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Bigg Boss 20: कभी टीवी सितारों के लिए 'बिग बॉस' घर-घर में पहचान बनाने का सबसे बड़ा जरिया हुआ करता था. हालांकि, सोशल मीडिया और डिजिटल क्रिएटर्स के दौर में इस समीकरण में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अब कई इन्फ्लुएंसर्स अपनी पहले से मौजूद डिजिटल ऑडियंस के साथ शो में एंट्री कर रहे हैं, जबकि स्थापित टीवी स्टार्स के लिए 100 दिनों तक कैमरों के सामने लगातार स्क्रूटनी झेलना और अपनी छवि को संभालना एक अलग तरह की चुनौती बन गया है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या यह शो अब टीवी कलाकारों से ज्यादा इन्फ्लुएंसर्स के लिए बड़ा मौका बनता जा रहा है?
सलमान खान के फेमस रियलिटी शो 'बिग बॉस' के सीजन 20 का प्रीमियर 6 सितंबर 2026 को हुआ. इस सीजन में टीवी कलाकारों, सोशल मीडिया पर्सनालिटी और परफॉर्मर्स से जुड़े कई अलग-अलग लोग देखने को मिले. हालांकि, शो की कास्टिंग को लेकर शुरुआत में चर्चा रही कि इस बार इसमें बहुत बड़े सितारों की कमी है, लेकिन मेकर्स का ध्यान केवल फेमस चेहरों पर नहीं, बल्कि अलग-अलग पर्सनालिटी के बीच बनने वाले नए समीकरणों पर केंद्रित है.
एक समय था जब टीवी कलाकारों के लिए 'बिग बॉस' में शामिल होना अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का सबसे बेहतरीन माध्यम था. डेली सोप के कलाकारों को इस शो के जरिए एक अलग पहचान मिलती थी और दर्शक उनके काल्पनिक किरदारों के पीछे की असली पर्सनालिटी, रिश्ते और रणनीतियों को देख पाते थे. वहीं, आज के दौर में इन्फ्लुएंसर्स शो में आने से पहले ही लाखों डिजिटल फॉलोअर्स से जुड़े होते हैं, जिससे वे पहले दिन से ही शो में एक मजबूत फैन बेस लेकर आते हैं.
'बिग बॉस' के घर में प्रतियोगियों को केवल टास्क और नॉमिनेशन का सामना नहीं करना पड़ता, बल्कि उनके व्यवहार पर 24 घंटे निगरानी रखी जाती है. फेमस टीवी स्टार्स की पहले से ही एक संजीदा और पारिवारिक छवि बनी होती है. घर के अंदर उनका अनफिल्टर्ड व्यवहार और गुस्सा अगर स्क्रीन की छवि से अलग दिखता है, तो सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बहस शुरू हो जाती है, जो उनके बने-बनाए करियर और प्रोफेशनल इमेज के लिए जोखिम बन सकता है.
डिजिटल क्रिएटर्स का सबसे बड़ा एडवांटेज यह है कि वे किसी भी स्थिति को तुरंत कंटेंट में बदलने की कला जानते हैं. 'बिग बॉस' के घर में हुई कोई छोटी-सी बहस, रिएक्शन या इमोशनल मोमेंट का 15-सेकंड का क्लिप भी रील्स, मीम्स और फैन एडिट्स के जरिए सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो जाता है. यह वायरल कंटेंट उनके डिजिटल करियर को शो के बाहर भी एक नई रफ्तार और विजिबिलिटी देता है.
हालिया 'वीकेंड का वार' एपिसोड में सलमान खान ने प्रतियोगियों की सुस्ती और घर में उनकी कम सक्रियता को लेकर कड़े सवाल उठाए. रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलमान ने प्रतियोगियों को साफ शब्दों में समझाया कि केवल घर में मौजूद रहना काफी नहीं है. उन्हें अपने एक्शन और असली पर्सनालिटी के जरिए दर्शकों से सीधे जुड़ना होगा, चाहे वे टीवी स्टार हों या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर.
हालांकि, यह कहना काफी जल्दबाजी होगी कि टीवी कलाकार पूरी तरह 'बिग बॉस' से दूरी बना रहे हैं, क्योंकि कई एक्टर्स आज भी इसे करियर का टर्निंग प्वॉइंट मानते हैं. आज कलाकारों के पास वेब सीरीज, ब्रांड कोलैबोरेशन और सोशल मीडिया जैसे कई अन्य विकल्प मौजूद हैं. टीवी स्टार्स के लिए चुनौती अपनी बनी-बनाई इमेज को संभालने की है, जबकि इन्फ्लुएंसर्स के लिए अपनी ऑनलाइन पॉपुलैरिटी को नेशनल टेलीविजन पर साबित करने की. इस एंगल पर हमने फिल्म क्रिटिक अमित भाटिया से भी बात की.
