)
हाल ही में बेहद कम बजट में रिलीज हुई फिल्म 'हनुमान अंश' इन दिनों खूब चर्चा में है. फिल्म अपनी कहानी और शानदार एक्टिंग को लेकर दर्शकों का मनोरंजन कर रही है. कम बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज के बाद धीरे-धीरे दर्शकों का ध्यान खींचा.
इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इसकी कहानी किसी काल्पनिक सुपरहीरो पर नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शख्सियत नीम करोली बाबा के जीवन से जुड़ी है. इस फिल्म की पॉपुलैरिटी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि फिल्म को IMDb पर लगभग 9.3 की रेटिंग मिली है. वहीं, अब फिल्म की कमाई के साथ-साथ इसके बनने की कहानी भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ा रही है.
क्या है फिल्म 'हनुमान अंश' की कहानी?

इस फिल्म की कहानी शुरू होती है, एक बच्चे से, जो कम उम्र में अपनी मां को खो देता है. इस घटना के बाद उसके मन में जीवन और ईश्वर को लेकर कई सवाल पैदा होते हैं. जवाब तलाशने के लिए वह आध्यात्मिक रास्ते पर निकल पड़ता है. इस सफर में उसकी मुलाकात अलग-अलग संतों और लोगों से होती है. धीरे-धीरे उसकी सोच बदलती जाती है और यही यात्रा आगे चलकर उसे नीम करोली बाबा के रूप में पहचान दिलाती है.
बताया जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट को लेकर मेकर्स की शुरुआती योजना फिल्म बनाने की नहीं थी. वे इस कहानी को एक सीरीज के तौर पर दर्शकों के सामने लाना चाहते थे. सीरीज के जरिए कहानी को ज्यादा विस्तार देने और किरदारों की जिंदगी के अलग-अलग पहलुओं को दिखाने की प्लानिंग थी. मेकर्स के लिए यह सब्जेक्ट काफी बड़ा था और उन्हें लगता था कि इसे एपिसोडिक फॉर्मेट में बेहतर तरीके से पेश किया जा सकता है. इसी सोच के साथ प्रोजेक्ट को सीरीज के रूप में प्लान किया गया.
OTT ने ठुकराई फिल्म
यह भी बताया गया कि इसे सीरीज तैयार करने के बाद मेकर्स ने इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स तक पहुंचाने की कोशिश की. हालांकि, उन्हें वहां से उम्मीद के मुताबिक प्रतिक्रिया नहीं मिली. प्लेटफॉर्म्स ने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई. ऐसे में मेकर्स के सामने अपनी कहानी को छोड़ देने या फॉर्मेट बदलने का विकल्प था. उन्होंने दूसरा रास्ता चुना. सीरीज को बंद करने के बजाय पूरी कहानी को फिल्म के रूप में तैयार करने का फैसला लिया गया.
जब ओटीटी से बात नहीं बनी तो मेकर्स ने कहानी को दोबारा फिल्म के हिसाब से तैयार किया. इसके लिए खूब रिसर्च किया गया. फिर इसके लिए लंबे नैरेटिव को छोटा करके एक फीचर फिल्म का रूप दिया गया. कहानी के जरूरी हिस्सों को बरकरार रखते हुए इसे सिनेमाघरों के दर्शकों के हिसाब से पेश किया गया. वहीं, रिलीज के बाद फिल्म को दर्शकों से जिस तरह की प्रतिक्रिया मिली. उससे मेकर्स का फैसला सही साबित होता नजर आया.
हालांकि, फिल्म 'हनुमान अंश' की चर्चा, सिर्फ इसकी कहानी की वजह से नहीं है. बल्कि कम बजट में इस फिल्म ने इतना अच्छा प्रदर्शन किया कि सुर्खियों में छा गई. हालांकि, फिल्म रिलीज के बाद शुरुआत में बहुत ज्यादा कमाल नहीं कर पाई. लेकिन दूसरा हफ्ता आते-आते दर्शकों के बीच चर्चा बढ़ने के साथ इसका प्रदर्शन भी बेहतर होता गया. अच्छी IMDb रेटिंग ने भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ाई. इसके अलावा फिल्म की कहानी, विषय और इसकी सफलता अब इसे एक ऐसी रिलीज बना रहे हैं, जिसके बारे में दर्शक और फिल्म इंडस्ट्री दोनों बात कर रहे हैं.
कहां से आया 'हनुमान अंश का आइडिया?
फिल्म 'हनुमान अंश' की कहानी का आईडिया अचानक नहीं आया. एक इंटरव्यू में बात करते हुए निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि नीम करौली बाबा की कहानी को पर्दे पर लाने का विचार उनके मन में लगभग 20 साल से था. इस दौरान उन्होंने इस विषय पर काफी समय तक काम किया और कहानी को समझने की कोशिश की. यानी फिल्म के पीछे सिर्फ एक धार्मिक कहानी को दिखाने का विचार नहीं था, बल्कि इसे बनाने के पीछे लंबी सोच और तैयारी भी रही है.
कितनी लंबी चली रिसर्च?
चतुर्वेदी ने यह भी बताया कि लगभग 2009 के आसपास इस विषय पर रिसर्च शुरू की थी. इसके बाद उन्होंने नीम करौली बाबा से जुड़े अलग-अलग स्थानों का दौरा किया. वहां रहने वाले लोगों और बाबा को करीब से जानने वाले लोगों से बातचीत करके उनके अनुभव और किस्से जुटाए गए. इस रिसर्च के दौरान सामने आई घटनाओं और अनुभवों को कहानी का हिस्सा बनाया गया. इसी वजह से मेकर्स ने फिल्म को सिर्फ एक सामान्य बायोपिक की तरह पेश नहीं किया.
उन्होंने आगे बताया कि रिसर्च के दौरान नीब करौरी गांव में उन्हें ऐसे लोगों से मिलने का मौका मिला, जो बाबा को हनुमान का अंश या अवतार मानते थे. इसी विचार ने फिल्म के नाम को जन्म दिया. यानी 'हनुमान अंश' सिर्फ एक आकर्षक टाइटल नहीं है, बल्कि फिल्म की मूल भावना और बाबा से जुड़ी आस्था से भी इसका संबंध है.
फिल्म का बजट कितना था?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म 'हनुमान अंश' का बजट लगभग 2 करोड़ रुपये है. यानी यह किसी बड़े स्टार या भारी-भरकम प्रोडक्शन बजट वाली फिल्म नहीं है. इसके बावजूद फिल्म ने सिनेमाघरों में अपनी पकड़ बनाई. कम बजट और सीमित संसाधनों के बीच फिल्म का अच्छा प्रदर्शन इसे और खास बना देता है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत बहुत बड़ी नहीं की थी. पहले दिन इसकी कमाई करीब 10 लाख रुपये बताई गई. लेकिन इसके बाद दर्शकों की प्रतिक्रिया से फिल्म को फायदा मिलने लगा. लोगों ने एक-दूसरे से फिल्म के बारे में बात करनी शुरू की और धीरे-धीरे इसकी कमाई बढ़ती गई. इसी word of mouth ने फिल्म को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई और यह एक तरह की स्लीपर हिट बनकर सामने आई.