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जज्बात वही हैं...तो क्यों बदल गया उन्हें कहने का तरीका? 80s-90s का म्यूजिक बयां करता था कहानी; आज बनकर रह गया सिर्फ Weekly Content

Changing Music Trends: कभी रेडियो पर कोई धुन बजती थी और घर के किसी कोने में बैठा इंसान अचानक अपने पुराने दिनों में लौट जाता था. 80s और 90s का संगीत सिर्फ सुनने की चीज नहीं था, वो महसूस करने का जरिया भी था. उन दिनों गाने रिलीज नहीं होते थे, यादों का हिस्सा बनते थे. फिर क्यों समय के साथ इस तरह के म्यूजिक का ट्रेंड बदल गया और आज ये सिर्फ एक या दो हफ्ते तक सीमित रहने वाला कंटेंट बन गया?

Written By Jyoti Rajput
Published: Sep 12, 2026, 08:23 AM IST | Updated: Sep 12, 2026, 09:06 AM IST
Image Credit: पुराने संगीत से कितना बदल गया आज का म्यूजिक?
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पुराने गीतों को लोग बार-बार सुनते थे, उनके बोल याद करते थे और कई बार अपनी जिंदगी की कहानी उन्हीं शब्दों में तलाश लेते थे. यही वजह है कि उस दौर का संगीत आज भी उम्र के कई पड़ाव पार कर चुके लोगों को एक पल में उनके बचपन, कॉलेज, पहली मोहब्बत या किसी पुराने रिश्ते तक पहुंचा देता है. आज आई लव यू कहना शायद कुछ सेकंड का काम हो, लेकिन 80s-90s के गीतों में प्रेम एक पूरा सफर हुआ करता था. मिलने की खुशी, नजरों की झिझक, चिट्ठियों का इंतजार, दूरियों की बेचैनी और बिछड़ने का दर्द, हर भावना के लिए गीतों के पास अपने शब्द होते थे. कलाकरों के बीच की खामोशी भी म्यूजिक में जगह पाती थी. शब्द कम होते थे, लेकिन उनके बीच छिपे अर्थ बहुत गहरे.

उस दौर के संगीत की खूबसूरती सिर्फ अच्छे बोलों में नहीं. गीतकार शब्दों से सीन बनाते थे, संगीतकार उन सीन्स में रंग भरते थे और गायक अपनी आवाज से उसमें जान डाल देते थे. एक अच्छे गीत में कविता भी होती थी और सिनेमा भी. संगीत सुनते हुए लगता था जैसे कोई कहानी आंखों के सामने चल रही हो. धुन को जगह मिलती थी, आवाज को सांस लेने की जगह मिलती थी और शब्दों को अपना असर छोड़ने का समय. आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ये ठहराव कम दिखाई देता है. अब कई बार गीत का पहला मतलब कहानी कहना नहीं, बल्कि कुछ ही सेकंड में ध्यान खींच लेना होता है.

कैसे पूरा गीत बन जाता है सिर्फ 'कंटेंट'?

स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया ने म्यूजिक को सुनने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. अब किसी गाने की पॉपुलैरिटी सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि लोग उसे कितनी बार पूरा सुन रहे हैं. ये भी मायने रखता है कि उसका कौन-सा हिस्सा रील में इस्तेमाल हो रहा है, कौन-सी लाइन वायरल हो रही है और कितने लोग उस पर वीडियो बना रहे हैं. ऐसे माहौल में गीत का एक छोटा-सा हिस्सा भी पूरे गाने से ज्यादा फेमस हो सकता है. म्यूजिक अब सिर्फ ऑडियो नहीं रहा, बल्कि वो कंटेंट की एक यूनिट बन गया है. रिलीज कैलेंडर, ट्रेंडिंग ऑडियो और वीकली कंटेंट की दौड़ में गानों को लगातार ऑडियंस के सामने बने रहना पड़ता है. यही वो जगह है जहां सवाल उठता है, क्या म्यूजिक कहानी कहने से ज्यादा अब एंगेजमेंट हासिल करने की कोशिश कर रहा है?

फीलिंग्स वही, अंदाज नया

ये कहना आसान होगा कि आज के गानों में जज्बात खत्म हो गए हैं. ऐसा बिल्कुल नहीं है. आज भी प्रेम है, दर्द है, अकेलापन है, दोस्ती है, टूटे रिश्ते हैं और जिंदगी की उलझनें हैं. फर्क शायद भावनाओं में नहीं, उनको प्रजेंटे करने का नया तरीके आ गया है. आज की ऑडियंस भी इमोशनल होती है, लेकिन उसके पास सुनने के लिए पहले की तुलना में हजारों ऑप्शन हैं. वो एक गाने से दूसरे गाने तक कुछ ही सेकंड में पहुंच सकते हैं. इसलिए म्यूजिक को भी इस तेज दुनिया के साथ बदलना पड़ा है. जहां पहले एक गाने को लोगों तक पहुंचने और दिल में उतरने का समय मिलता था, वहीं आज उसे कुछ सेकंड में अपनी पहचान बनानी पड़ती है.

