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यूपीएससी की तैयारी करने वाले लाखों उम्मीदवार हैं. इस लंबी कतार में कोई आईएएस बनने का सपना देखता है, तो कोई आईपीएस या आईएफएस. वहीं कुछ ऐसे भी हैं, जो सिर्फ एक सुरक्षित सरकारी नौकरी की चाह में इस कठिन परीक्षा में उतरते हैं. हर साल लाखों युवा सालों की कड़ी मेहनत के बाद इसमें शामिल होते हैं, लेकिन मनचाही सफलता कुछ ही किस्मत वालों को मिलती है. बाकी बड़े हिस्से के हाथ सिर्फ असफलता और लंबा इंतजार ही आता है.
इन्हीं में से एक है 25 साल का एक युवा, जिसने यूपीएससी के लिए अपनी बीटेक की नौकरी छोड़ दी थी, लेकिन अब वो एक बड़े दोराहे पर खड़ा है.'यूपीएससी या प्राइवेट नौकरी?' परिवार की बढ़ती जिम्मेदारियों और आर्थिक तंगी ने उसे सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब सपने के पीछे भागना सही है या फिर वापस कॉर्पोरेट वर्ल्ड में लौट जाना ही समझदारी है.
यूपीएससी सक्सेस स्टोरी में सुना होगा कि किसी डॉक्टर ने डॉक्टरी छोड़ी, किसी ने इंजीनियरिंग छोड़ी तो किसी ने कोई अन्य क्षेत्र की नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी शुरू की और उसमें उन्हें सफलता भी मिल गई. कुछ ऐसी ही कहानी ये एक 25 साल के यूपीएससी एस्पिरेंट की है, जो सफलता हासिल करने से पहले जिंदगी के उस मोड़ पर आ खड़ा है जहां रास्ता एक ही नजर आ रहा है और वो है कोई नौकरी पकड़ लेना.
दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक रेडिट यूजर की ओर से अपनी कहानी बताई गई जिसमें उसकी हालत को जानकर कई यूजर भावुक भी हुए. पैसों की तंगी ने उस शख्स के लिए समस्या खड़ी कर दी है और वो अपने करियर को खत्म होता महसूस कर रहे हैं.
कंप्यूटर साइंस से बीटेक कोर्स करने के बाद साल 2022 में उसे बीटेक की डिग्री हासिल हुई थी. इसके बाद कुछ समय तक ग्रेजुएट इंजीनियरिंग ट्रेनी के रूप में काम भी किया था मगर सपना यूपीएससी की सिविल सर्विस में जाने का था. इसलिए उसने नौकरी को छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का सोचा. हालांकि, कुछ महीनों में पूरी जिंदगी बदल गई और कांधों पर जिम्मेदारियां आ गई.

यूपीएससी की तैयारी के बीच उन्हें तब बड़ा झटका लगा जब परिवार के सबसे बड़े सहारे यानी उनके पिता का निधन हो गया. इसके साथ ही उनके कंधों पर जिम्मेदारी आ गई और कुछ समय के बाद उनके दादा जी का भी निधन हो गया. इसके अलावा पार्किंसंस बीमारी से परेशान दादी की भी देखभाल की जिम्मेदारी उन पर आ गई. बहन की शादी भी करवानी और इस बीच करियर को लेकर सोचना भी एक अलग ही तनाव बना हुआ था.
रेडिट यूजर ने बताया कि आय के नाम पर उनकी दादी की पेंशन के पैसे हैं और नौकरी की तलाश में वो नोएडा में आ गए थे, लेकिन अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली है और ना ही उन्होंने हार मानी है. उन्होंने लोगों से सुझाव मांगा कि क्या प्राइवेट नौकरी करना सही रहेगा. क्या अब यूपीएससी की तैयारी करना छोड़ देना चाहिए. साल 2023 में नौकरी छोड़ देने के बाद से वो यूपीएससी की तैयारी में जुटे हुए लेकिन कई साल बाद भी सफलता हाथ नहीं लगी है.
यूपीएससी की तैयारी को लेकर अगर आपका भी ये सवाल है कि आखिर कब तक इस परीक्षा के लिए तैयारी करनी चाहिए तो इसका जवाब सीधा ये है कि एक से दो बार से ज्यादा नहीं. दरअसल, PM मोदी की आर्थिक सलहाकार परिषद (EAC-PM) के सदस्य संजीव सान्याल ने एक बार राय देते हुए कहा था कि यूपीएससी परीक्षा देना एक-दो बार ठीक है, लेकिन दूसरे रास्तों के बारे में भी जरूर सोच लेना चाहिए.
Many people are discussing my recent comments on the unhealthy craze for the UPSC exam, so reposting my podcast on The Neon Show where I discuss the "poverty of aspiration" problem more generally, the manipulation by foreign NGOs & the decline of Kolkata: https://t.co/esNoGEWKNv
— Sanjeev Sanyal (@sanjeevsanyal) March 26, 2024
इस एग्जाम की तैयारी में अपने 5 से 8 साल को लगा देना सही नहीं है. ये सिर्फ और 'यूथ एनर्जी की बर्बादी' है. ऐसे में साफ है कि अगर तैयारी के बाद भी कामयाबी नहीं मिल रही है तो समझदारी इसमें है कि कोई दूसरा ऑप्शन चुन लें.