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किसी परीक्षा में फेल होना अक्सर बच्चों के लिए ऐसा झटका बन जाता है, जिसके बाद उन्हें लगता है कि शायद वे पढ़ाई के लिए बने ही नहीं हैं. लेकिन जिंदगी हमेशा मार्कशीट के हिसाब से नहीं चलती. कभी एक खराब परीक्षा भविष्य की पूरी कहानी नहीं बताती. कभी जिस छात्र को एक विषय में नंबर कम आने पर डांट सुननी पड़ती है, वही आगे चलकर देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक पास कर लेता है.
IAS अधिकारी डॉ. अंजू शर्मा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. स्कूली दौर में असफलता मिली, लेकिन वहीं से उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका बदला. आगे BSc में गोल्ड मेडल हासिल किया और महज 22 साल की उम्र में पहले प्रयास में UPSC पास कर IAS बनीं.
अंजू शर्मा बात चित के दौरान बताती है कि उनका जन्म राजस्थान के भरतपुर में हुआ है. आगे वो बताती है कि पढ़ाई के शुरुआती वर्षों में उन्हें भी दूसरी छात्रों की तरह परीक्षा का दबाव झेलना पड़ा. 10वीं के प्री-बोर्ड में वह केमिस्ट्री में फेल हो गई थीं. यह उनके लिए इसलिए भी बड़ा झटका था क्योंकि परीक्षा से ठीक पहले तक पढ़ाई का बड़ा हिस्सा बाकी रह गया था. बाद में उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि परीक्षा के पहले पर्याप्त तैयारी नहीं होने के कारण तनाव बढ़ गया था. यानी समस्या क्षमता की नहीं, बल्कि तैयारी के तरीके की थी. यही बात आगे उनकी पढ़ाई की रणनीति बदलने का कारण बनी. उन्होंने आखिरी समय में पढ़ने के बजाय पहले से तैयारी करने का फैसला किया.
10वीं के अनुभव के बाद भी असफलता पूरी तरह खत्म नहीं हुई. 12वीं में अंजू शर्मा को इकोनॉमिक्स के पेपर में असफलता मिली. हालांकि वो बताती है कि और दूसरे विषयों में मेरा प्रदर्शन अच्छा है इसके साथ कई विषयों में उनको डिस्टिंक्शन भी हासिल की. 12वीं के इकोनॉमिक्स पेपर में फेल होना उनके लिए इमोशनल रूप से कठिन था. वो फिर बताती है कि मुझे इस बात का अफसोस हुआ कि लोग अक्सर सफलता के लिए तो तैयार करते हैं, लेकिन असफलता से निपटना नहीं सिखाते. इसी अनुभव से उन्होंने एक बड़ा सबक लिया. उन्होंने पढ़ाई को टालने और परीक्षा से ठीक पहले तैयारी करने की आदत छोड़ दी. आगे कॉलेज में उन्होंने इसी बदली हुई रणनीति को अपनाया.
अंजू शर्मा बताती हैं कि स्कूल में मिली असफलता के बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ने या खुद को कमजोर समझने के बजाय अपनी तैयारी का तरीका बदलने पर ध्यान दिया. वह आगे पढ़ाई के लिए जयपुर गईं और BSc की पढ़ाई की. यहां उन्होंने पहले की गलतियों से सीखते हुए परीक्षा की तैयारी समय से शुरू की. इसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने कॉलेज में गोल्ड मेडल हासिल किया. इसके बाद उन्होंने MBA किया और आगे UPSC की तैयारी शुरू की. वह मानती हैं कि स्कूल में हुई असफलताओं ने उन्हें एक जरूरी बात सिखाई कि परीक्षा के समय पढ़ने के बजाय पहले से तैयारी करना ज्यादा बेहतर है. यही सोच आगे उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बनी.
कॉलेज की पढ़ाई और MBA के बाद अंजू शर्मा ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की. अंजू शर्मा 1991 में 22 साल की उम्र में UPSC सिविल सेवा परीक्षा अपने पहले प्रयास में पास की और भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुईं. यहां उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यह है कि स्कूल में मिली असफलता और UPSC की सफलता के बीच उन्होंने अपनी तैयारी की आदत पूरी तरह बदल दी थी. उनका फोकस सिलेबस को समय रहते पूरा करने और परीक्षा से पहले पर्याप्त तैयारी करने पर रहा. UPSC की संवैधानिक स्थिति भी इस परीक्षा को खास बनाती है. संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत संघ और राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का प्रावधान है, जबकि अनुच्छेद 320 संघ लोक सेवा आयोग के परीक्षा आयोजित करने के कर्तव्यों को निर्धारित करता है.
UPSC पास करने के बाद अंजू शर्मा का प्रशासनिक करियर गुजरात कैडर में शुरू हुआ. वह 1991 बैच की गुजरात कैडर की IAS अधिकारी हैं और उनकी शुरुआती नियुक्ति राजकोट में असिस्टेंट कलेक्टर के रूप में हुई थी. इसके बाद उन्होंने प्रशासन के अलग-अलग स्तरों पर काम किया. उनका करियर केवल एक पद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ उन्होंने जिला और राज्य स्तर की जिम्मेदारियां संभालीं. उनके गांधीनगर समेत गुजरात के अलग-अलग प्रशासनिक दायित्वों का उल्लेख मिलता है. इस तरह स्कूल की असफलता से शुरू हुई कहानी धीरे-धीरे प्रशासनिक सेवा के लंबे करियर में बदल गई.
IAS बनने के बाद अंजू शर्मा ने गुजरात सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं. अलग-अलग समय में उन्होंने कलेक्टर, सचिव और प्रमुख सचिव स्तर की जिम्मेदारियां निभाईं. 2025 के गुजरात सरकार के बड़े प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें Additional Chief Secretary, General Administration Department (Personnel) बनाया गया था. बाद के 2026 के सरकारी आदेशों में भी उनके नाम के साथ इसी पद का उल्लेख मिलता है. अगस्त और सितंबर 2026 में जारी गुजरात सरकार से जुड़े प्रशासनिक आदेशों पर भी डॉ. अंजू शर्मा के हस्ताक्षर Additional Chief Secretary, General Administration Department (Personnel) के रूप में दर्ज हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान समय में उनकी भूमिका गुजरात सरकार के शीर्ष प्रशासनिक स्तरों में है.
अंजू शर्मा की कहानी को केवल मोटिवेशनल कहानी मानकर छोड़ देना सही नहीं होगा. उनकी सफलता जिस परीक्षा के जरिए हुई, वह देश की संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा है. भारतीय संविधान के भाग XIV में संघ और राज्यों के अधीन सेवाओं से जुड़े प्रावधान हैं. इसी हिस्से के अध्याय II में लोक सेवा आयोगों का प्रावधान किया गया है. अनुच्छेद 315 संघ के लिए Union Public Service Commission और राज्यों के लिए State Public Service Commissions का प्रावधान करता है. वहीं अनुच्छेद 320 के तहत लोक सेवा आयोगों का प्रमुख काम संबंधित सेवाओं में नियुक्तियों के लिए परीक्षाएं आयोजित करना और भर्ती, नियुक्ति तथा पदोन्नति से जुड़े मामलों में सलाह देना है. यानी UPSC सिर्फ एक सामान्य प्रतियोगी परीक्षा कराने वाली संस्था नहीं, बल्कि संविधान में निर्धारित भूमिका वाली संस्था है.