SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

किशोर कुमार का सीक्रेट दांव: जिसने रातों-रात बदल दी थी ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने की तकदीर; आज भी लाखों-करोड़ों लोगों का है फेवरेट

Kishore Kumar Death Anniversary: राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर फिल्म ‘आराधना’ के सभी गाने आज दशकों बाद भी लोगों के फेवरेट हैं और उनकी प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं, लेकिन उस फिल्म का सबसे ज्यादा सुना जाने वाला गाना ‘रूप तेरा मस्ताना’ है, जिसको किशोर कुमार ने अपनी आवाज दी थी और इसके पीछे एक बड़ा ही दिलचस्प किस्सा छिपा है.

Written By Vandana Saini
Published: Oct 13, 2026, 08:12 AM IST | Updated: Oct 13, 2026, 09:52 AM IST
Image Credit: किशोर कुमार के गाने ‘रूप तेरा मस्ताना’ के पीछे की असली कहानी
Join

हर साल 13 अक्टूबर का दिन संगीत प्रेमियों की आंखों को नम कर देता है और होठों पर पुराने नगमों की यादें लेकर आता है. साल 1987 में इसी तारीख को हर दिल अजीज सिंगर किशोर कुमार ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था. चार दशक से भी ज्यादा लंबे सफर में उन्होंने लगभग 2,900 से ज्यादा गानों को अपनी आवाज दी. उन्होंने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, मराठी, गुजराती, भोजपुरी और कन्नड़ समेत कई जुबानों में कई गाने गाए. उनके गाने आज भी नई पीढ़ी की जुबान पर उसी मिठास के साथ चढ़े हुए हैं.

किशोर दा सिर्फ एक शानदार सिंगर नहीं, बल्कि वे बेहतरीन एक्टर, कंपोजर, डायरेक्टर और एंटरटेनमेंट की चलती फिरती यूनिवर्सिटी थे. उनके गाए हजारों गानों के बीच साल 1969 में आई फिल्म ‘आराधना’ का सबसे फेमस रोमांटिक गाना ‘रूप तेरा मस्ताना’ बेहद खास जगह रखता है. इस गाने ने भारतीय सिनेमा में रोमांस की पूरी परिभाषा ही बदल दी थी. जब भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे बेहतरीन और असरदार रोमांटिक गानों की गिनती होती है, तो ये गाना सबसे ऊपर नजर आता है, लेकिन इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है.

बर्मन दा की धुन और किशोर दा का अनोखा सुझाव

लाखों-करोड़ों लोगों का फेवरेट ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाना आज जिस अंदाज में हमारे कानों में गूंजता है, शुरुआत में ये वैसा बिल्कुल नहीं था. इस गाने पर लीजेंडरी संगीतकार सचिन देव बर्मन यानी बर्मन दा अपने खास तरीके से काम कर रहे थे. बर्मन दा संगीत की दुनिया के माहिर खिलाड़ी थे और हमेशा कुछ नया लाने की तलाश में रहते थे. जब पहली बार रिकॉर्डिंग रूम में इस गाने की आउटलाइन तैयार हुई, तब वहां का माहौल काफी सीरियस था, लेकिन धुन में वो कशिश नहीं थी, जिसकी जरूरत पर्दे पर थी.

इस गाने से जुड़ा एक बड़ा ही मजेदार किस्सा सालों बाद किशोर दा के बेटे और मशहूर सिंगर अमित कुमार ने एक बातचीत के दौरान सुनाया था. उन्होंने बताया कि उनके पिता किशोर कुमार को लगा कि इस धुन में कुछ अलग हटकर जोड़ना चाहिए, ताकि ये बाकी गानों से बिल्कुल खास बने. किशोर दा ने बिना किसी हिचकिचाहट के बर्मन दा को अपनी एक बंगाली धुन इस्तेमाल करने की सलाह दी. उनका मानना था कि अगर इसमें बंगाली लोक संगीत और ताल का पुट मिला दिया जाए, तो इसका रंग-ढंग ही बदल जाएगा.

सचिन देव बर्मन नए एक्सपेरिमेंट का हमेशा वेलकम किया करते थे और उन्होंने किशोर दा के इस सुझाव को तुरंत परखने का फैसला किया. उन्होंने उस बंगाली धुन के हिस्से को ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने के ढांचे में पिरोया और चमत्कार हो गया. गाने की लय, ठहराव और उसका मिजाज एकदम बदल गया. ये सिर्फ एक सिंगर का काम नहीं था, बल्कि दो महान संगीतकारों की जुगलबंदी थी. इस तरह किशोर कुमार के उस एक छोटे से सुझाव ने आगे चलकर इस पूरे गाने की तकदीर और पहचान को एक नया आसमान दे दिया. 

