NEET UG 2026: काउंसलिंग के आखिरी राउंड के बाद भी क्यों खाली रह गईं 800+ MBBS सीटें? समझें इसकी 3 बड़ी वजहें
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी द्वारा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मेडिकल की कुल खाली सीटों की लिस्ट जारी की गई है. नीट यूजी काउंसलिंग का स्टे वैकेंसी राउंड के बाद भी 800 से ज्यादा सीटें खाली होने की क्या वजह हो सकती है, आइए जानते हैं.
NEET UG 2026: नीट यूजी काउंसलिंग का स्टे वैकेंसी राउंड खत्म होने के बाद भी देशभर के मेडिकल कॉलेजों में 800 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं. एक तरफ जहां डॉक्टर बनने के लिए छात्र सालों-साल कड़ी मेहनत करते हैं, वहीं काउंसलिंग के आखिरी चरण के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में सीटों का खाली रह जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है. कॉलेज-वाइज जारी आंकड़ों के मुताबिक, अकेले तमिलनाडु, पुडुचेरी और कर्नाटक के डीम्ड और प्राइवेट संस्थानों में दर्जनों सीटें बिना दाखिले के रह गई हैं. आखिर फाइनल राउंड के बाद भी अभ्यर्थियों ने एडमिशन क्यों नहीं लिया? आइए इसके पीछे की 3 सबसे बड़ी वजहें समझते हैं.
कुस 837 एमबीबीएस सीटें खाली
मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) ने नीट यूजी 2026 के स्टे वैकेंसी राउंड के आधिकारिक खाली सीटों और अलॉटमेंट के रिकॉर्ड वेबसाइट पर साझा कर दिया है. इसके अनुसार कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी में कुल 837 सीटें खाली हैं, जिनमें डीम्ड मेडिकल कॉलेजों की 824 सीटें खाली हैं और एम्स मदुरई की 1 सीट खाली है. इसके अलावा कर्नाटक के चेट्टिनाड हॉस्पिटल और रिसर्च इंस्टीट्यूट में कुल 12 सीटें खाली हैं.
चार कॉलेजों में 350 से ज्यादा सीटें खाली
एमसीसी के आधिकारिक पोर्टल के अनुसार सबसे ज्यादा सीटें कुछ चुनिंदा कॉलेज में खाली हैं जिनमें श्री सत्य साईं मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में 188 सीटें, मीनाक्षी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में 117 सीटें, महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में 92 सीटें, श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 82 सीटें शामिल हैं.
सीटें खाली रहने के पीछे की 3 सबसे बड़ी वजहें क्या हैं?
1. डीम्ड यूनिवर्सिटीज की भारी-भरकम फीस:- फाइनल राउंड के बाद भी मेडिकल सीटें खाली रहने के पीछे की खास वजह प्राइवेट और डीम्ड विश्वविद्यालयों की हद से ज्यादा फीस है. कई ऐसे डीम्ड मेडिकल कॉलेज हैं जहां पर सालाना ट्यूशन फीस ही 21 लाख से 35 लाख रुपये तक है. इसके अलावा छात्रों के लिए हॉस्टल, मेस और अन्य खर्चे भी शामिल कर दिए जाते हैं जिससे उनके लिए सालाना मेडिकल की पढ़ाई का खर्च हद पार हो सकता है. ऐसे में आम और मध्यमवर्गीय परिवारों के छात्रों के लिए इन सीटों का लाभ उठाना संभव नहीं हो पाता है. ये ही कारण है कि कई छात्र यहां पर सीटें मिलने के बावजूद भी एडमिशन नहीं लेते हैं.
2. स्टे वैकेंसी राउंड के कड़े नियम और सिक्यॉरिटी डिपॉजिट का जोखिम:- काउंसलिंग के आखिरी चरणों में भाग लेने के लिए छात्रों को भारी-भरकम सिक्यॉरिटी डिपॉजिट जमा करनी होती है. अगर एक बार सीट अलॉट होने के बाद छात्र एडमिशन नहीं लेता है, तो उसकी डिपॉजिट राशि जब्त कर ली जाती है और उसे आगे की काउंसलिंग प्रक्रिया से भी बाहर कर दिया जाता है. इस फाइनेंशियल और प्रक्रियात्मक जोखिम के डर से कई छात्र सीट के लिए आवेदन करते नहीं है.
3. भौगोलिक सीमाएं और अनिवार्य सर्विस बॉन्ड:- इतनी सीटें रहने की एक वजह ये भी कि जिन मेडिकल कॉलेजों में सीटें खाली रह गई हैं वहां कि अपनी एक संस्कृति और भाषा है. वहीं, कई छात्र अपने गृह राज्य से दूर दूसरे राज्यों या कॉलेज में जाना नहीं चाहते हैं, क्योंकि उनके लिए दूसरी भाषा को समझना या अपनाना मुश्किल हो सकती है.
क्या होगी कोई स्पेशल काउंसलिंग?
नीट यूजी काउंसलिंग के स्टे वैकेंसी राउंड के बाद 800 से ज्यादा सीटें खाली रहने के कारण अब छात्र और अभिभावक भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या मेडिकल काउंसलिंग कमेटी की ओर से कोई स्पेशल स्ट्रे वैकेंसी राउंड का आयोजन किया जाएगा या फिर नहीं. हालांकि, पिछले सालों के ट्रेंड के अनुसार स्टे वैकेंसी राउंड के बाद कोई नया राउंड जारी नहीं किया जाएगा और अभी तक इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन छात्रों को सलाह दी जाती है कि वो आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें.
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