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भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का पूरा होना केवल रेलवे नेटवर्क के विस्तार की कहानी नहीं है. इसका असर लॉजिस्टिक्स, उद्योग, व्यापार और रोजगार के साथ-साथ उन युवाओं पर भी पड़ सकता है, जो आने वाले समय में ट्रांसपोर्टेशन, सप्लाई चेन, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में करियर बनाना चाहते हैं. 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के अंतिम तीन सेक्शन राष्ट्र को समर्पित किए, जिसके साथ पूरा DFC नेटवर्क चालू हो गया.
पश्चिमी DFC के अंतिम तीन सेक्शन की कुल लंबाई 326 रूट किलोमीटर है और इन्हें 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विकसित किया गया है. इन सेक्शनों के चालू होने से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी से औद्योगिक केंद्रों तक माल की आवाजाही तेज होगी. सरकार के अनुसार इससे लॉजिस्टिक्स लागत घटती है, ट्रांजिट टाइम कम करने और मल्टीमॉडल कन्वेंशन मजबूत करने में मदद मिलेगी.
यहां शिक्षा का कनेक्शन DFC के सीधे किसी एजुकेशन प्रोजेक्ट से नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले नए कौशल और रोजगार इकोसिस्टम से बनता है. जैसे-जैसे माल सेटअप, वेयरहाउसिंग, सप्लाई चेन, पोर्ट कन्वेंशन और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन का विस्तार होगा, वैसे-वैसे प्रशिक्षित युवाओं की जरूरत भी वहीं. यानी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ ऐसे रूट और ट्रेनिंग की मांग बढ़ सकती है, जो युवाओं को इन क्षेत्रों के लिए तैयार करें.
DFC जैसे बड़े प्रोजेक्ट के साथ लॉजिस्टिक्स केवल माल को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने तक सीमित नहीं रहता. इसमें सप्लाई चेन मैनेजमेंट, डेटा मैनेजमेंट, वेयरहाउस मैनेजमेंट, रेलवे ऑपरेशन, पोर्ट लॉजिस्टिक्स, मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्टेशन और इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसे कई क्षेत्र शामिल होते हैं. इसलिए एजुकेशन सेक्टर के लिए यह एक संकेत है कि ट्रेडिशनल डिग्री के साथ इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स पर भी जोर बढ़ सकता है.
इस संदर्भ में गति शक्ति विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण उदाहरण है. यूनिवर्सिटी का फोकस ही ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम के लिए शिक्षा और निवेश विकसित करने पर है. यहां मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन मैनेजमेंट, इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट मैनेजमेंट और ट्रांसपोर्टेशन एंड लॉजिस्टिक्स से जुड़े इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट प्रोग्राम उपलब्ध हैं.
ऐसा कहना अभी इच्छुक होगी कि DFC अपने आप शिक्षा व्यवस्था को बदल देगा. 8 सितंबर के आधिकारिक प्रोग्राम विवरण में DFC को मुख्य रूप से लॉजिस्टिक्स, कन्वेंशन, माल ढुलाई और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा गया है. शिक्षा से इसके संभावित संबंध मुख्यतः स्किलिंग और रोजगार की इकाइयों के माध्यम बनते हैं.
अगर भारत में फ्रेट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का विस्तार इसी तरह जारी रहता है, तो युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स मैनेजर, सप्लाई चेन एनालिस्ट, वेयरहाउसिंग एक्सपोर्ट्स, ट्रांसपोर्टेशन प्लानर, रेलवे टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल और डेटा बेस्ड लॉजिस्टिक्स कंस्ट्रक्शन जैसे करियर विकल्प महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इसके लिए ट्यूशन और ट्यूशन को इंडस्ट्री की वास्तविक इकाइयों के अनुरूप पाठ्यक्रम तैयार करने की जरूरत होगी.
मोदी सरकार के व्यापक कौशल विकास और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विजन को देखें तो DFC जैसे प्रोजेक्ट और लॉजिस्टिक्स-सर्जिकल शिक्षा संस्थान एक-दूसरे के पूरक दिखाई देते हैं. सीमित सरकारी बयानों में भी आधुनिक समझौतों को उद्योग, रोजगार और शिक्षा जैसी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच से जोड़ा गया है.
DFC की असली शिक्षा कहानी उसके ठिकानों पर नहीं, बल्कि उन कौशलों में छिपी है जिन्हें इन ठिकानों पर चलने वाली नई अर्थव्यवस्था को जरूरत होगी. तेज माल सेटअप, बेहतर पोर्ट कॉन्फ़्रेंस और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ भारत को ऐसे युवाओं की ज़रूरत होगी, जो सिर्फ डिग्रीधारी नहीं बल्कि टेक्नोलॉजी, डेटा, सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम की व्यावहारिक समझ रखें. यही वह जगह है जहाँ DFC जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं, स्किलिंग और रोजगार की अगली कड़ी से जुड़ती हैं.