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IIT Delhi and AcSIR sign MoU: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली (IIT Delhi) और एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (AcSIR) ने शिक्षा और रिसर्च के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक समझौता किया है. इस साझेदारी के जरिए दोनों संस्थानों से जुड़े छात्रों, शोधार्थियों और शिक्षकों को एक-दूसरे की विशेषज्ञता, प्रयोगशालाओं और शोध सुविधाओं का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा.
समझौते के तहत दोनों संस्थान संयुक्त शोध परियोजनाओं को बढ़ावा देंगे. इसके अलावा शोध छात्रों का सह-मार्गदर्शन, छात्रों और शोधार्थियों का आदान-प्रदान और शिक्षकों के बीच अकादमिक सहयोग के लिए भी व्यवस्था विकसित की जाएगी. इसके लिए IIT दिल्ली और AcSIR से जुड़े शोध संस्थानों के बीच एक साझा सहयोग ढांचा तैयार किया गया है.
इस समझौते की जरूरी विशेषताओं में PhD, MTech और MS के शोध छात्रों का संयुक्त सुपरविजन शामिल है. इसके तहत छात्र के कम से कम दो गाइड एक IIT दिल्ली से और दूसरा AcSIR से जुड़े होंगे. इससे छात्रों को अलग-अलग संस्थानों में उपलब्ध विशेषज्ञता और रिसर्च सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए अपने शोध को आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा.
समझौते के अनुसार पोस्टग्रेजुएट छात्र, शोधार्थी और शिक्षक दूसरे संस्थान में जाकर अकादमिक या रिसर्च से जुड़ा काम कर सकेंगे. IIT दिल्ली और AcSIR से जुड़े छात्र संबंधित संस्थान में कोर्स या शोध एक्टिविटी में भी हिस्सा ले सकेंगे. इसके लिए उन्हें मेजबान संस्थान में अलग से प्रवेश लेने या एक्स्ट्रा ट्यूशन फीस देने की जरूरत नहीं होगी.
आईआईटी दिल्ली और AcSIR से जुड़े शोध संस्थानों के वैज्ञानिक और शिक्षक साझा रुचि वाले क्षेत्रों में मिलकर शोध परियोजनाओं पर काम कर सकेंगे. इस सहयोग में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) से जुड़े शोध संस्थानों की विशेषज्ञता और सुविधाओं का फायदा भी लिया जा सकेगा.
IIT दिल्ली के निदेशक प्रोफेसर रंगन बनर्जी ने कहा कि ये समझौता सामान्य छात्र और शिक्षक आदान-प्रदान से आगे जाकर शोधकर्ताओं के बीच लगातार संवाद और सहयोग का अवसर देगा. दोनों संस्थानों की प्रयोगशालाओं और शोध सुविधाओं को जोड़ने से छात्रों और शिक्षकों को नए विचारों पर मिलकर काम करने का मौका मिलेगा.
AcSIR के निदेशक प्रोफेसर मनोज के. धर का कहना है कि इस साझेदारी से दोनों संस्थानों की शोध सुविधाओं और विशेषज्ञता का फायदा ज्यादा से ज्यादा छात्रों और शोधकर्ताओं तक पहुंच सकेगा. उन्होंने आगे कहा कि इससे छात्रों को ऐसे विषयों पर शोध करने का अवसर मिलेगा, जिनका उद्योग जगत से सीधा संबंध है.
एमओयू हस्ताक्षर के दौरान दोनों संस्थानों के डीन, विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. ये समझौता संस्थागत सीमाओं से आगे बढ़कर भारत में 'जॉइंट रिसर्च इकोसिस्टम' को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है.