साउथ की इस फिल्म को मिलेंगे 3 नेशनल अवॉर्ड्स, IMDb रेटिंग है 8.1, जानें किस ओटीटी पर देख सकते हैं मूवी
मेजर मुकंद वरदराजन की शहादत पर फिल्म को 3 नेशनल अवॉर्ड मिले हैं. फिल्म में साई पल्लवी और शिवकार्तिकेयन ने शानदार एक्टिंग की थी.
72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में फिल्म को 3 नेशनल अवॉर्ड मिलने वाले हैं. फिल्म को दर्शकों ने काफी प्यार भी किया है. फिल्म की IMDb रेटिंग 8.1 हैं. एक ऐसी फिल्म है जिसकी कहानी खत्म होने के बाद भी इसका असर लंबे समय तक दिल पर बना रहता है. इस फिल्म को आप अपनी वॉचलिस्ट में शामिल कर सकते हैं. फिल्म को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.
क्या है फिल्म का नाम
तमिल फिल्म अमरन है. फिल्म की कहानी भारतीय सेना के शहीद मेजर मुकंद वरदराजन की लाइफ, वीरता और शहादत की कहानी पर आधारित है. फिल्म में शिवकार्तिकेयन ने मेजर मुकंद का किरदार को निभाया है, साईं पल्लवी उनकी पत्नी इंदु रेबेका वर्गीज का किरदार निभाया था. दोनों स्टार ने अपनी एक्टिंग से सबको रुला दिया.
क्या है कहानी
अमरन की ना केवल यु्द्ध या देशभक्ति पर आधारित है. फिल्म में एक सैनिक की ड्यूटी के साथ उनकी पर्सनल लाइफ, प्यार, शादी और परिवार के इमोशन को दिखाया गया है. डायरेक्टर राजकुमार पेरियासामी ने फिल्म में आंतकवाद के अलावा परिवार की कहानी को भी दिखाया है. फिल्म की कहानी केवल एक जवान की नहीं बल्कि परिवार के दर्द, संघर्ष और त्याग की कहानी है.
साई पल्लवी ने जीता दिल
साई पल्लवी ने अपनी एक्टिंग से सबका दिल जीता है. उन्होंने अपनी एक्टिंग से चेहरे पर प्यार, खुशी, चिंता और दुख को शानदार तरीके से दिखाया है. फिल्म में उनकी एक्टिंग को देख लगता है कि उन्होंने किरदार को पर्दे पर निभाया नहीं बल्कि किरदार को जिंदा किया है. शिवकार्तिकेयन ने मेजर मुकुंद के रोल में अपनी बॉडी और लुक्स पर कमाल का काम किया है. वह अपने किरदार में पूरी तरह से ढले हुए नजर आए हैं. उनकी शानदार एक्टिंग को काफी पसंद किया गया है.
क्यों है फिल्म खास
फिल्म अमरन में कश्मीर आतंकवाद विरोधी अभियानों और सेना ऑपरेशंस को दिखाया गया है. फिल्म केवल देशभक्ति नारों और बड़े-बड़े डायलॉग पर आधारित नहीं है. बल्कि इसमें सैनिक के मिशन और उसके सामने वाली परिस्थितियों को दिखाया गया है.
प्यार और फर्ज की कहानी
फिल्म में मेजर मुकुंद और इंदु की लव स्टोरी भी दिखाई गई है. दोनों का रिश्ता कैसे धीरे-धीरे आगे बढ़ता है. शादी के बाद सैनिक की लाइफ में क्या-क्या मुश्किले आती हैं उन्हें भी दिखाया गया है. इसी वजह से पूरी फिल्म केवल वॉर ड्रामा नहीं बल्कि एक इमोशनल फिल्म भी है.
फिल्म का फ्लो है थोड़ा स्लो
फिल्म 2 घंटे 49 मिनट की हैं. कुछ सीन और जगह पर फिल्म स्लो है. दूसरे हाफ में फिल्म की कहानी काफी खिंची-खिंची लगती है. वहीं मेजर मुकुंद की रियल लाइफ पर फिल्म बनाई गई है, ऐसे में फिल्म में बड़े ट्विस्ट कम है. अगर आपको मेजर मुकुंद की कहानी के बारे में पता है तो आपको कई घटनाओं के बारे में पहले से ही पता होगा.