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IIT में जाति की जगह रैंक, ब्रांच और GPA का खेल... पूर्व छात्र ने बताया 80 के दशक का कड़वा सच

IIT मद्रास के पूर्व छात्र रमेश श्रीवत्स ने 80 के दशक की कैंपस लाइफ में रैंक, ब्रांच, GPA और करियर के आधार पर बनने वाली अनकही सामाजिक पदानुक्रम की कहानी साझा की. IIT बॉम्बे विवाद के बीच जानिए इस प्रतिस्पर्धी संस्कृति का छात्रों पर असर.

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 24, 2026, 01:50 PM IST | Updated: Sep 24, 2026, 01:53 PM IST
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आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्र रमेश श्रीवत्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर 1980 के दशक की अपनी कैंपस लाइफ से जुड़ा अनुभव साझा किया है. उन्होंने कहा कि उस दौर में आईआईटी मद्रास एक तरह से ‘जाति-चेतना’ वाली जगह थी. हालांकि, उनके अनुभव में यह पदानुक्रम जन्म या सामाजिक जाति के आधार पर नहीं, बल्कि छात्रों की रैंक, ब्रांच, GPA और करियर की उपलब्धियों से बनता था. उनका यह पोस्ट ऐसे समय सामने आया है, जब आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की मौत के बाद कैंपस में छात्र सुरक्षा, भेदभाव और मानसिक दबाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

JEE रैंक से कैसे तय होती थी पहली हैसियत?

रमेश श्रीवत्स के अनुसार, आईआईटी में प्रवेश के बाद छात्रों की पहली अनकही श्रेणी उनकी JEE रैंक से तय होती थी. सिंगल डिजिट या बेहतर रैंक हासिल करने वाले छात्रों को अधिक प्रतिष्ठा मिलती थी, जबकि कम रैंक वालों को अपेक्षाकृत निचले स्तर पर देखा जाता था. उन्होंने इसे एक ऐसी व्यवस्था के रूप में समझाया, जिसमें छात्र की पहचान लगातार बदलती रहती थी. हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत अनुभव और व्यंग्यात्मक टिप्पणी का हिस्सा है, न कि सभी आईआईटी परिसरों की प्रमाणित सामाजिक संरचना का निष्कर्ष.

ब्रांच के आधार पर क्यों बदल जाता था नजरिया?

पूर्व छात्र ने बताया कि कुछ समय बाद JEE रैंक का महत्व कम होने लगा और ब्रांच के आधार पर प्रतिष्ठा बनने लगी. उन्होंने कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल जैसी शाखाओं के बीच मौजूद कथित अंतर का जिक्र किया. अपने अनुभव का एक किस्सा बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वे फिजिक्स में फेल होने के बाद समर कोर्स के लिए प्रोफेसर के पास पहुंचे, तो उनकी कंप्यूटर साइंस ब्रांच पर हैरानी जताई गई. वहीं, मेटलर्जी पढ़ने वाले उनके दोस्त को लेकर प्रोफेसर ने अलग तरह की प्रतिक्रिया दी. यह प्रसंग ब्रांच आधारित पूर्वाग्रह पर व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है.

GPA और पढ़ाई से कैसे बनती थी नई पहचान?

श्रीवत्स के मुताबिक, दूसरे और तीसरे वर्ष तक छात्रों के बीच GPA के आधार पर नई श्रेणियां बन जाती थीं. उन्होंने उन छात्रों का जिक्र किया, जो कम पढ़ाई में अच्छे अंक हासिल करते थे, और उन छात्रों का भी, जो लंबे समय तक मेहनत करने के बावजूद अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाते थे. उन्होंने इस व्यवस्था को ‘जीनियस’ और मेहनत करने वाले छात्रों के बीच अंतर के रूप में व्यंग्यात्मक ढंग से समझाया. ऐसे अनुभव उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रदर्शन, तुलना और आत्म-मूल्यांकन के दबाव पर चर्चा का आधार बन सकते हैं.

चौथे साल में करियर कैसे बन जाता था पहचान?

चौथे वर्ष तक छात्रों की प्रतिष्ठा का पैमाना फिर बदल जाता था. अब सवाल यह होता था कि कौन अमेरिका की यूनिवर्सिटी में दाखिला ले रहा है, किसे IIM से कॉल मिली है या किसे बड़ी टेक कंपनी में नौकरी मिली है. श्रीवत्स ने अमेरिका में प्रवेश पाने वाले एक सहपाठी का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके बोलने के अंदाज में बदलाव को लेकर दोस्त मजाक करते थे. उनके अनुसार, कैंपस में पदानुक्रम का स्वरूप बदलता रहा, लेकिन तुलना की प्रवृत्ति बनी रही.

क्या आज की प्रतिस्पर्धा पर नए सवाल उठते हैं?

श्रीवत्स की टिप्पणी आईआईटी परिसरों में प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव पर विचार करने का अवसर देती है. हालांकि, उनके व्यक्तिगत अनुभव को वर्तमान आईआईटी व्यवस्था के बारे में सार्वभौमिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता. साहिल वाकोडे मामले में लगाए गए जातिगत उत्पीड़न के आरोपों की जांच और संबंधित संस्थागत प्रतिक्रियाओं को उनके सोशल मीडिया अनुभव से अलग तथ्यात्मक संदर्भ में समझना जरूरी है. संस्थानों में सुरक्षित वातावरण, शिकायत निवारण और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर निरंतर ध्यान महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं.

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About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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