कौन है वो बॉलीवुड का वर्सेटाइल एक्टर? जो 16 साल के करियर में कर चुका है 7 लोगों की बायोपिक; हर किरदार में फूंकी जान

सिर्फ सिंगर नहीं, बल्कि संगीत के गहरे पारखी थे किशोर

लोग किशोर कुमार को बस एक मस्तमौला सिंगर और चुलबुले एक्टर के तौर पर देखते आए हैं, लेकिन सच तो ये है कि वे संगीत की गहरी परख रखने वाले बड़े ही यूनिक आर्टिस्ट थे. वे गाने के तकनीकी पहलुओं, सुर, ताल और शब्दों में छिपे इमोशन को बहुत अच्छी तरह पहचानते थे और उनमें बदलाव करते थे. स्टूडियो में वे कभी सिर्फ कागज पर लिखे बोल गाने नहीं जाते थे. वे पूरे माहौल को समझकर गाने में ऐसा जादू भर देते थे कि बड़े-बड़े संगीतकार भी हैरान रह जाते थे.

किशोर दा जब भी रिकॉर्डिंग स्टूडियो में होते, तो गाने के साथ नए-नए एक्सपेरिमेंट जरूर करते थे. कभी वे किसी शब्द को लंबा खींचकर गाते, तो कभी अपनी आवाज में ऐसा जादू घोल देते कि रोंगटे खड़े हो जाएं. उनकी इसी खूबी के चलते बेहद सीधे-सादे बोल भी सदाबहार बन जाते थे. फिल्म ‘आराधना’ के गाने ‘रूप तेरा मस्ताना’ की रिकॉर्डिंग में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही कमाल दिखाया था. उन्होंने इस गाने को सिर्फ अपनी आवाज नहीं दी, बल्कि इसमें ऐसा असर भरा, जो सीधे दिल में उतर जाए.

किशोर कुमार का यही अंदाज ही उन्हें अपने दौर के दूसरे बड़े सिंगर्स से बिल्कुल अलग बनाता था. वे कभी संगीतकार के काम में रुकावट नहीं बनते थे, बल्कि उनकी सोच को अपनी आवाज से और बेहतर बना देते थे. बर्मन दा और किशोर दा के बीच आपसी तालमेल और भरोसा इतना गहरा था कि दोनों एक-दूसरे की बात को पूरा मान देते थे. फिल्म ‘अराधना’ का सदाबहार गाना ‘रूप तेरा मस्ताना’ इसका जीता-जागता सबूत है कि जब दो सच्चे फनकार दिल से जुड़ते हैं, तो इतिहास रच जाता है. 

परदे पर जादू और शर्मिला टैगोर के साथ शूटिंग की चुनौतियां

बताया जाता है कि जब ये गाना पूरी तरह रिकॉर्ड होकर तैयार हुआ, तब शायद किसी ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ये आने वाले कई दशकों तक रूमानी संगीत का सबसे बड़ा एग्जांपल बन जाएगा. फिल्म ‘आराधना’ में इस गाने को राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर पर बेहद नजाकत के साथ फिल्माया गया था. किशोर कुमार की मखमली और मदहोश कर देने वाली आवाज ने परदे पर जलती आग और बारिश के माहौल को ऐसा रूप दिया कि दर्शक सिनेमाघरों में पूरी तरह खो गए.

इस गाने की जबरदस्त कामयाबी ने फिल्म को तो सुपरहिट बनाया ही, साथ में राजेश खन्ना को भी रातों-रात बड़ा सुपरस्टार बना दिया. उस जमाने में पर्दे पर ऐसे रोमांटिक सीन इतनी सादगी और मर्यादा से पेश करना काफी मुश्किल माना जाता था. किशोर दा की मखमली आवाज ने इस गाने में ऐसी जान फूंकी कि बिना किसी तामझाम के सिर्फ सुरों के दम पर प्यार और बेचैनी का ऐसा मेल दिखा, जिसने देश भर के युवाओं को अपना दीवाना बना दिया, जिसका जादू आज भी बरकरार है.

इस गाने से जुड़ा एक और सच इसकी शूटिंग की मुश्किलों से जुड़ा हुआ है. पुरानी मीडिया रिपोर्ट्स और फिल्मी जानकारियों के मुताबकि उस समय शर्मिला टैगोर के पास वक्त की काफी कमी थी. उनके बहुत बिजी शेड्यूल के चलते डायरेक्टर शक्ति सामंत के पास शूटिंग पूरी करने के लिए बहुत कम समय था. पूरी टीम ने दिन-रात एक करके इस गाने को बहुत कम वक्त में कैमरे में कैद किया. लिमिटेड सोर्स और कम वक्त के बावजूद ये गाना बेहतरीन सिनेमैटिक हिस्ट्री का हिस्सा बन गया.

