अक्षय-सैफ की ‘हैवान’ पर भारी पड़ा हनुमान का नाम! 36वें दिन भी बॉक्स ऑफिस पर आस्था का जलवा
Haiwaan Vs Hanuman Ansh: बॉक्स ऑफिस पर बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. 18 साल बाद साथ आए अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म ‘हैवान’ पहले दिन सुस्त पड़ गई. वहीं, बिना किसी बड़े स्टार के रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ अपने रिलीज के 36वें दिन भी भारी कमाई कर सिनेमाघरों में गर्दा उड़ा रही है.
हिंदी सिनेमा के गलियारों से हर शुक्रवार को किस्मत बदलने वाली खबरें आती हैं, लेकिन इस बार जो तस्वीर सामने आई है, उसने पूरी इंडस्ट्री को सोचने पर मजबूर कर दिया. एक तरफ इंडस्ट्री के दो मंझे हुए सुपरस्टार्स अक्षय कुमार और सैफ अली खान पूरे 18 साल बाद किसी फिल्म में साथ नजर आए, जिसका नाम है ‘हैवान’ और डारेक्टर हैं प्रियदर्शन. यानी पर्दे पर कामयाबी का पुराना और परखा हुआ फॉर्मूला. दूसरी तरफ एक ऐसी फिल्म, जिसके पास न कोई बड़ा चेहरा था, न करोड़ों बजड और न ही सैकड़ों होर्डिंग्स.
इस फिल्म का नाम है ‘हनुमान अंश’, जिसे डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने बनाया है. हैरानी की बात ये है कि जहां बड़े सितारों की नई रिलीज फिल्म पहले ही दिन टिकट खिड़की पर ऑडियंस के लिए तरसती नजर आई. वहीं, छोटे बजट की आस्था से भरी कहानी अपनी रिलीज के छठे हफ्ते में भी ऐसा कमाल कर रही है, जिसने हर किसी को हैरान कर रखा है. सिनेमाघरों के बाहर का नजारा साफ बता रहा है कि अब वक्त बदल चुका है. दर्शक सिर्फ नाम देखकर अपनी जेब से पैसे नहीं निकाल रहे. वे स्क्रीन पर कुछ नया देखना चाहते हैं.
आंकड़ों का खेल: सैकनिल्क की रिपोर्ट ने उड़ाए होश
बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों पर नजर रखने वाली ट्रेड वेबसाइट सैकनिल्क (Sacnilk) के मुताबिक अक्षय कुमार और सैफ अली खान की ‘हैवान’ ने अपनी रिलीज के पहले दिन पूरे देश में सिर्फ 3 करोड़ रुपये के आसपास का नेट कलेक्शन किया. ये आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है, क्योंकि फिल्म को देश भर में 7 हजार से भी ज्यादा शोज दिए गए थे.
इतने बड़े स्केल पर रिलीज होने के बाद भी सिर्फ 3 करोड़ का आंकड़ा किसी भी मेकर्स और स्टार कास्ट के लिए बड़े झटके से कम नहीं है. अब जरा सिक्के के दूसरे पहलू को देखिए. उसी दिन ‘हनुमान अंश’ अपने 36वें दिन के सफर पर थी. सैकनिल्क के डेटा के मुताबिक, इस फिल्म ने अपने 36वें दिन करीब 10.50 करोड़ रुपये नेट कमाए.
सीधा गणित ये है कि महीने भर से ज्यादा पुरानी फिल्म ने उसी दिन रिलीज हुई एक फ्रेश मल्टीस्टारर फिल्म से तीन गुना से भी ज्यादा की कमाई कर डाली. ट्रेड पंडितों का मानना है कि हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसा उलटफेर बहुत कम देखने को मिलता है जब कोई पुरानी फिल्म किसी नई मेगा-बजट फिल्म को पहले ही दिन पानी पिला दे. वो भी रिलीज के 36वें दिन.
आखिर क्यों नहीं चला ‘हैवान’ का जादू?
अब सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े सितारों और डायरेक्टर की मौजूदगी के बाद भी ‘हैवान’ में ऐसी क्या कमी रह गई, जो लोग सिनेमाघरों से दूर रहे? फिल्म को लेकर शुरुआती दौर में काफी बातें हो रही थीं. अक्षय-सैफ की जोड़ी को ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘ये दिल्लगी’ और ‘टशन’ जैसी फिल्मों में खूब प्यार मिला.
अब करीब 18 साल के लंबे फासले के बाद दोनों का पर्दे पर लौटना अपने आप में बड़ी बात थी, लेकिन थिएटरों के अंदर की तस्वीर बिल्कुल जुदा निकली. फिल्म के पहले दिन की कमाई ने हर किसी को हैरान कर दिया. सैकनिल्क के आंकड़ों के मुताबिक, पहले दिन सिनेमाघरों में ‘हैवान’ की ऑक्यूपेंसी सिर्फ 11 परसेंट के आसपास दर्ज की गई.
