बजट करीब 350 करोड़ रुपये था. फिल्म में स्टार्स की भारी-भरकम फीस और मेकर्स का खर्च बहुत ज्यादा था, लेकिन कमजोर कहानी के चलते ये बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह औंधे मुंह गिर गई और मेकर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ा.

'गणपथ' और 'सेल्फी'

इन फिल्मों में भी बड़े स्टार्स के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाया गया और अपफ्रंट फीस पर बहुत जोर दिया गया. लेकिन ऑडियंस ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया, जिससे स्टूडियोज को तगड़ा झटका लगा.

'आदिपुरुष' 

साल 2023 में रिलीज हुई फिल्म 'आदिपुरुष' पौराणिक विषय पर थी, लेकिन इसका बजट 500 करोड़ के पार था. ज्यादा लागत और उम्मीद के मुताबिक कमाई न कर पाने के कारण ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फेल साबित हुई, जिसने इंडस्ट्री को ये सोचने पर मजबूर कर दिया कि सिर्फ बड़े नाम या बजट से फिल्म नहीं चलती है.

वो फिल्में, जिन्होंने कम बजट और मजबूत कंटेंट के दम पर बंपर मुनाफा कमाया.

'स्त्री 2'

श्रद्धा कपूर और राजकुमार राव स्टारर फिल्म'स्त्री 2' साल 2024 में रिलीज हुई थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. फिल्म का बजट बहुत सीमित था और किसी भी कलाकार ने आसमान छूती अपफ्रंट फीस लेने के बजाए कंटेंट और प्रॉफिट-शेयरिंग मॉडल पर भरोसा किया. नतीजा सबके सामने है, इसने सैकड़ों करोड़ का बंपर मुनाफा कमाया.

'12th फेल' 

विधु विनोद चोपड़ा के निर्देशन में बनी '12th फेल' फिल्म में कोई बड़ा सुपरस्टार नहीं था, बजट भी बेहद कम था. लेकिन इसकी मजबूत कहानी और शानदार एक्टिंग ने ऐसा जादू चलाया कि इसने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की और साबित कर दिया कि कंटेंट ही असली किंग है.

'कांतारा' और 'द केरल स्टोरी'

इन फिल्मों ने कम लागत में जिस तरह का ऐतिहासिक मुनाफा कमाया, उसने बॉलीवुड की आंखें खोल दीं. इन फिल्मों की सफलता ने मेकर्स को ये सिखा दिया कि अब स्टार्स की गारंटीड फीस पर करोड़ों लुटाने के बजाए कहानी और मुनाफे की हिस्सेदारी पर ध्यान देना ही समझदारी है.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES