IAS की नौकरी से इस्तीफा देने के बाद क्या फिर बन सकते हैं IAS? जानिए किन नियमों के तहत हो सकती है वापसी
IAS अधिकारी इस्तीफा देने के बाद क्या दोबारा सेवा में लौट सकता है? जानिए संविधान के अनुच्छेद 312, अखिल भारतीय सेवा नियमों, इस्तीफा स्वीकार होने और वापस लेने की प्रक्रिया के साथ शाह फैसल और कन्नन गोपीनाथन जैसे मामलों से पूरी जानकार.
IAS की नौकरी छोड़ना आम सरकारी नौकरी छोड़ने जैसा फैसला नहीं है. एक अधिकारी इस्तीफा दे दे तो भी उसी दिन उसकी सेवा खत्म नहीं हो जाती. इस्तीफे को स्वीकार करने की एक तय प्रक्रिया होती है और कुछ परिस्थितियों में अधिकारी अपना फैसला बदलकर सेवा में वापस आने की कोशिश भी कर सकता है.
लेकिन इस्तीफा स्वीकार होने के बाद वापसी आसान नहीं होती. अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े नियमों में ऐसी वापसी के लिए कुछ खास शर्तें हैं. इसी वजह से जब कोई IAS अधिकारी इस्तीफा देने के बाद फिर सेवा में लौटता है, तो सवाल उठता है कि आखिर ऐसा कैसे संभव हुआ? इसे समझने के लिए नियमों के साथ पहले के मामलों को देखना जरूरी है.
IAS सेवा का संवैधानिक आधार क्या है?
भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS उन अखिल भारतीय सेवाओं में शामिल है, जिनका संवैधानिक आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 में मिलता है. इस अनुच्छेद के तहत संसद को अखिल भारतीय सेवाएं बनाने का अधिकार है. इसी संवैधानिक व्यवस्था के आधार पर IAS और IPS जैसी सेवाओं के लिए अलग कानून और सेवा नियम बनाए गए हैं.
इसके साथ IAS अधिकारियों की नियुक्ति, सेवा शर्तों और इस्तीफे से जुड़े मामलों में केंद्र और संबंधित राज्य सरकार की भूमिका होती है. इसलिए किसी IAS अधिकारी के इस्तीफे को केवल निजी नौकरी की तरह नहीं देखा जाता. इसकी पूरी प्रक्रिया संबंधित सेवा नियमों के तहत आगे बढ़ती है.
इस्तीफा देने के बाद तुरंत क्या नौकरी खत्म होती है?
किसी IAS अधिकारी के इस्तीफा देने का मतलब यह नहीं है कि उसी क्षण उसकी सेवा खत्म हो गई. इस्तीफा पहले संबंधित प्रक्रिया से गुजरता है और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति जरूरी होती है. अगर अधिकारी राज्य में तैनात है, तो वह सामान्य तौर पर अपना इस्तीफा राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र सरकार को भेजता है. इसके बाद मामले की जांच और आवश्यक विचार-विमर्श होता है. इसलिए इस्तीफा देना और इस्तीफा स्वीकार होना दो अलग-अलग चरण हैं. जब तक इस्तीफा स्वीकार नहीं होता, तब तक अधिकारी की सेवा स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जाती.
इस्तीफा वापस लेने का मौका कब मिलता है?
अगर किसी अधिकारी ने इस्तीफा दिया है लेकिन अभी तक उसे स्वीकार नहीं किया गया है, तो वह अपना फैसला बदल सकता है. ऐसी स्थिति में अधिकारी सरकार को अपना इस्तीफा वापस लेने का अनुरोध कर सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वापसी अपने आप हो जाएगी. अंतिम फैसला संबंधित सक्षम प्राधिकारी और लागू नियमों के आधार पर होता है. यही वजह है कि इस्तीफा देने के बाद वापस आने के मामलों में यह बात सबसे पहले देखी जाती है कि इस्तीफा स्वीकार हुआ था या नहीं. स्वीकार न होने की स्थिति में वापसी की संभावना आम तौर पर ज्यादा रहती है.
इस्तीफा स्वीकार होने के बाद क्या वापसी संभव है?
इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद IAS सेवा में वापसी बेहद दुर्लभ मानी जाती है. अखिल भारतीय सेवाएं (मृत्यु-सह-सेवानिवृत्ति लाभ) नियम, 1958 में इस्तीफे और उसे वापस लेने से जुड़े प्रावधान मौजूद हैं. कुछ विशेष परिस्थितियों में इस्तीफा स्वीकार होने के बाद भी वापसी का रास्ता खुल सकता है. इसमें अधिकारी की परिस्थितियां, इस्तीफा देने का कारण और बाद में परिस्थितियों में हुआ महत्वपूर्ण बदलाव देखा जा सकता है. यानी नियम पूरी तरह दरवाजा बंद नहीं करते, लेकिन वापसी को सामान्य प्रक्रिया भी नहीं माना जा सकता. ऐसे मामलों में अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर होता है.
