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विदेश में पढ़ाई करना आaज भी लाखों भारतीय छात्रों का सपना है, लेकिन अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ाई और रहने का खर्च कई छात्रों के बजट से बाहर हो जाता है. ऐसे में BRICS देश विदेशी शिक्षा के लिए एक वैकल्पिक रास्ता बनकर सामने आ रहे हैं. चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों में कई तरह के ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और प्रोफेशनल कोर्स उपलब्ध हैं, जहां कुछ मामलों में पश्चिमी देशों की तुलना में कम खर्च में पढ़ाई पूरी की जा सकती है.
BRICS समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ अब कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं. इन देशों में उच्च शिक्षा के लिए अलग-अलग विषयों और संस्थानों के विकल्प मौजूद हैं. खासकर चीन और रूस लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय छात्रों को आकर्षित करते रहे हैं. कम या अपेक्षाकृत किफायती ट्यूशन फीस, अलग-अलग स्कॉलरशिप और रहने के खर्च के विकल्प छात्रों के लिए इन्हें आकर्षक बना सकते हैं.
चीन में पढ़ाई का कितना फायदा?
चीन एशिया के बड़े उच्च शिक्षा केंद्रों में शामिल है. यहां इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, मैनेजमेंट, मेडिसिन, साइंस और अन्य विषयों में पढ़ाई के विकल्प मिलते हैं. कई विश्वविद्यालय अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अंग्रेजी माध्यम के प्रोग्राम भी चलाते हैं. कुछ संस्थानों में फीस पश्चिमी देशों के मुकाबले कम हो सकती है. इसके अलावा सरकार और विश्वविद्यालय स्तर पर मिलने वाली स्कॉलरशिप छात्रों के कुल खर्च को कम करने में मदद कर सकती है.
रूस में क्यों बढ़ रही छात्रों की दिलचस्पी?
रूस भी अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए लोकप्रिय शिक्षा गंतव्यों में शामिल है. यहां मेडिसिन, इंजीनियरिंग, साइंस और टेक्नोलॉजी से जुड़े कोर्स विशेष रूप से चर्चा में रहते हैं. रूस की कुछ यूनिवर्सिटीज में ट्यूशन फीस और रहने का खर्च अमेरिका या ब्रिटेन जैसे देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम हो सकता है. हालांकि किसी भी कोर्स में दाखिला लेने से पहले उसकी मान्यता, भाषा, फीस और भारत में डिग्री की स्वीकार्यता की जांच करना जरूरी है.
ब्राजील में क्या मिल सकते हैं विकल्प?
BRICS देशों में ब्राजील भी उच्च शिक्षा के लिए एक विकल्प है. देश की यूनिवर्सिटीज में सोशल साइंस, बिजनेस, इंजीनियरिंग, साइंस और अन्य क्षेत्रों में पढ़ाई के अवसर मिलते हैं. हालांकि ब्राजील में पढ़ाई की योजना बना रहे छात्रों को भाषा को लेकर विशेष तैयारी करनी पड़ सकती है, क्योंकि कई प्रोग्राम पुर्तगाली भाषा में होते हैं. इसलिए आवेदन से पहले यह देखना जरूरी है कि चुना गया कोर्स किस भाषा में संचालित किया जा रहा है.
क्या सिर्फ फीस देखकर करें फैसला?
विदेश में पढ़ाई का फैसला केवल ट्यूशन फीस देखकर नहीं करना चाहिए. छात्र को यूनिवर्सिटी की रैंकिंग और मान्यता, कोर्स की अवधि, हॉस्टल या किराये का खर्च, भोजन, स्वास्थ्य बीमा, वीजा, यात्रा और अन्य दैनिक खर्चों को भी बजट में शामिल करना चाहिए. इसके अलावा जिस देश में पढ़ाई करने जा रहे हैं, वहां की भाषा और स्थानीय नियमों को समझना भी जरूरी है.
भारतीय छात्रों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसी BRICS देश में दाखिला लेने से पहले भारतीय छात्रों को यह जरूर जांचना चाहिए कि संबंधित यूनिवर्सिटी और कोर्स भारत में मान्य है या नहीं. खासकर मेडिकल, लॉ, टीचिंग और अन्य रेगुलेटेड प्रोफेशनल कोर्स में संबंधित भारतीय नियामक संस्था के नियमों को देखना जरूरी है. एडमिशन के लिए यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट से जानकारी लेना और फीस या स्कॉलरशिप से जुड़े दावों को सत्यापित करना बेहतर रहेगा.
कम बजट में विदेश पढ़ाई का रास्ता?
अगर बजट सीमित है तो BRICS देशों को Study Abroad विकल्पों की सूची में शामिल किया जा सकता है. चीन, रूस और ब्राजील जैसे देशों में अलग-अलग विषयों के लिए संस्थान और प्रोग्राम उपलब्ध हैं. हालांकि हर छात्र के लिए सबसे सस्ता विकल्प एक जैसा नहीं होगा. फीस के साथ रहने का खर्च, स्कॉलरशिप, भाषा, डिग्री की मान्यता और भविष्य में करियर के अवसरों को मिलाकर फैसला करना ज्यादा जरूरी है. सही रिसर्च के साथ BRICS देशों में पढ़ाई उन छात्रों के लिए एक विकल्प बन सकती है जो कम बजट में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा हासिल करना चाहते हैं.