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भारत में बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना ही नहीं, उन्हें पढ़ाई पूरी करने तक स्कूल से जोड़े रखना भी बड़ी चुनौती है. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, मुफ्त किताब-कॉपी, छात्रवृत्ति, परिवहन, छात्रावास और भोजन जैसी कई योजनाओं पर काम कर रही हैं. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 से 2025-26 के बीच प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हुई है.
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में कक्षा 3 से 5 के स्तर पर ड्रॉपआउट दर 1.8 प्रतिशत रही, जबकि कक्षा 6 से 8 में यह 3.6 प्रतिशत और कक्षा 9 से 12 में 7 प्रतिशत रही. इससे पता चलता है कि शुरुआती कक्षाओं की तुलना में माध्यमिक और उच्च कक्षाओं में बच्चों को स्कूल में बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती है.
ड्रॉपआउट कम करने के लिए सबसे बड़ी योजनाओं में समग्र शिक्षा शामिल है. इसके तहत नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों को मजबूत करने, अतिरिक्त कक्षाएं बनाने, लड़के-लड़कियों के लिए शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पुस्तकालय, डिजिटल कक्षाएं और दूसरी सुविधाएं बढ़ाने के लिए राज्यों को सहायता दी जाती है.
| कक्षा स्तर | 2024-25 | 2025-26 | क्या स्थिति रही? |
|---|---|---|---|
| कक्षा 3 से 5 | 2.3% | 1.8% | ड्रॉपआउट दर में कमी |
| कक्षा 6 से 8 | 3.5% | 3.6% | लगभग स्थिर स्थिति |
| कक्षा 9 से 12 | 8.2% | 7.0% | कमी आई, लेकिन चुनौती बनी |
सरकार की ओर से पात्र बच्चों को मुफ्त वर्दी और प्राथमिक स्तर पर मुफ्त किताबें देने के साथ परिवहन भत्ता और नामांकन व बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के लिए अभियान चलाए जाते हैं. दूरदराज और कठिन इलाकों के बच्चों के लिए छात्रावास और आवासीय स्कूलों की व्यवस्था भी की जा रही है.
बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी पोषण जरूरतों को पूरा करना भी स्कूल से जुड़े रहने में महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत बालवाटिका से कक्षा 8 तक गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है. सरकारी दस्तावेजों में भी पीएम पोषण सहित विभिन्न योजनाओं को बच्चों के नामांकन और स्कूल में बने रहने से जोड़कर देखा गया है.
लड़कियों के ड्रॉपआउट को कम करने के लिए अलग शौचालय, मुफ्त किताबें और वर्दी, महिला शिक्षकों की नियुक्ति, परिवहन और जरूरतमंद छात्राओं के लिए छात्रावास जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के जरिए वंचित वर्ग की लड़कियों को कक्षा 6 से 12 तक आवासीय शिक्षा की सुविधा भी दी जाती है.
जनवरी 2026 में समग्र शिक्षा 3.0 पर हुई बैठक में पुर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक 100 प्रतिशत नामांकन हो. उन्होंने सीखने की कमी दूर करने, ड्रॉपआउट कम करने, सीखने और पोषण के नतीजों में सुधार तथा शिक्षकों की क्षमता मजबूत करने को जरूरी बताया.
ड्रॉपआउट के पीछे केवल स्कूल की दूरी या सुविधाओं की कमी ही कारण नहीं होती. पढ़ाई में कमजोरी, आर्थिक परेशानी, परिवार की स्थिति, बच्चों का काम में लगना, परिवहन की समस्या और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई का बढ़ता दबाव भी असर डाल सकता है. इसलिए सरकार की रणनीति में बुनियादी सुविधाओं के साथ सीखने में सुधार, परिवहन, आवासीय सुविधा, मुफ्त सामग्री और कौशल शिक्षा को भी शामिल किया गया है.
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ड्रॉपआउट दर में कमी आई है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर 7 प्रतिशत की दर अभी भी ध्यान देने की जरूरत दिखाती है. इसलिए आगे चुनौती सिर्फ बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने की नहीं, बल्कि उन्हें कक्षा 12 तक पढ़ाई से जोड़े रखने और उनकी सीखने की गुणवत्ता बेहतर करने की होगी. समग्र शिक्षा 3.0 की चर्चा में भी सरकार ने इसी दिशा में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है.