क्या राष्ट्रपति की भी भूमिका होती है?
अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों की नियुक्ति व्यवस्था में राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका महत्वपूर्ण है. इसी वजह से इस्तीफे की अंतिम स्वीकृति को लेकर भी केंद्र स्तर पर प्रक्रिया होती है. विशेषज्ञों के मुताबिक IAS जैसी अखिल भारतीय सेवा में इस्तीफे को सामान्य सरकारी कर्मचारी के इस्तीफे से अलग तरीके से देखा जाता है. राज्य में तैनात अधिकारी का इस्तीफा राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र तक पहुंचता है और आवश्यक प्रक्रिया के बाद उस पर निर्णय लिया जाता है. इसलिए IAS अधिकारी के इस्तीफे और वापसी के मामले में राज्य सरकार के साथ केंद्र सरकार की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहती है.
इस्तीफे के बाद राजनीति में जाने पर क्या होता है?
IAS अधिकारी के सेवा में रहते हुए राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक होती है. अधिकारी सरकारी सेवा में रहते हुए किसी राजनीतिक दल के लिए सक्रिय भूमिका नहीं निभा सकता और न ही राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा ले सकता है. इस्तीफा स्वीकार होने के बाद स्थिति अलग हो जाती है. लेकिन अगर किसी अधिकारी ने इस्तीफा दिया और उसकी स्वीकृति से पहले ही सक्रिय राजनीति में कदम रख दिया, तो मामला जटिल हो सकता है. ऐसे मामलों में इस्तीफे की स्थिति, अधिकारी की गतिविधियों और लागू सेवा नियमों को ध्यान में रखा जाता है. इसलिए केवल इस्तीफा सौंप देना राजनीतिक गतिविधियों की स्वतः अनुमति नहीं माना जाता.
शाह फैसल का मामला इतना चर्चित क्यों हुआ?
शाह फैसल इस पूरे मुद्दे का चर्चित उदाहरण हैं. साल 2009 में UPSC परीक्षा में टॉप करने वाले शाह फैसल ने 9 जनवरी 2019 को IAS से इस्तीफा दिया था. इस्तीफा देने के समय उन्होंने कहा था कि वह किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की योजना नहीं बना रहे हैं. लेकिन कुछ महीनों बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट नाम से राजनीतिक पार्टी शुरू कर दी. अगस्त 2019 में उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट से हिरासत में लिया गया. बाद में फरवरी 2020 में उनके खिलाफ पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत मामला दर्ज किए जाने की खबर सामने आई.
शाह फैसल फिर IAS कैसे लौटे?
शाह फैसल ने अगस्त 2020 में अपनी राजनीतिक पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उनके दोबारा सरकारी सेवा में लौटने की चर्चा शुरू हुई. यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उनके IAS से दिए गए इस्तीफे की अंतिम स्वीकृति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी. यानी यह मामला ऐसा नहीं था कि उन्होंने इस्तीफा दिया, वह अंतिम रूप से स्वीकार हो गया और फिर सामान्य तरीके से नई नियुक्ति मिल गई. बाद में उन्होंने सेवा में लौटने का अनुरोध किया और सरकार की प्रक्रिया के बाद उनके वापस सेवा में आने का रास्ता साफ हुआ. यही मामला बताता है कि इस्तीफे की स्वीकृति की स्थिति कितनी महत्वपूर्ण होती है.
क्या अनीश शेखर का मामला भी ऐसा ही था?
IAS अधिकारी अनीश शेखर का नाम भी इस्तीफे के बाद सेवा में वापसी के उदाहरण के तौर पर लिया जाता है. तमिलनाडु कैडर के 2011 बैच के अधिकारी ने फरवरी 2024 में निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया था. इसके कुछ समय बाद उनके दोबारा IAS सेवा में लौटने की खबर सामने आई. यह उदाहरण बताता है कि किसी अधिकारी के इस्तीफा देने के बाद परिस्थितियों के आधार पर सेवा में वापसी संभव हो सकती है. हालांकि हर मामले का फैसला उसके अलग तथ्यों और संबंधित नियमों के आधार पर होता है. किसी एक अधिकारी की वापसी को सभी मामलों पर लागू नियम नहीं माना जा सकता.
