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JEE में असफल कई छात्रों के लिए बड़ा झटका होती है, लेकिन अर्जुन जैन की कहानी इसके अलग उदाहरण पेश करती है. उन्होंने दो साल JEE की तैयारी की, लेकिन परीक्षा में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके. इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने एक और साल कोटा में तैयारी करने के बजाय बेंगलुरु के RV कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में कंप्यूटर साइंस में सैंपल लिया.
RV कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जैन ने कंप्यूटर साइंस को सिर्फ पाठ्यक्रम तक लिमिटेड नहीं रखा. उन्होंने IEEE के रिसर्च पेपर पढ़ना शुरू किया और खुद से इस क्षेत्र को समझाना शुरू किया. उन्होंने हॉस्टल से JEE की एक और कोशिश की और 3,363 रैंक हासिल की. इसके बाद उन्हें IIT-BHU में पेट्रोकेमिकल इंजीनियरिंग की सीट मिली, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
IIT-BHU की सीट क्यों छोड़ दी?
जैन पहले ही कंप्यूटर साइंस में एक साल पूरा कर चुके थे. ऐसे में अपनी पसंद के क्षेत्र को छोड़कर दूसरी इंजीनियरिंग ब्रांच में दोबारा शुरुआत करने का मतलब अतिरिक्त समय और फीस था. उन्होंने RV कॉलेज से ही कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई पूरी करने का फैसला किया. यही फैसला आगे उनके AI रिसर्च करियर की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हुआ.
AI रिसर्च में पहचान कैसे बनाएं?
इसके बाद जैन ने सारलैंड यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में PhD की और summa cum laude के साथ डिग्री पूरी की. बाद में उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के Courant Institute में पोस्टडॉक्टरल रिसर्च की. यहां उन्होंने Yann LeCun और Chris Bregler सहित अन्य रिसर्चर्स के साथ Deep Learning और Human Pose Estimation पर काम किया. उनकी रिसर्च ICLR, NeurIPS और CVPR जैसे प्रमुख सम्मेलनों तक पहुंची.
Apple के Project Titan तक कैसे पहुंचे?
रिसर्च के साथ जैन ने इंडस्ट्री में भी काम किया. उनकी रिसर्च से जुड़ी टेक्नोलॉजी के आधार पर Perceptive Code नाम का वेंचर सामने आया, जिसकी Intellectual Property बाद में Mercedes ने हासिल की. 2015 में उन्होंने Apple के Project Titan में सीनियर रिसर्चर के तौर पर काम किया और कंप्यूटर विजन तथा सेंसिंग सिस्टम पर रिसर्च की.
IIT Bombay ने कब बुलाया?
करीब 14 साल बाद, 2016 में जैन IIT Bombay में असिस्टेंट प्रोफेसर बने. यानी जिस JEE परीक्षा में वह कभी असफल हुए थे, उसी परीक्षा को पास करने वाले छात्रों को वह आगे चलकर पढ़ाने लगे. IIT Bombay में उन्होंने कंप्यूटर विजन पढ़ाया और PhD छात्रों को भी मार्गदर्शन दिया.
इस कहानी से छात्रों को क्या सीख मिलती है?
जैन की कहानी बताती है कि किसी प्रवेश परीक्षा का परिणाम करियर की पूरी दिशा तय नहीं करता. JEE एक कॉलेज या कोर्स में दाखिले का रास्ता खोल सकता है, लेकिन आगे की सफलता मेहनत, लगातार सीखने और गलतियों से सबक लेने पर निर्भर करती है. यह कहानी जैन की LinkedIn पोस्ट पर आधारित है और इसमें बताए गए व्यक्तिगत करियर से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है.