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कॉलेज की पढ़ाई के दौरान स्टूडेंट्स को अक्सर इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप करने की सलाह दी जाती है. दोनों में स्टूडेंट्स को किसी कंपनी या संस्था के साथ काम करने और असल काम का अनुभव हासिल करने का मौका मिलता है. यही वजह है कि कई स्टूडेंट इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप को एक ही समझ लेते हैं. हालांकि, दोनों का उद्देश्य, अवधि, ट्रेनिंग का तरीका और काम की जिम्मेदारियां अलग हो सकती हैं. ऐसे में स्टूडेंट के लिए यह जरूरी है कि इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप में क्या अंतर है और करियर के कोर्स से दोनों में क्या फायदे मिल सकते हैं.
इंटर्नशिप आमतौर पर पढ़ाई के दौरान किया जाने वाला प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस होता है. इसमें स्टूडेंट किसी कंपनी, संस्थान, प्रदूषण या संगठन के साथ सीमित अवधि के लिए काम करता है. इसका मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट को किताबों में पढ़ी चीजों को असल काम में समझने का मौका देना होता है.
इंटर्नशिप कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक हो सकती है. यह पेड या अनपेड दोनों तरह की हो सकती है. उदाहरण के लिए जर्नलिज्म का स्टूडेंट किसी न्यूज ऑर्गनाइजेशन में इंटर्नशिप करके रिपोर्टिंग, रिसर्च, राइटिंग और एडिटिंग का एक्सपीरियंस ले सकता है. इसी तरह इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट का स्टूडेंट अपनी फील्ड से जुड़ी कंपनी में काम सीख सकता है.
अप्रेंटिसशिप क्या होती है?
अप्रेंटिसशिप में स्टूडेंट या कैंडिडेट किसी खास जॉब रोल या ट्रेड में व्यवस्थित तरीके से ट्रेनिंग लेता है. इसमें केवल काम देखना ही नहीं, बल्कि किसी अनुभवी व्यक्ति या संस्था के गाइडेंस में काम करते हुए स्किल डेवलप करना महत्वपूर्ण होता है.
अप्रेंटिसशिप की अवधि अक्सर इंटर्नशिप से ज्यादा हो सकती है. इसमें ट्रेनिंग के साथ रियल वर्कप्लेस एक्सपीरियंस मिलता है. कई अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम में कैंडिडेट को स्टाइपेंड भी दिया जाता है. इसका मकसद कैंडिडेट को किसी काम के लिए ज्यादा जॉब-रेडी बनाना होता है.
इंटर्नशिप और अप्रेंटिसशिप में क्या अंतर है?
दोनों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनके मकसद और ट्रेनिंग स्ट्रक्चर का है. इंटर्नशिप का फोकस मुख्य रूप से एक्सपोजर और एक्सपीरियंस पर होता है, जबकि अप्रेंटिसशिप में स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट पर ज्यादा जोर दिया जाता है.
इंटर्नशिप में स्टूडेंट किसी प्रोफेशनल माहौल को जानता है और अपनी पढ़ाई से जुड़ा अनुभव हासिल करता है. अप्रेंटिसशिप में कैंडिडेट किसी खास काम या जॉब रोल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग ज्यादा गहराई से ले सकता है.
स्टूडेंट को इंटर्नशिप से क्या फायदा मिलता है?
इंटर्नशिप करने से स्टूडेंट्स को वर्कप्लेस का एक्सपीरियंस मिलता है. उन्हें पता चलता है कि उनकी पढ़ाई का इस्तेमाल असल काम में कैसे होता है. इससे कम्युनिकेशन, टीमवर्क, टाइम मैनेजमेंट और प्रोफेशनल स्किल्स डेवलप करने में मदद मिल सकती है.
इसके अलावा इंटर्नशिप रिज्यूमे को मजबूत कर सकती है. कॉलेज खत्म होने के बाद नौकरी के लिए अप्लाई करते समय कैंडिडेट अपने प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस को भी दिखा सकता है. इंटर्नशिप के दौरान प्रोफेशनल कॉन्टैक्ट्स और नेटवर्किंग बनाने का मौका भी मिल सकता है.
अप्रेंटिसशिप से क्या फायदा मिलता है?
अप्रेंटिसशिप का फायदा खास तौर पर उन छात्रों और युवाओं को मिल सकता है जो किसी खास स्किल या जॉब रोल में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग चाहते हैं. इसमें वर्कप्लेस पर काम करते हुए सीखने का मौका मिलता है.
अप्रेंटिसशिप के दौरान मिलने वाला स्टाइपेंड भी एक फायदा हो सकता है. इसके अलावा उम्मीदवारों को इंडस्ट्री के काम करने के तरीके, सेफ्टी रूल्स, टूल्स और प्रोफेशनल स्टैंडर्ड्स को करीब से समझने का मौका मिलता है.
स्टूडेंट को क्या बोलना चाहिए?
यह पूरी तरह स्टूडेंट के करियर गोल पर निर्भर करता है. अगर कोई स्टूडेंट पढ़ाई के दौरान अपने फील्ड का एक्सपीरियंस लेना चाहता है और अलग-अलग कामों को समझना चाहता है, तो इंटर्नशिप काम की हो सकती है. वहीं, अगर स्टूडेंट किसी खास स्किल या जॉब रोल में स्ट्रक्चर्ड प्रैक्टिकल ट्रेनिंग चाहता है, तो अप्रेंटिसशिप उसके लिए ज्यादा सही हो सकती है.
सबसे जरूरी बात यह है कि स्टूडेंट सिर्फ सर्टिफिकेट के लिए इंटर्नशिप या अप्रेंटिसशिप न करें. आवेदन करने से पहले प्रोग्राम की अवधि, काम की जिम्मेदारी, ट्रेनिंग स्ट्रक्चर, स्टाइपेंड, संस्था की जिम्मेदारी और आगे मिलने वाले मौकों की जानकारी जरूर लें.