कन्नन गोपीनाथन की स्थिति क्यों अलग है?
2019 में IAS से इस्तीफा देने वाले कन्नन गोपीनाथन का मामला भी इस बहस में महत्वपूर्ण है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के विरोध में इस्तीफा दिया था. लेकिन उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं होने की बात सामने आई थी. इस वजह से उनका मामला उन अधिकारियों से अलग है जिनका इस्तीफा अंतिम रूप से स्वीकार हो चुका हो.
अगर इस्तीफा स्वीकार ही नहीं हुआ है, तो सेवा संबंध खत्म होने की स्थिति पैदा नहीं होती. यही कारण है कि इस्तीफे की स्वीकृति और अधिकारी की ओर से उसे वापस लेने की इच्छा के बीच का अंतर समझना जरूरी है.
क्या दूसरे अधिकारी भी इस्तीफे के बाद बदले रास्ते?
प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जहां अधिकारियों ने नौकरी छोड़कर राजनीति या दूसरे क्षेत्रों का रास्ता चुना. बिहार के पूर्व DGP गुप्तेश्वर पांडे ने 2009 में VRS लिया था और राजनीति में जाने की तैयारी की थी. लेकिन चुनाव का टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने दोबारा सेवा में लौटने का अनुरोध किया और बिहार सरकार ने इसे स्वीकार कर लिया.
उत्तर प्रदेश में तैनात रहे IPS अधिकारी दावा शेरपा ने भी 2008 में इस्तीफा देकर राजनीति में जाने की कोशिश की थी और बाद में सेवा में लौटे. ऐसे मामले सामान्य नहीं बल्कि अपवाद के तौर पर देखे जाते हैं.
क्या राजनीति या कॉर्पोरेट नौकरी के बाद हर IAS लौट सकता है?
ऐसा कोई सामान्य नियम नहीं है कि IAS अधिकारी इस्तीफा देकर राजनीति या निजी नौकरी में जाने के बाद जब चाहे वापस सेवा में आ सकता है. इस्तीफा स्वीकार होने की स्थिति, वापसी का कारण, अधिकारी की गतिविधियां और लागू नियम सभी महत्वपूर्ण होते हैं. अगर इस्तीफा किसी निजी कंपनी, सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी या सक्रिय राजनीति में जाने के उद्देश्य से दिया गया है, तो वापसी के अनुरोध पर प्रतिबंध या कठिन शर्तें लागू हो सकती हैं. इसलिए सेवा में वापसी कोई अधिकार के रूप में स्वतः उपलब्ध विकल्प नहीं है. हर मामले का फैसला नियमों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है.
दिव्या मित्तल के मामले में क्या समझना जरूरी है?
दिव्या मित्तल के इस्तीफे के मामले में भी सबसे अहम सवाल यही है कि उनका इस्तीफा किस चरण में है और क्या वह औपचारिक रूप से स्वीकार हुआ है. अगर इस्तीफा स्वीकार होने से पहले कोई अधिकारी अपना फैसला बदलता है, तो वह सरकार से उसे वापस लेने का अनुरोध कर सकता है. वहीं इस्तीफा स्वीकार हो जाने के बाद वापसी का रास्ता बेहद सीमित हो जाता है और विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन पर विचार किया जा सकता है. इसलिए किसी IAS अधिकारी के इस्तीफे के बाद यह कहना कि अब वह कभी सेवा में नहीं लौट सकता, हर मामले में सही नहीं होगा. अंतिम स्थिति नियम और सक्षम प्राधिकारी के फैसले से तय होती है.
तो क्या इस्तीफा देने के बाद फिर IAS बनना संभव है?
सीधी बात यह है कि कुछ परिस्थितियों में IAS अधिकारी इस्तीफा देने के बाद सेवा में वापस आ सकता है, लेकिन यह कोई आसान या सामान्य प्रक्रिया नहीं है. इस्तीफा स्वीकार होने से पहले वापसी की संभावना अलग होती है और स्वीकार होने के बाद अलग. इस्तीफा स्वीकार होने के बाद विशेष परिस्थितियों में ही आवेदन पर विचार किया जाता है. संविधान का अनुच्छेद 312 अखिल भारतीय सेवाओं का आधार देता है, जबकि सेवा से जुड़े विस्तृत नियम इस्तीफे और वापसी की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं. शाह फैसल, अनीश शेखर और अन्य मामलों से यह साफ होता है कि हर केस अपने तथ्यों के आधार पर देखा जाता है. इसलिए IAS की नौकरी छोड़ने के बाद वापसी संभव तो है, लेकिन यह नियमों, परिस्थितियों और सरकार की मंजूरी पर निर्भर करती है.