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धक्के खाए, कब्रिस्तान में पड़ा सोना! बॉलीवुड में 16 साल के संघर्ष और नेपोटिज्म पर अक्षय ओबेरॉय का बेबाक बयान; खोले और कई राज

Akshay Oberoi ZEE News Interview: अक्षय ओबेरॉय ने जी न्यूज से खास बातचीत में अपने 16 साल लंबे करियर, संघर्ष, नेपोटिज्म, पारिवारिक जीवन और अपनी फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर खूब सारी बातें कीं. उन्होंने बताया कि कैसे एक अंदरूनी विश्वास ने उन्हें मुश्किल दौर में भी आगे बढ़ने की ताकत दी. चलिए बताते हैं उन्होंने और क्या-क्या कहा.

धक्के खाए, कब्रिस्तान में पड़ा सोना! बॉलीवुड में 16 साल के संघर्ष और नेपोटिज्म पर अक्षय ओबेरॉय का बेबाक बयान; खोले और कई राज
Image Credit: अक्षय ओबेरॉय ने जी न्यूज के साथ शेयर की ढेरों बातें (स्क्रीनग्रैब)

अक्षय ओबेरॉय ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपने करियर की शुरुआत साल 2010 में आई फिल्म ‘इसी लाइफ में...!’ से की थी. शुरुआती दिनों में भले ही उन्हें बड़ी कमर्शियल कामयाबी न मिली हो, लेकिन अपनी बेहतरीन एक्टिंग के दम पर उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग जगह बनाई. ‘गुड़गांव’, ‘पिज्जा’, ‘फ्लेश’, ‘हाई’, ‘इल्लीगल’ जैसी कई फिल्मों और वेब सीरीज में उनके काम को लोगों ने खूब सराहा. हाल ही में जी न्यूज से हुई बातचीत में अक्षय ने अपने करियर के उतार-चढ़ाव, संघर्ष और कामयाबी पर खुलकर बात की.

उन्होंने कहा कि एक लंबा सफर तय करने के बाद अब जाकर लोग उन्हें उनके काम से पहचानने लगे हैं. जी न्यूज को दिए इंटरव्यू में अक्षय ओबेरॉय ने अपने काम के साथ-साथ पर्सनल लाइफ के बारे में काफी कुछ शेयर किया. उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में बने रहने के लिए पेशेंस, मेहनत और लगातार सीखते रहना कितना जरूरी है. अक्षय का मानना है कि हर किरदार कुछ नया सिखाता है और यही बात उन्हें आगे बढ़ने की हिम्मत देती है. आज वे उन चुनिंदा कलाकारों में से एख हैं, जिन्होंने बिना किसी शॉर्टकट के अपना मुकाम हासिल किया.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

सवाल: आपने राजश्री जैसे बड़े बैनर से शुरुआत की, फिर हॉरर, रोमांटिक हर तरह की फिल्में कीं और कई साइड रोल भी निभाए. इस पूरे सफर में खुद को कैसे संभाला और ये भरोसा कैसे बनाए रखा कि एक दिन सब ठीक होगा?

अक्षय: मुझे लगता है अंदर से हमेशा एक आवाज आती थी कि मैं अपनी मंजिल तक पहुंच ही जाऊंगा. इसे आप जुनून कहिए या कुछ और पर एक पक्का यकीन था. हमेशा यही सोचता था कि चलो आज नहीं जीते, तो कल या परसों जीत अपनी ही होगी. बस काम में जुटे रहे. काम करते-करते इतने साल बीत गए, इतने लोगों के साथ काम करने का मौका मिला और काफी एक्सपीरियंस मिला. आज भी लगता है कि वो बड़ा मुकाम शायद अभी बाकी है, लेकिन सुकून इस बात का है कि मैं सही रास्ते पर हूं. मैं हमेशा कहता हूं कि मैंने एक-एक ईंट जोड़कर घर बनाया है, अब बस छत डालना बाकी है.

सवाल: एक्टिंग का ख्याल मन में कब आया? क्या बचपन से ही एक्टर बनना था या फैमिली के फिल्मी बैकग्राउंड की वजह से ये रास्ता चुना?