राजेश खन्ना और किशोर दा की जादुई जोड़ी का आगाज

‘रूप तेरा मस्ताना’ की जबरदस्त कामयाबी ने हिंदी सिनेमा के गलियारों में एक नए और सुनहरे दौर की शुरुआत कर दी. यही वो ऐतिहासिक मोड़ था, जब किशोर कुमार की आवाज पर्दे पर राजेश खन्ना की असली पहचान बनने लगी थी. काका की हर अदा, उनकी गर्दन का मटकना और उनकी मुस्कान किशोर दा की सिंगिंग के साथ ऐसे घुल-मिल गई जैसे दोनों एक-दूसरे के लिए ही बने हों. इस गाने ने उस दौर के संगीत प्रेमियों को एक नई ताजगी का अहसास कराया था.

आगे चलकर इस मैजिकल जोड़ी ने ‘मेरे सपनों की रानी’, ‘जिंदगी एक सफर है सुहाना’, ‘कुछ तो लोग कहेंगे’ और ‘ये शाम मस्तानी’ जैसे दर्जनों गाने दिए. फिल्मी एक्सपर्ट्स और म्यूजिक क्रिटिक्स आज भी मानते हैं कि राजेश खन्ना के परदे पर उभरते अनोखे अंदाज और किशोर कुमार की बेमिसाल आवाज का ये तालमेल भारतीय सिनेमा के इतिहास की सबसे कामयाब और असरदार जोड़ियों में से एक रहा है. इस लंबे और सुनहरे सफर की सबसे मजबूत नींव इसी गाने ने रखी थी.

इस गाने ने किशोर कुमार को उनका पहला फिल्मफेयर बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड भी दिलाया, जिसने उनके करियर को एक नई दिशा दे दी. फिल्म इंडस्ट्री ने माना कि किशोर सिर्फ हल्के-फुल्के या कॉमेडी सॉन्ग्स ही नहीं गाते, बल्कि सीरियस और डीप रोमांटिक गानों में भी भी उनका कोई सानी नहीं है. इस गाने की शानदार सक्सेस ने पुराने तौर-तरीके को पूरी तरह बदल दिया और किशोर कुमार हिंदी फिल्म जगत के सबसे बड़े और सबसे महंगे सिंगर बनकर उभरे.

अमर विरासत और कभी न भूलने वाला वो एक मशविरा

आज उनकी डेथ एनिवर्सरी पर पूरा देश उन्हें पूरे आदर के साथ याद कर रहा है. 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असली नाम आभास कुमार गांगुली था. वे एक पढ़े-लिखे बंगाली घराने से आते थे. करियर के शुरुआती दिनों में उनका मन सिर्फ एक्टिंग में लगता था, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उनकी सिंगिग ने उन्हें घर-घर में मशहूर कर दिया. 40 के दशक के आखिर में उन्होंने सिनेमा जगत में कदम रखा और देखते ही देखते प्लेबैक सिंगिंग के सबसे बड़े चेहरे बन गए.

रोमांटिक गाने हों, दर्द भरे तराने हों, मजेदार बोल या फिर जोश से भरे गाने, वे हर अंदाज को बड़ी आसानी से अपनी आवाज में ढाल लेते थे. उन्होंने 1946 से 1987 तक करीब 41 सालों तक अपने शानदार गानों से संगीत की दुनिया पर राज किया. सिंगर के तौर पर किशोर दा का सफर साल 1948 की फिल्म ‘जिद्दी’ के गानों से शुरू हुआ. उस दौर में वे अपने पसंदीदा फनकार के.एल. सहगल के अंदाज में गाने गाते थे. शुरुआत में उन्होंने एक्टिंग और सिंगिग दोनों में खूब पसीना बहाया, लेकिन 1969 में आई फिल्म ‘आराधना’ के गानों ने उन्हें रातोंरात बड़ा स्टार बना दिया.

70-80 के दशक में वे सिनेमा की सबसे चहेती आवाज बन गए. उन्होंने अपने पूरे करियर में 2,900 से ज्यादा गाने गाए, 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किए और 1985 में उन्हें ‘लता मंगेशकर पुरस्कार’ भी मिला. किशोर कुमार ने अपने जीवन में चार शादियां की थीं. उनकी पहली पत्नी रूमा घोष और दूसरी मशहूर अदाकारा मधुबाला थीं. इसके बाद उन्होंने योगिता बाली और फिर लीना चंदावरकर से ब्याह रचाया. उनके दो बेटे अमित कुमार और सुमित कुमार हैं. दमदार आवाज, चुलबुले अंदाज और योडलिंग के बादशाह का 13 अक्टूबर 1987 को देहांत हो गया. 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES