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मुफ्त किताबें, वर्दी, भोजन, छात्रवृत्ति और छात्रावास... सरकारी स्कूलों में बच्चों को रोकने के लिए सरकार की ये योजनाएं कितनी कारगर?

सरकारी स्कूलों में ड्रॉपआउट कम करने के लिए समग्र शिक्षा, मुफ्त किताब-वर्दी, परिवहन, छात्रावास, भोजन और बेहतर स्कूल सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है. जानिए सरकार की पूरी रणनीति और ताजा आंकड़े.

मुफ्त किताबें, वर्दी, भोजन, छात्रवृत्ति और छात्रावास... सरकारी स्कूलों में बच्चों को रोकने के लिए सरकार की ये योजनाएं कितनी कारगर?
Image Credit: दाखिला बढ़ाने से आगे अब बच्चों को स्कूल में रोकने पर जोर, जानिए सरकार का पूरा प्लान?

भारत में बच्चों को स्कूल तक पहुंचाना ही नहीं, उन्हें पढ़ाई पूरी करने तक स्कूल से जोड़े रखना भी बड़ी चुनौती है. इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारें सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, मुफ्त किताब-कॉपी, छात्रवृत्ति, परिवहन, छात्रावास और भोजन जैसी कई योजनाओं पर काम कर रही हैं. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 से 2025-26 के बीच प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत से घटकर 1.8 प्रतिशत और माध्यमिक स्तर पर 8.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत हुई है.

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2025-26 में कक्षा 3 से 5 के स्तर पर ड्रॉपआउट दर 1.8 प्रतिशत रही, जबकि कक्षा 6 से 8 में यह 3.6 प्रतिशत और कक्षा 9 से 12 में 7 प्रतिशत रही. इससे पता चलता है कि शुरुआती कक्षाओं की तुलना में माध्यमिक और उच्च कक्षाओं में बच्चों को स्कूल में बनाए रखना अभी भी बड़ी चुनौती है.

सरकार कौन-सी योजना चला रही है?

ड्रॉपआउट कम करने के लिए सबसे बड़ी योजनाओं में समग्र शिक्षा शामिल है. इसके तहत नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों को मजबूत करने, अतिरिक्त कक्षाएं बनाने, लड़के-लड़कियों के लिए शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पुस्तकालय, डिजिटल कक्षाएं और दूसरी सुविधाएं बढ़ाने के लिए राज्यों को सहायता दी जाती है.

कक्षा स्तर2024-252025-26क्या स्थिति रही?
कक्षा 3 से 52.3%1.8%ड्रॉपआउट दर में कमी
कक्षा 6 से 83.5%3.6%लगभग स्थिर स्थिति
कक्षा 9 से 128.2%7.0%कमी आई, लेकिन चुनौती बनी

 

बच्चों को स्कूल में रोकने के लिए क्या मिल रहा है?

सरकार की ओर से पात्र बच्चों को मुफ्त वर्दी और प्राथमिक स्तर पर मुफ्त किताबें देने के साथ परिवहन भत्ता और नामांकन व बच्चों को स्कूल में बनाए रखने के लिए अभियान चलाए जाते हैं. दूरदराज और कठिन इलाकों के बच्चों के लिए छात्रावास और आवासीय स्कूलों की व्यवस्था भी की जा रही है.

क्या भोजन भी ड्रॉपआउट रोकने में मदद करता है?

बच्चों की पढ़ाई के साथ उनकी पोषण जरूरतों को पूरा करना भी स्कूल से जुड़े रहने में महत्वपूर्ण माना जाता है. प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत बालवाटिका से कक्षा 8 तक गर्म पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाता है. सरकारी दस्तावेजों में भी पीएम पोषण सहित विभिन्न योजनाओं को बच्चों के नामांकन और स्कूल में बने रहने से जोड़कर देखा गया है.

लड़कियों के लिए क्या खास कदम उठाए जा रहे हैं?

लड़कियों के ड्रॉपआउट को कम करने के लिए अलग शौचालय, मुफ्त किताबें और वर्दी, महिला शिक्षकों की नियुक्ति, परिवहन और जरूरतमंद छात्राओं के लिए छात्रावास जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है. कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के जरिए वंचित वर्ग की लड़कियों को कक्षा 6 से 12 तक आवासीय शिक्षा की सुविधा भी दी जाती है.

पुर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्या कहा?

जनवरी 2026 में समग्र शिक्षा 3.0 पर हुई बैठक में पुर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है, जब हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और कक्षा 12 तक 100 प्रतिशत नामांकन हो. उन्होंने सीखने की कमी दूर करने, ड्रॉपआउट कम करने, सीखने और पोषण के नतीजों में सुधार तथा शिक्षकों की क्षमता मजबूत करने को जरूरी बताया.

क्या सिर्फ स्कूल की सुविधा बढ़ाना काफी है?

ड्रॉपआउट के पीछे केवल स्कूल की दूरी या सुविधाओं की कमी ही कारण नहीं होती. पढ़ाई में कमजोरी, आर्थिक परेशानी, परिवार की स्थिति, बच्चों का काम में लगना, परिवहन की समस्या और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई का बढ़ता दबाव भी असर डाल सकता है. इसलिए सरकार की रणनीति में बुनियादी सुविधाओं के साथ सीखने में सुधार, परिवहन, आवासीय सुविधा, मुफ्त सामग्री और कौशल शिक्षा को भी शामिल किया गया है.

सरकारी आंकड़े बताते हैं कि ड्रॉपआउट दर में कमी आई है, लेकिन माध्यमिक स्तर पर 7 प्रतिशत की दर अभी भी ध्यान देने की जरूरत दिखाती है. इसलिए आगे चुनौती सिर्फ बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने की नहीं, बल्कि उन्हें कक्षा 12 तक पढ़ाई से जोड़े रखने और उनकी सीखने की गुणवत्ता बेहतर करने की होगी. समग्र शिक्षा 3.0 की चर्चा में भी सरकार ने इसी दिशा में शासन, बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और छात्र सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया है.

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About the Author

Shivam Tiwari

Shivam Tiwari

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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