कल्पना चावला से प्रेरित होकर देखा स्पेस का सपना, अब नासा के बड़े मिशन को लीड कर रही हैं भारत की बेटी डॉ. राम्या
Dr Ramya Manjunath Success Story: एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी डॉ. राम्या मंजूनाथ आंचे की कहानी उन लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल है, जो सीमित साधनों में भी बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं.
Dr Ramya Manjunath Success Story: बचपन में जब डॉ. राम्या मंजूनाथ, चांद-तारों को देखा करती थीं, तब उनके मन में एक सवाल ये आया करता था कि इनके पीछे की दुनिया कैसी होगी और कैसे तारे जन्म लिया करते हैं. कई सारे सवाल अक्सर उनके दिमाग में उस वक्त आया करते थे, जब वो अंधेरी रात में आसमान को देखा करती थी. जैसे-जैसे बढ़ी होती रही उनको भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला से प्रेरणा मिली और उन्होंने स्पेस की दुनिया में कदम रखने का फैसला लिया.
बचपन का सपना पूरा करने के लिए उन्हें कड़ी मेहनत की, जिसका नतीजा ये है कि आज वो एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं. भारत के कर्नाटक के देवनहल्ली की रहने वाली राम्या ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद दुनिया भर के लोगों के बीच एक पहचान बना ली है.
NASA के पफिन्स मिशन की संभालेंगी कमान
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा में डॉ. राम्या को बड़ी जिम्मेदारी संभालने के लिए मिली है. करीब 180 करोड़ रुपये के 'पफिन्स' मिशन की कमान संभालने की जिम्मेदारी दी गई है. उन्हें इस मिशन का मुख्य वैज्ञानिक नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का मान भी बढ़ाया है.
भारत में पढ़ाई, फिर अमेरिका-चीन में शोध
राम्या के लिए नासा तक का सफर तय करना आसान नहीं था, यहां तक आने के लिए उन्होंने बड़ी चुनौतियों का सामना किया है. कई तरह की मुश्किलें सामने आई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. डॉ. राम्या ने अपनी पढ़ाई-लिखाई भारत से पूरी की और उसके बाद शोध के लिए वो विदेश गईं. अमेरिका और चीन में शोध कर अनुभव हासिल किया. बेहतरीन अनुभव के साथ उन्होंने वैज्ञानिक समझ को अधिक गहरा किया. ये ही नतीजा है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय में अपनी एक अलग जगह बनाई और आज नासा के मिशन में मुख्य वैज्ञानिक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
बचपन से स्पेस में जाने का सपना
बचपन से ही डॉ. राम्या मंजूनाथ अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की कहानी सुना करती थी और उनसे प्रेरित होकर ही उन्होंने अंतरिक्ष विज्ञान का सपना देखा जिसे सच करने के लिए पहले डिग्री हासिल की. विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वहां से 2011 में बीई की डिग्री हासिल की.
इसके बाद उन्होंने 2012 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) से खगोलीय उपकरणों और प्रकाश के गुणों से जुड़ी रिसर्च की. इसके बाद उन्होंने 2019 तक पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली. वैज्ञानिक उपकरणों के निर्माण और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में भी जानकारी रखती हैं. ये ही कारण है कि आज उनके पास नासा के बड़े मिशनों में से एक, पफिन्स की कमान है और वो उसकी जिम्मेदारी संभालने के लिए मुख्य वैज्ञानिक के तौर पर नियुक्त की गई हैं.
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