फिल्म क्रिटिक अमित भाटिया ने जी मीडिया से बात करते हुए इस मामले पर अपनी राय रखी. हमने उनसे सबसे पहले पूछा कि क्या बिग बॉस की ऑडियंस अब टीवी स्टार्स से ज्यादा डिजिटल पर्सनालिटी में इंटरेस्ट ले रही है? इस पर उन्होंने जवाब दिया-
बिल्कुल, 'बिग बॉस' की ऑडियंस टीवी स्टार्स से ज्यादा डिजिटल पर्सनालिटी ने ले ली है. क्योंकि जमाना डिजिटल का है और लोग देख भी डिजिटल पर रहे हैं. जियोहॉटस्टार पर पहले आता है और कलर्स पर बाद में आता है. हम सब लोग भी उसे ओटीटी पर ही देखते हैं और अपनी सहूलियत के हिसाब से देखते हैं. डिजिटल पर्सनालिटी की अपनी जबरदस्त ऑडियंस है, जिसका फायदा बिग बॉस को भी मिलता है. इस बार सलमान खान ने भी अनाउंस किया था कि सबसे ज्यादा व्यूअरशिप प्रीमियर एपिसोड की रही थी.
अमित भाटिया से दूसरा सवाल पूछा गया कि क्या बिग बॉस का कास्टिंग मॉडल अब टीवी-सेलिब्रिटी-लेड से सोशल-मीडिया-लेड हो रहा है? उन्होंने इसका जवाब दिया-
सोशल-मीडिया-लेड हर चीज हो गई है. फिल्मों में भी सोशल मीडिया स्टार्स लिए जा रहे हैं. अब ओटीटी पर ही सारे रियलिटी शोज आ रहे हैं, अगर आप देखें तो ओटीटी पर ही रियलिटी शो आ रहे हैं, टीवी पर तो बिग बॉस आ रहा है, लेकिन उससे पहले ओटीटी पर आता है. जब सोशल मीडिया पर ही आ रहा है और रील्स से ही वायरल होना है तो सोशल मीडिया स्टार्स को लेना ही पड़ेगा और टीवी सेलेब्स की वर्थ अब पहले से काफी कम हो गई है. क्योंकि अब न तो टीवी शो पहले की तरह लंबे सालों-साल चलते हैं.
अमित भाटिया से तीसरा सवाल पूछा गया कि पहले बिग बॉस टीवी स्टार्स के लिए ऑडियंस बनाने का प्लेटफॉर्म था, लेकिन अब इन्फ्लुएंसर्स अपनी बनी-बनाई डिजिटल ऑडियंस लेकर शो में आ रहे हैं। क्या इससे बिग बॉस की सेलेब्रिटी हायरार्की बदल रही है?
बिल्कुल, सेलेब्रिटी हायरार्की बदल रही है और मैं कहूंगा कि बदल चुकी है. अगर आप इस बार 'बिग बॉस' का सीजन 20 देखेंगे तो कोई भी कोई बड़ा टीवी स्टार नहीं है. आपको एक-दो दिखेंगे, लेकिन आपको सोचना पड़ेगा कि वो कौन से टीवी शो में थे. बड़े टीवी स्टार्स पहले ऐसे रियलिटी शो में नजर आते थे, लेकिन अब प्लेटफॉर्म को भी लगता है कि अब बड़े टीवी स्टार्स पर पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि जितना बड़ा टीवी स्टार, उतना ज्यादा पैसा. इन्फ्लुएंसर्स की अपनी ऑडियंस होती है, कहीं न कहीं प्लेटफॉर्म को भी लगता है कि इसकी रील कट जाएगी तो इसकी टीम अपने आप पुश करेगी और उसकी अपनी ऑडियंस है.
अमित भाटिया से चौथा सवाल पूछा गया कि इन्फ्लुएंसर्स के लिए बिग बॉस में आने का सबसे बड़ा फायदा क्या है- मेनस्ट्रीम पहचान, क्रेडिबिलिटी या ब्रांड वैल्यू? उन्होंने जवाब दिया-
देखिए, इन्फ्लुएंसर्स किसी भी फील्ड के होते हैं, उनके पास उसी फील्ड की ऑडियंस होती है. जैसे इस बार कंटेस्टेंट स्काउट आया है, उसके पास गेमिंग की ऑडियंस है. अगर वो बिग बॉस में आएगा तो बाकी के लोग भी उसे जानेंगे और उनमें से मेनस्ट्रीम पहचान तो मिलती है, क्रेडिबिलिटी भी होती है और ब्रांड वैल्यू बिग बॉस में आकर बढ़ती ही है, चाहे वो सीजन हिट हो या फ्लॉप. क्योंकि बिग बॉस को बहुत लोग देखते हैं और बहुत से गुमनाम लोगों को बिग बॉस ने पहचान दी है. कहीं न कहीं कुछ लोग तो ऐसे हैं जो सिर्फ बिग बॉस में आए हैं और सालों-साल इवेंट्स में जाकर फीता काटकर उसी फेम का फायदा उठाते हैं और उसी से कमाते हैं.
