Success Story: पढ़े, लड़े और अब साथ संभालेंगे खाकी वर्दी: 5 बचपन के दोस्तों ने क्रैक किया पुलिस एग्जाम
Success Story of Five Childhood Friends: दोस्ती की अनोखी मिसाल पेश करते हुए 5 बचपन के यारों ने एक साथ उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती परीक्षा पास कर ली है. बचपन में साथ पढ़ाई करने से लेकर एक साथ खाकी वर्दी पहनने का सपना पूरा करने तक, इन 5 दोस्तों की इस शानदार सफलता पर पूरा गांव गर्व कर रहा है.
Success Story of Five Childhood Friends: कहते हैं सच्ची दोस्ती वही होती है जिसमें कोई लालच, ईर्ष्या या भेदभाव की दीवार न हो. ऐसी ही बेमिसाल दोस्ती का एक अनोखा उदाहरण उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से सामने आया है, जहां 5 बचपन के दोस्तों ने एक साथ सफलता हासिल कर दोस्ती की नई मिसाल कायम की है. जिन दोस्तों ने कभी खेल-कूद के साथ अपना बचपन बिताया था, वो आज साथ पढ़-लिखकर पुलिस परीक्षा में भी एक साथ सफल हुए हैं. यूपी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा को एक साथ क्रैक कर इन पांचों दोस्तों ने मानो इतिहास रच दिया है.
बचपन में साथ खेलने, एक ही स्कूल में साथ पढ़ने और भर्ती की तैयारी के दौरान दिन-रात एक करने वाले इन दोस्तों की संयुक्त मेहनत रंग लाई है. जल्द ही ये पांचों जिगरी यार एक साथ खाकी वर्दी पहनकर प्रदेश और देश की सेवा में अपना योगदान देते नजर आएंगे.
कौन हैं ये 5 जांबाज
ये प्रेरणादायक कहानी उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में हरैया क्षेत्र के दुबौलिया ब्लॉक स्थित नंदेकुआं गांव की है. इस गांव के पांच होनहार युवाओं का चयन यूपी पुलिस में कांस्टेबल के पद पर हुआ है. गांव समेत चयनित उम्मीदवारों के परिवार में खुशी की लहर है. चयनित हुए पांचों दोस्तों के नाम अंकेश सत्यम दुबे, आदर्श द्विवेदी, दीपक दुबे, आदित्यनाथ दुबे और रोहित प्रजापति है.
अलग-अलग स्कूल से 12वीं, सफलता एक साथ
बस्ती के इन पांचों दोस्तों ने अलग-अलग स्कूलों से अपनी इंटरमीडिएट (12वीं) की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद सभी ने एक साथ मिलकर सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी. पांचों दोस्तों का सपना जनसेवा के क्षेत्र में करियर बनाने का था. सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद, उन्होंने एक मजबूत रणनीति बनाई और आखिरकार अपना साझा लक्ष्य हासिल कर दिखाया.
'ग्रुप स्टडी' बनी पांचों दोस्तों की ताकत
पांचों दोस्तों के लिए सफलता हासिल करने का सफर आसान नहीं था, उन्होंने आर्थिक तंगी और कम संसाधनों के बीच कामयाबी हासिल की. एक दूसरे का हाथ थामते हुए, पांचों दोस्त ने ग्रुप स्टडी की. रोजाना नियमित रूप से साथ बैठकर पढ़ाई करते थे और जिस सब्जेक्ट में कमजोर या कोई डाउट होता तो आपस में मिलकर उसे समझने की कोशिश करते थे.
पांचों दोस्तों में से एक अंकेश सत्यम दुबे ने पढ़ाई का खर्च खुद उठाया. गांव के पास स्थित एक प्राइवेट स्कूल में उन्होंने पढ़ाया. इसके अलावा एक दोस्त, आदर्श ने घर में बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर फीस का खर्च निकाला. पांचों दोस्तों ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर भी परिवार वालों पर बोझ न डाले बिना अपनी तैयारी को जारी रखा.