 

इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट को मिली रफ्तार

डिजिटल बदलाव ने म्यूजिक की दुनिया को कई मायनों में बेहतर भी बनाया है. आज एक इंडिपेंडेंट आर्टिस्ट बिना किसी बड़े बैनर के अपना म्यूजिक दुनिया तक पहुंचा सकता है. रिकॉर्डिंग और प्रोडक्शन के साधन पहले की तुलना में कहीं आसानी से मिल जाती हैं. अलग-अलग लैंग्वेज और देशों का म्यूजिक एक ही प्लेटफॉर्म पर अवेलेबल है. लेकिन इसने कंपटीशन को काफी बढ़ा दिया है. हर हफ्ते नए गाने आते हैं और पुराने गाने जल्दी पीछे छूट जाते हैं. म्यूजिक अब सिर्फ एल्बम या फिल्म की रिलीज का इंतजार नहीं करता, वो लगातार नए कंटेंट की मांग के बीच खुद को साबित करता रहता है. शायद इसलिए आज के कलाकार के सामने चुनौती सिर्फ अच्छा गाना बनाने की नहीं, उसे भीड़ में सुनाई देने लायक बनाने की भी है.

तब यादें बनती थीं, आज ट्रेंड बनते हैं

80s-90s के दौर में किसी गाने की पॉपुलैरिटी धीरे-धीरे फैलती थी. रेडियो, कैसेट, टेलीविजन और लोगों की जुबान, यही उसके बड़े तरीके थे. कोई गाना महीनों और कभी-कभी सालों तक लोगों के साथ चलता रहता था. आज एक गाना कुछ दिनों में वायरल हो सकता है और उतनी ही तेजी से अगली ट्रेंडिंग धुन के पीछे छूट भी सकता है. यही ट्रेंड कल्चर म्यूजिक की उम्र को बदल रहा है. हालांकि, इसका दूसरा पहलू भी है. पुराने गाने आज भी नई जनरेशन तक पहुंच रहे हैं और कई बार सोशल मीडिया उन्हें फिर से पॉपुलर बना देता है. यानी म्यूजिक मरता नहीं, उसका मतलब बदलता है. एक पुराना गाना आज किसी रील के बैकग्राउंड में इस्तेमाल होकर एक बिल्कुल नई कहानी का हिस्सा बन सकता है.

पुराना बनाम नया

क्या हर पुराना गाना महान था और आज का हर गाना बेकार? बिल्कुल नहीं. पुराने दौर में भी बहुत-से ऐसे गाने थे, जो समय के साथ भुला दिया गया और आज भी ऐसे गीत बन रहे हैं जो सालों तक याद किए जाएंगे. फर्क शायद जनरेशन से ज्यादा उस संस्कृति का है जिसमें म्यूजिक बनाया और सुना जा रहा है. आज के कलाकार के पास नई टैक्निक, नई आवाजे और एक्सपेरिमेंट करने की कहीं ज्यादा आजादी है. सवाल ये नहीं होना चाहिए कि पुराना मूजिक बेहतर था या नया. सवाल ये है कि क्या हम आज भी ऐसे गानों के लिए जगह बना रहे हैं जो सिर्फ ट्रेंड होने के लिए नहीं, बल्कि किसी के जीवन का हिस्सा बनने के लिए बनाए जाएं? क्योंकि वायरल होना कुछ दिनों की अवेलेबिलिटी हो सकती है, लेकिन किसी की याद बन जाना म्यूजिक की असली सफलता है.

जज्बात आज भी वही हैं… बस उन्हें सुनने का समय कम

आखिरकार इंसान की भावनाएं बहुत नहीं बदली हैं. आज भी कोई पहली मोहब्बत में मुस्कुराता है, किसी के जाने पर टूटता है, किसी के इंतजार में रातें काटता है और किसी पुराने गानों को सुनकर अचानक सालों पीछे चला जाता है. बदला है तो बस समय का स्वभाव. पहले हम गीत सुनते थे, अब गीतों के बीच से गुजरते हैं. पहले किसी धुन को अपना बनाने में महीनों लगते थे, अब कुछ सेकंड में अगली धुन हमारे सामने होती है. शायद इसलिए समस्या म्यूजिक में कम और हमारी सुनने की आदत में ज्यादा है. 80s-90s के गाने हमें ये याद दिलाते हैं कि एक गाना सिर्फ वीकली कंटेंट नहीं, किसी की जिंदगी का साउंडट्रेक भी हो सकता है. जज्बात आज भी वही हैं, बस उन्हें कहने और सुनने के लिए हमें फिर से थोड़ा ठहरना होगा.

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About the Author

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
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