सुबह के शोज का हाल तो और भी बुरा रहा, जहां केवल 6 परसेंट सीटें भरी थीं. रात के शोज में थोड़ी हलचल दिखी भी तो वो आंकड़ा महज 18 परसेंट तक ही जा सका. अब क्रिटिक्स और सैकनिल्क की नजर फिल्म के दूसरे दिन के कलेक्शन पर हैं. हर कोई ये जानना चाहता है कि आखिर वीकेंड के दो दिनों में क्या ये फिल्म अच्छी खासी कमाई कर अपनी लाज बॉक्स ऑफिस पर बचा सकती है या नहीं?
रीमेक का ट्रेंड और ऑडियंस का लेक ऑफ इंटरेस्ट
फिल्म जानकारों का कहना है कि ‘हैवान’ के पिछड़ने की सबसे बड़ी वजह इसका रीमेक होना है. ये फिल्म असल में डायरेक्टर प्रियदर्शन की ही साल 2016 में आई मलयालम हिट ‘ओप्पम’ का ऑफिशियल हिंदी रीमेक है. आज की ऑडियंस स्मार्टफोन और हाई-स्पीड इंटरनेट के दौर में जी रही है.
ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लगभग हर भाषा का ओरिजिनल कंटेंट सबटाइटल्स और हिंदी डबिंग के साथ आसानी से मौजूद है. ऐसे माहौल में जब दर्शक ओरिजनल कहानी को पहले ही देख चुके हों या उसके बारे में जानते हों, तो उनके अंदर रीमेक देखने की एक्साइटमेंट बहुत कम हो जाती है. इसके अलावा फिल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले.
हिंदुस्तान टाइम्स जैसे ब्रांड ने अपने रिव्यू में साफ लिखा कि कहानी में पकड़ बनाने का दम था, लेकिन ढीले स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमियों के चलते फिल्म ऑडियंस पर वो असर नहीं छोड़ पाती, जिसकी उम्मीद की जा रही थी. कमजोर स्क्रीनप्ले और पुरानी पड़ चुकी कहानी की वजह से फिल्म पहले ही दिन बैकफुट पर चली गई.
क्या खत्म हो रहा है बॉलीवुड का ‘स्टारडम’?
ये बहस अब बॉलीवुड के अंदर काफी तेज हो चुकी है कि क्या वाकई में सिर्फ स्टार के चेहरे पर फिल्म बिकने का जमाना लद चुका है? पिछले कुछ सालों के ट्रेंड्स बताते हैं कि बड़े से बड़े सुपरस्टार की फिल्में भी अगर कमजोर कहानी के साथ आती हैं, तो ऑडियंस उन्हें पहले ही वीकेंड में नकार देती है.
आज का आम दर्शक टिकट की कीमत और मल्टीप्लेक्स के पॉपकॉर्न का खर्च तभी उठाना चाहता है, जब उसे थिएटर में कोई यूनिक और अलग सा एक्सपीरियंस मिले.‘हैवान’ को मिले 7 हजार से ज्यादा शोज ये साबित करने के लिए काफी थे कि डिस्ट्रीब्यूटर्स ने स्टार पावर पर पूरा भरोसा जताया था, लेकिन ऑडियंस ने साफ कर दिया कि बिना सॉलिड कंटेंट के वे थिएटर्स का रुख नहीं करेंगे.
स्टार्स का जलवा अपनी जगह है, लेकिन टिकट खिड़की का फैसला सिर्फ और सिर्फ कहानी की मजबूती पर टिका होता है. जैसा कि जाने-माने ट्रेंड एनालिस्ट कोमल नहाटा ने भी जी न्यूज के साथ बातचीत में कहा था कि बॉलीवुड का ‘स्टारडम’ आज भी कायम है, बस कंटेंट की कमी है.
10 लाख से 200 करोड़: ‘हनुमान अंश’ की अनोखी दास्तान
अब बात करते हैं उस फिल्म की, जिसने पूरे बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रखा है. ‘हनुमान अंश’ की कामयाबी की कहानी किसी फेयरी टेल जैसी लगती है. सैकनिल्क के आंकड़ों पर नजर डालें तो जब ये फिल्म पहले दिन रिलीज हुई थी, तब इसने सिर्फ 10 लाख रुपये का बिजनेस किया था.
पहले दो हफ्तों तक फिल्म बहुत ही शांत तरीके से चुनिंदा स्क्रीन्स पर चलती रही, लेकिन तीसरे हफ्ते से जो हुआ, उसे बॉक्स ऑफिस पर हुआ बड़ा चमत्कार कहा जा रहा है और एक 36 दिन बाद भी ये चमत्कार कायम है. फिल्म ने अचानक ऐसी रफ्तार पकड़ी कि इसकी कमाई के आंकड़े हर दिन सबको हैरान करने लगे. देखते ही देखते फिल्म ने देश भर में 173 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट कलेक्शन पार कर लिया.
