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Nalanda Medical College Ragging Case: नालंदा नाम सुनते ही भारत के एक विश्व प्रसिद्ध और दुनिया के पहले आवासीय विश्वविद्यालय का जिक्र होना आम बात है, लेकिन आज ये शहर मेडिकल छात्रों द्वारा की गई रैगिंग के कारण चर्चाओं में है. नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) में देर रात लड़कियों को छत पर बुलाकर और फिर उनके साथ रैगिंग करने का मामला सामने आया है. हॉस्टल की छत और जूनियर छात्राओं की चीख-पुकार की वो रात उन पीड़ित छात्राओं के लिए शायद कभी न भूलने वाली होगी, लेकिन इस पर NMCH प्रशासन ने भी अपनी सख्ती दिखाते हुए बड़ा एक्शन लिया है.
एनएमसीएच प्रशासन ने रैगिंग मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना किसी नरमी के पूरे 2025 बैच पर सख्त कार्रवाई की है. कॉलेज ने 149 MBBS छात्र और छात्राओं को 3 महीने के लिए निलंबित कर दिया है. इस ऐतिहासिक और कड़े एक्शन के साथ ही कॉलेज प्रशासन ने मामले में संलिप्तता की जांच के लिए 2023 और 2024 बैच के छात्रों को भी कारण बताओ नोटिस थमा दिया है.
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और बिहार सरकार के लोक शिकायत विभाग ने नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से तब जवाब मांगा जब उनके पास रूलबुक 2026 और रैगिंग की शिकायत आई. इसके बाद एंटी रैगिंग कमेटी की बैठक की गई और डॉ. उषा कुमारी की अध्यक्षता में 2023 से 2026 बैच के छात्र और छात्राओं से लगभग 3 घंटे तक पूछताछ की गई, जिसके बाद बैच 2025 के स्टूडेंट्स का नाम सामने आया और उन्हें 3 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया गया. अभी 2023 और 2024 बैच को कॉलेज प्रशासन की ओर से सिर्फ नोटिस जारी किया गया है.
स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक नालंदा मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आधी रात को जूनियर छात्राओं को छत पर बुलाया गया और फिर उनके साथ रैगिंग की गई. ये सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने सिर्फ 2025 बैच को नहीं, बल्कि साल 2023 और 2024 बैच के सीनियर छात्रों पर भी अपना शिकंजा कसा है. दोनों बैचों को अगले आदेश तक सस्पेंड करने के साथ 24 घंटे के अंदर हॉस्टल खाली करने का सख्त निर्देश दिया गया है.
कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. उषा कुमारी की ओर से ये पुष्टि की जा चुकी है कि जूनियर छात्राओं के साथ सीनियर छात्रों द्वारा रैगिंग की बात सही है. वहीं, पीड़ित छात्राओं ने भी हिम्मत के साथ नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), बिहार ग्रीवांस सेल और ऑल इंडिया एंटी-रैगिंग कमेटी से सीधी शिकायत की थी. वहीं, राष्ट्रीय स्तर पर शिकायत दर्ज होते ही कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और तुरंत दोषी छात्रों को सस्पेंड करने का फैसला लिया.
एक वक्त था जब कॉलेज में दाखिले के बाद हर नए छात्र के मन में रैगिंग का एक अलग ही डर हुआ करता था, लेकिन समय के साथ इसके खिलाफ कानूनी शिकंजा कसता गया. आज देश में कानूनी व्यवस्था से लेकर शिक्षण संस्थानों तक रैगिंग को लेकर 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाती है.
साल 2001 और 2009 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी आए थे जिसमें देश में रैगिंग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करते हुए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को सख्त निगरानी रखने, परिसरों में एंटी-रैगिंग स्क्वॉड और कमेटियां गठित करने के कड़े निर्देश दिए थे. अगर यूजीसी रेगुलेशन्स की बात करें तो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों में रैगिंग को लेकर ये साफ कहा गया है कि सिर्फ शारीरिक प्रताड़ना नहीं, बल्कि मानसिक उत्पीड़न, अपमानजनक हरकतें या किसी भी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध काम करने के लिए मजबूर करना भी रैगिंग का हिस्सा है और इसमें पाए गए दोषी के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जा सकती है.
नियमों के तहत दोषी पाए जाने वाले छात्रों का सस्पेंड, हॉस्टल से निकालना और स्कॉलरशिप रोके जाने जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है. वहीं, मामला गंभीर होने पर आरोपियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जा सकती है. इसके अलावा, नए कानूनों यानी भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक कार्रवाई, भारी जुर्माना और जेल तक के कड़े प्रावधान शामिल हैं.