अक्षय: मैंने बचपन में ही एक फिल्म कर ली थी, जिसका नाम था ‘अमेरिकन चाय’ (2001). मैं न्यू जर्सी में पला-बढ़ा हूं और वहीं ये फिल्म शूट हुई थी. उसमें परेश रावल जी मेरे पिता बने थे. उस वक्त मेरी उम्र करीब 14 साल थी और उससे पहले मैं थिएटर करता था. सच कहूं तो जब मैं 10-12 साल का था, तभी तय कर लिया था कि मुझे एक्टर ही बनना है. अमेरिका में रहने के बाद भी दिल में यही था कि इंडिया जाकर ही काम करना है और आखिरकार वही हुआ.

सवाल: इंडस्ट्री में नेपोटिज्म पर काफी बहस होती है कि बिना किसी गॉडफादर के आगे बढ़ना नामुमकिन है. आपका फिल्मी बैकग्राउंड रहा है, तो इस पर आपकी क्या राय है?

अक्षय: इस मुद्दे पर इतनी बात हो चुकी है कि अब सबको सब पता है. कल तक तो किसी को इसमें कोई दिलचस्पी नहीं थी, जबकि मैं 16 साल से काम कर रहा हूं. मुझे लगता है आज की ऑडियंस बहुत समझदार है. वो फौरन समझ जाती है कि कौन मेहनत से आया है और कौन सिफारिश से. अब दौर बदल चुका है, ये जेन-जी का जमाना है और यहां नेपोटिज्म वालों के लिए भी राह आसान नहीं है, सबके लिए मुश्किल है. जहां तक मेरी बात है, सब जानते हैं कि मैं कब से पसीना बहा रहा हूं और पूरी ईमानदारी से काम कर रहा हूं. जब तक सांस है करता रहूंगा, क्योंकि मुझे अपने काम से प्यार है. रास्ते में मुश्किलें आती हैं, तो आने दो, झेल लेंगे.

सवाल: फिल्म ‘टॉक्सिक’ में आपका लुक काफी दमदार दिख रहा है. सुपरस्टार यश के साथ काम करने का तजुर्बा कैसा रहा और इस बॉन्डिंग को आप 10 में से कितने नंबर देंगे?

अक्षय: बहुत ही शानदार एक्सपीरियंस रहा. उनसे काफी कुछ सीखने को मिला. वो जितने कमाल के एक्टर हैं, उससे कहीं बेहतर लीडर हैं. जिस तरह वो पूरी टीम को साथ लेकर चलते हैं, वो वाकई तारीफ के काबिल है. उन्हें अपनी काबिलियत पर इतना भरोसा है कि वो बड़ा से बड़ा दांव खेल सकते हैं. उन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई और पूरी इंडस्ट्री का नाम ऊंचा किया. मैंने उन्हें सेट पर फैसले लेते और काम करते देखा है. उन्हें सिनेमा के हर काम की गहरी समझ है, चाहे वो लाइट हो, कैमरा हो या सेट डिजाइन. हमारी बॉन्डिंग की बात करें तो मैं पूरे 10 में से 10 नंबर दूंगा.

सवाल: क्या कभी किसी बड़े सेट पर कोई ऐसा सीन मिला, जिसे देखकर लगा हो कि ये बहुत मुश्किल है?

अक्षय: मुझे एक्टिंग के साथ मुश्किल या चैलेंजिंग शब्द जोड़ना थोड़ा अजीब लगता है, क्योंकि इसमें एक निगेटिव फील आती है. मुझे एक्टिंग करने में सबसे ज्यादा मजा आता है. ये मेरे लिए खुशी और सुकून का जरिया है. चाहे रोने का सीन हो, चिल्लाने का हो या कोई इमोशनल सीन, मुझे मजा ही आता है. मैं ये काम नाम कमाने के लिए नहीं करता, वो तो अपने आप मिल जाता है. मुझे दिल से एक्टिंग पसंद है, इसलिए मुझे कुछ भी भारी या मुश्किल नहीं लगता.

सवाल: फिल्म का टाइटल ‘टॉक्सिक’ है, तो क्या पर्सनल लाइफ में कभी किसी ‘टॉक्सिक’ इंसान से पाला पड़ा?

अक्षय: मैंने अपनी स्कूल की दोस्त से शादी की है. जब हम पहली बार मिले थे तब वो 14 साल की थीं और मैं 17 का था. हम तब से साथ हैं और शादी को भी 15-16 साल हो गए हैं. भगवान की दया से जिंदगी में कभी ऐसा कोई एक्सपीरियंस नहीं हुआ. हमारा एक प्यारा सा बेटा अव्यान भी है. हम सभी साथ में काफी खुश हैं.