वहीं, भारत में इसका ग्रॉस आंकड़ा 205 करोड़ के पार पहुंच चुका है. ग्लोबल लेवल पर भी फिल्म 200 करोड़ का बड़ा मुकाम छू चुकी है. 10 लाख की ओपनिंग से शुरू होकर इस मुकाम तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड है, जबकि इस फिल्म का बजट सिर्फ 2 करोड़ रुपये के आस-पास बताया जाता है.
आस्था, सादगी और वर्ड ऑफ माउथ की ताकत
‘हनुमान अंश’ का डायरेक्शन विशाल चतुर्वेदी ने किया है. ये पूरी फिल्म नीम करौली बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं और उनसे जुड़े एक्सपीरियंस से इंस्पायर कहानी पर बनाई गई है. फिल्म में कोई ऐसा चेहरा नहीं था, जिसके नाम पर पहले दिन भीड़ उमड़ पड़ती, लेकिन जैसे ही कुछ लोगों ने फिल्म देखी, इसकी चर्चा हवा की तरह फैलने लगी.
फिल्म को सबसे बड़ी मजबूती दी 'वर्ड ऑफ माउथ' ने. यानी जब एक दर्शक ने थिएटर से निकलकर चार लोगों को बताया कि ये फिल्म जरूर देखनी चाहिए. सोशल मीडिया पर लोगों ने इसके इमोशनल सीन्स और सादगी भरे अंदाज की तारीफों के पुल बांध दिए. इस फिल्म के गाने सोशल मीडिया पर देखते ही देखते ट्रेंड करने लगे.
लोगों को लगा कि ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अहसास है, जिसके एक बार तो जरूर देखना चाहिए. यही वजह है कि 36वें दिन भी इस फिल्म के नाइट शोज में 60 परसेंट से ज्यादा ऑक्यूपेंसी देखने को मिली. पांच हफ्ते पुरानी फिल्म के लिए ऐसी दीवानगी आज के दौर में नामुमकिन सी मानी जाती है.
सिनेमाघरों का गणित: जहां भीड़, वहीं स्क्रीन
सिनेमा का कारोबार पूरी तरह नफे और नुकसान पर टिका होता है. थिएटर्स के मालिक कभी भी घाटे में शो नहीं चला सकते. मल्टीप्लेक्स और सिंगल स्क्रीन मालिकों के लिए खाली कुर्सियों पर एसी चलाना भारी पड़ता है. यही वजह है कि जब ‘हैवान’ को दर्शक नहीं मिले, तो सिनेमाघरों ने फौरन अपना रुख बदल लिया.
ट्रेड से जुड़ी खबरों की मानें तो कई सर्किट्स में थिएटर्स ने नई फिल्म के शोज घटाकर ‘हनुमान अंश’ की स्क्रीन्स बढ़ा दी हैं.
डिस्ट्रीब्यूटर्स और एग्जीबिटर्स भी उसी फिल्म को स्क्रीन देना पसंद कर रहे हैं, जो लगातार टिकट बेच रही है. नतीजतन छठे हफ्ते में भी ‘हनुमान अंश’ हजारों शोज में शान से चल रही है. ये सिचुएशन नई फिल्मों के लिए बहुत बड़ा चैलेंज बन गया है, क्योंकि उन्हें रिलीज होकर अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
बॉलीवुड के लिए मैसेज: कंटेंट ही है असली राजा
‘हैवान’ और ‘हनुमान अंश’ के इस आमने-सामने के मुकाबले ने फिल्म मेकर्स को आईना दिखा दिया है. एक तरफ करोड़ों का बजट, भारी-भरकम स्टारकास्ट, रीमेक का सहारा और एग्रेसिव मार्केटिंग है. वहीं दूसरी तरफ बेहद लिमिटेड बजट, अनजाने चेहरे, लेकिन जमीन से जुड़ी आस्था और दिल को छू लेने वाली कहानी थी.
ऑडियंस ने अपना फैसला बहुत साफ लफ्जों में सुना दिया है. अब दर्शक किसी भी स्टार के नाम पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं. अगर कहानी में दम नहीं है, किरदारों में ईमानदारी नहीं है, तो फिल्म पहले ही दिन ढेर हो जाएगी. वहीं, अगर कहानी में सच्चाई है, तो कम बजट की फिल्म भी 200 करोड़ का क्लब पार कर सकती है.
ये मुकाबला आने वाले समय में हिंदी सिनेमा के प्रोडक्शन के तरीके को बदलेगा. बड़े नामों की चमक के बजाय अब राइटर्स, डायरेक्टर्स और ओरिजनल कहानियों पर भरोसा जताना ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता नजर आ रहा है. अब देखना ये है कि ये बदलाव कब आता है.