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US Midterm Election Results: अमेरिका में हो रहे मिडटर्म चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि किसके हाथ में सत्ता की कमान होगी और इसके साथ ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे के कार्यकाल की राह कैसी रहेगी. ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी या विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी में से किस पार्टी के पास अमेरिकी संसद का कंट्रोल होगा, इसके नतीजों की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है. इन नतीजों पर सिर्फ अमेरिकी नागरिकों की निगाहें नहीं हैं, बल्कि वहां पढ़ाई कर रहे और करियर का सपना देख रहे लाखों भारतीय छात्रों समेत आईटी प्रोफेशनल्स को भी नतीजों का बेसब्री से इंतजार है.
इस जनादेश के बाद ही ये स्पष्ट हो सकेगा कि वर्क परमिट, ग्रीन कार्ड बैकलॉग और स्टूडेंट वीजा नियमों में ढील मिलेगी या फिर नए प्रतिबंध लागू किए जाएंगे. आइए जानते हैं कि इस बार के चुनावी नतीजे H-1B वीजा धारकों, F-1 स्टूडेंट वीजा पर गए युवाओं और सालों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे भारतीयों के लिए क्या राहत या नई चुनौती लेकर आने वाले हैं.
IT क्षेत्र के भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए एच-1B वीजा सबसे जरूरी जरिया है. वर्तमान में हर साल 65,000 रेगुलर H-1B वीजा और अमेरिकी यूनिवर्सिटीज से उच्च शिक्षा लेने वालों के लिए 20,000 अतिरिक्त मास्टर कोटे वीजा का प्रावधान है. अमेरिकी संसद के पास ही इस प्रोग्राम से जुड़े कानूनों, सालाना सीमाओं और योग्यताओं के नियमों में बदलाव करने का अधिकार है.
अगर डेमोक्रैट्स संसद में मजबूत स्थिति में रहते हैं, तो वो वीजा नियमों को अधिक पारदर्शी बनाने और सख्त प्रतिबंधों पर लगाम लगाने के लिए विधायी कदम उठा सकते हैं. वहीं, अगर रिपब्लिकन्स का पलड़ा भारी रहता है, तो न्यूनतम वेतन सीमा बढ़ाने और H-1B स्पॉन्सरशिप की शर्तों को कड़ा करने वाले विधेयकों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है.

ध्यान रहे कि डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) का काम सिर्फ आवेदनों की प्रक्रिया और उनकी जांच करना है. ऐसे में, चुनाव कोई भी पार्टी जीते, इससे H-1B के मूल नियमों में अपने आप कोई बदलाव नहीं हो सकता. किसी भी बड़े बदलाव के लिए संसद से नया कानून पास होना जरूरी है, जो कि रातों-रात संभव नहीं होता.
अमेरिका में रह रहे भारतीयों के लिए मिडटर्म चुनाव के नतीजे बहुत खास अहमियत रखते हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड नियमों के तहत किसी भी एक देश के नागरिकों को 1 साल में कुल कोटे का 7% से ज्यादा वीजा नहीं मिल सकते. इस 'प्रति-देश सीमा' को हटाने से जुड़ा बिल लंबे समय से संसद में अटका हुआ है. अगर संसद में दोनों दलों के बीच इमिग्रेशन सुधारों पर सहमति बनती है, तो दशकों से ग्रीन कार्ड का इंतजार कर रहे लाखों भारतीयों के लिए बैकलॉग साफ होने का रास्ता आसान हो सकता है.

वहीं, अगर संसद में राजनीतिक खींचतान बढ़ती है, तो ये इमिग्रेशन बिल फिर से लटक सकते हैं, जिससे बैकलॉग में फंसे आवेदकों को अपनी परमानेंट रेजिडेंसी के लिए और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
हाल ही में DHS ने F-1 छात्रों के लिए दशकों पुराने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) की जगह एक निश्चित समय-सीमा वाला कड़ा नियम पेश किया है, जिसे 15 सितंबर 2026 से लागू कर दिया गया. इससे ये साफ हो गया है कि संसद में नया कानून पास हुए बिना भी अमेरिकी प्रशासन कार्यकारी आदेशों के जरिए छात्रों से जुड़े नियमों को कड़ा कर सकता है.

पढ़ाई पूरी करने के बाद मिलने वाले 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) वर्क परमिट की अवधि और शर्तों में नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं. हालांकि, अमेरिका में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स (STEM) क्षेत्र के प्रोफेशनल्स की भारी मांग है. यही वजह है कि वाशिंगटन में सत्ता का संतुलन किसी भी पार्टी के पास रहे, दोनों ही प्रमुख दल उच्च-कुशल STEM स्नातकों को अमेरिका में बनाए रखने का आमतौर पर समर्थन करते हैं.
जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में चल रहे मिडटर्म चुनाव के दौरान डेमोक्रेटिक पार्टी और रिपब्लिकन पार्टी के बीच तगड़ा मुकाबला हो रहा है. किसी भी समय नतीजों की घोषणा की जा सकती है.