सवाल: काम और घर-परिवार के बीच कभी बैलेंस बनाने में दिक्कत आई?

अक्षय: बिल्कुल नहीं, मैं अपनी जिंदगी में बहुत खुश हूं. मैंने अपनी सबसे अच्छी दोस्त से शादी की है और वो मेरी सबसे बड़ी ताकत हैं. मैं अपने काम में खुश रहता हूं और वो अपने काम में. हमारा एक प्यारा सा बेटा है और हम अपनी छोटी सी दुनिया में बेहद खुश हैं. इस मामले में खुद को काफी लकी मानता हूं.

सवाल: क्या कभी ग्रे या निगेटिव रोल करने के बाद ऐसा डर लगा कि आगे रोमांटिक या सीधे-सादे रोल नहीं मिलेंगे?

अक्षय: हो सकता है ऐसा होता हो, लेकिन उस वक्त जो सबसे बेहतर मौका सामने होता है, मैं वही चुनता हूं. कल क्या होगा ये कोई नहीं जानता. अगर मुझे स्क्रिप्ट, डायरेक्टर और अपना किरदार पसंद आता है, तो मैं हां कर देता हूं. काम तो करना ही है, इसलिए जहां दिल मानता है वो रोल कर लेता हूं.

सवाल: आप अपने रोल्स में काफी डूब जाते हैं, तो उस गंभीर किरदार से बाहर निकलने में कितना वक्त लगता है?

अक्षय: मैं बहुत जल्दी किरदार में आ भी जाता हूं और बाहर भी निकल जाता हूं. शूटिंग शुरू होने से पहले मैं किरदार की तैयारी, डायलॉग्स और उसकी सोच पर पूरी मेहनत करता हूं, लेकिन एक बार कैमरे के सामने आने के बाद मैं बिल्कुल नॉर्मल हो जाता हूं और काम को एन्जॉय करता हूं. सेट मेरे लिए किसी पार्टी जैसा होता है. एक बार मैं दिनभर फिल्म सिटी में ‘टॉक्सिक’ के एक्शन सीन शूट कर रहा था, जहां गोलियां और धमाके चल रहे थे. वहीं से सीधे मुझे ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ के सेट पर जाना पड़ा, जहां राजस्थानी गाने पर सब नाच-गा रहे थे. माहौल एकदम बदल गया, लेकिन मुझे एक रोल से दूसरे रोल में जाने में कोई परेशानी नहीं हुई.

सवाल: आपके दिल के सबसे करीब कौन से प्रोजेक्ट्स रहे हैं?

अक्षय: मैं तीन नाम लेना चाहूंगा- सबसे पहले फिल्म ‘गुड़गांव’, दूसरी वेब सीरीज ‘हाई’ जो एमएक्स प्लेयर पर आई थी और तीसरी फिल्म ‘फाइटर’, जो मेरे दिल के बहुत करीब है. इसके अलावा हॉरर फिल्म ‘पिज्जा’ भी मुझे बहुत पसंद है.

सवाल: क्या आप असल जिंदगी में भूत-प्रेत पर यकीन करते हैं, क्या शूटिंग पर कभी कुछ डरावना महसूस हुआ?

अक्षय: मुझे सच में नहीं पता कि ये चीजें होती हैं या नहीं. जब मैं फिल्म ‘पिज्जा’ की तैयारी कर रहा था, तब किरदार को समझने के लिए एक रात कब्रिस्तान में जाकर सो गया था. उस रात मुझे कुछ भी अजीब या डरावना नहीं लगा, इसलिए मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता. उसके बाद भी कभी ऐसा कोई वाकया नहीं हुआ.

सवाल: क्या आगे चलकर डायरेक्शन या प्रोडक्शन में आने का कोई प्लान है?

अक्षय: शायद प्रोडक्शन की तरफ रुख करूं, क्योंकि मैं अच्छी कहानियां लोगों तक पहुंचाना चाहता हूं. अभी इस बारे में बहुत पक्का प्लान नहीं बना है, लेकिन जब भी कोई अच्छी स्क्रिप्ट हाथ लगेगी, तो जरूर बताऊंगा.

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About the Author

Vandana Saini

Vandana Saini

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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