अमित भाटिया से पांचवां सवाल पूछा गया कि क्या बिग बॉस अब ऐसे कंटेस्टेंट्स को ज्यादा प्लेटफॉर्म देता है जो कंट्रोवर्सी क्रिएट करते हैं, क्योंकि इससे टीआरपी और सोशल मीडिया इंगेजमेंट बढ़ता है? उन्होंने जवाब दिया-
ऐसा अभी से नहीं है, बल्कि शुरू से है कि जो कंट्रोवर्सी क्रिएट करते थे, उन्हें ज्यादा तवज्जो दी जाती थी, ज्यादा प्लेटफॉर्म दिया जाता था. क्योंकि अगर वो कंट्रोवर्सी में रहा है तो लोग उसे ज्यादा जानते हैं. जैसे वड़ा पाव गर्ल थी, वो 'बिग बॉस ओटीटी' में आई, जाहिर तौर पर कुछ न कुछ उसके पंगे होते रहते थे, तो लोग उन्हें जानते थे. इससे क्या होता है, लोग उन्हें थोड़ा-थोड़ा पहले से पहचानते हैं. इस बार बिग बॉस 20 में बहुत से कंटेस्टेंट को लोग जानते ही नहीं हैं, क्योंकि वो किसी कंट्रोवर्सी में रहे ही नहीं हैं.
अमित भाटिया से छठा सवाल पूछा गया कि क्या बिग बॉस 20 में एंटरटेनमेंट के नाम पर टॉक्सिसिटी को नॉर्मलाइज किया जा रहा है? उन्होंने जवाब दिया-
'बिग बॉस 20' में सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि यहां के कंटेस्टेंट बहुत कम ऐसे हैं, जिन्हें लोग जानते हैं. ऐसे में ये लोग कुछ-कुछ ट्राई कर रहे हैं. पिछले सारे सीजन ये देख कर आए हैं और वहीं सब लड़ाई कर रहे हैं, अंडे पर झगड़ा, बाथरूम पर झगड़ा. ये सब हम बहुत देख चुके हैं, जिसकी वजह से अब उसे देखने में मजा नहीं आ रहा है. बाकी टॉक्सिसिटी को नॉर्मलाइज करने की बात है तो ये सब फिल्मों में भी हो रहा है और ये सब नहीं सोचा जाता, न ही मेकर्स और प्लेटफॉर्म के द्वारा. उन्हें लगता है कि बस कंटेंट बनाओ और वो चलना चाहिए, वो टॉक्सिक है, नॉन-टॉक्सिक है. इससे मेकर्स को लेना-देना नहीं होता, उन्हें लगता है ये तो हमारी सोच है.
अमित भाटिया से सातवां सवाल पूछा गया कि क्या आपको लगता है कि कंटेस्टेंट जानबूझकर कैमरे के सामने एक्सट्रीम बिहेवियर कर रहे हैं ताकि वायरल हो सके? उन्होंने जवाब दिया कि-
बिल्कुल, कंटेस्टेंट जानबूझकर कैमरे के सामने करते हैं. जैसे काजी कैमरे के सामने उटपटांग बोलता है, जानबूझकर उसने कैमरे के सामने बोला कि मैं बीमार हूं और जब बिग बॉस ने डॉक्टर भेजा तो वो बोला कि मैं स्क्रिप्ट के लिए कर रहा था. तो ये सब जानबूझकर पहले से हो रहा है और ये हर कोई करता है. मुझे लगता है कि जब कोई बिग बॉस में आता है और फीस लेता है तो उसकी जिम्मेदारी है कि वो कुछ एंटरटेन करेगा. तो जाहिर सी बात है, वो कोशिश करेगा. अब बिग बॉस ले तो लेता है, कई बार कुछ कंटेस्टेंट बिग बॉस के लायक होते नहीं हैं या तो वो शुरू में ही निकल जाते हैं या फिर कोशिश करते रहते हैं और इसी चक्कर में वो कई बार वायरल भी हो जाते हैं.