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DNA: अमेरिका हमला करेगा और ईरान वर्ल्ड वाइड इंटरनेट काट देगा

क्या अमेरिका के हमले की आहट के बीच ईरान पूरी दुनिया का इंटरनेट ठप करने की तैयारी में है? जानिए डीएनए की इस खास रिपोर्ट में अमेरिका-ईरान तनाव और ग्लोबल इंटरनेट ब्लैकआउट के खतरे का पूरा सच.

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Oct 24, 2026, 11:12 PM IST | Updated: Oct 24, 2026, 11:17 PM IST
Image Credit: ईरान-अमेरिका में महायुद्ध की आहट? US के हमले की खबर के बीच क्या ठप होगा दुनिया का इंटरनेट!
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अमेरिका ने गैंगस्टर्स पर तो काबू पाना शुरु कर दिया है, लेकिन जिस देश को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप..आतंकवाद का सबसे बड़ा पालनहार बताते हैं, उसपर नियंत्रण पाने में वो, 4 लाख करोड़ रुपये गंवाकर भी अब तक विफल रहे हैं. अब एक बार फिर से ट्रंप ने ईरान पर हमले की चेतावनी दी है. लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात है- ईरान की नई धमकी.

ईरान ने धमकी दी है - अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो मिडिल ईस्ट के समुद्री इलाकों में बिछे इंटरनेट केबल तबाह कर दिए जाएंगे . जिन इंटरनेट केबल्स का ईरान ने जिक्र किया है, वो पूरे मिडिल ईस्ट में इंटरनेट सिग्नल और सेवा पहुंचाने का जरिया हैं . मिडिल ईस्ट में ऐसे 7 बड़े अंडरवॉटर इंटरनेट केबल नेटवर्क हैं . इन इंटरनेट केबल्स से मिडिल ईस्ट के 8 देशों समेत, भारत और पाकिस्तान को भी इंटरनेट सेवा मिलती है . कुल मिलाकर 80 करोड़ की आबादी इंटरनेट सेवा के लिए इन केबल्स पर निर्भर है .

16 हजार किमी लंबे इंटरनेट केबल्स ईरान के निशाने पर

जिन इंटरनेट केबल्स को ईरान ने निशाने पर लिया है, उनकी कुल लंबाई तकरीबन 16 हजार किलोमीटर है . ये इतना बड़ा फासला है कि अगर कोई इंसान दिल्ली से गाड़ी लेकर निकले, तो वो ब्रिटेन की राजधानी लंदन तक पहुंच जाएगा . ईरान ने धमकी तो दे दी है, अब सवाल ये है कि ईरान किस तरह इंटरनेट केबल्स को तबाह कर सकता है. मिडिल ईस्ट के अंडरवॉटर इंटरनेट केबल्स का एक हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर जाता है . ये पानी का वो रास्ता है जिसपर ईरान का पूरा कंट्रोल है . इसी तरह इंटरनेट केबल्स का एक बड़ा हिस्सा ओमान के समुद्री किनारों के नजदीक से गुजरता है .

ईरान की फायर पावर रेंज में है इलाका

ये इलाका भी ईरान की फायर पावर की रेंज में है . ईरान के पास अजदर नाम के हजारों अंडरवॉटर ड्रोन हैं . ये ड्रोन 600 किलोमीटर की दूरी तक जाकर हमला कर सकते हैं . यानी ईरान के सैनिकों को पानी में उतरने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, और मिडिल ईस्ट में इंटरनेट ठप हो जाएगा . ईरान ने ये दावा भी किया है - अमेरिकी हमलों को जवाब देने क लिए, सिर्फ इंटरनेट केबल ही नहीं बल्कि अरब देशों में स्थित, अमेरिकी डाटा सेंटर्स और AI कंपनियों पर भी हमले किए जाएंगे . आखिर ईरान को अपने ऊपर हमले का डर क्यों सता रहा है, इस सवाल का जवाब समझने के लिए आपको डॉनल्ड ट्रंप का नया बयान...बेहद गौर से सुनना चाहिए .

अमेरिका में चुनाव के बाद बढ़ जाएगी ईरान पर हमले की संभावना

दरअसल ट्रंप सिर्फ मध्यावधि चुनाव का इंतजार कर रहे हैं . 3 नवंबर को मतदान पूरा होते ही..ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी . इस कार्रवाई को लेकर अमेरिकी और इजरायली प्रतिनिधियों की मुलाकात हो चुकी है . सिर्फ बातचीत ही नहीं हुई बल्कि हमले की तैयारी और तैनाती पर भी मुहर लग चुकी है . अब हम आपको ईरान पर हमले के दूसरे चैप्टर से जुड़ी तैयारियों की डीटेल्स बताने जा रहे हैं .

अमेरिका और इजरायल ने शुरू की  एयरस्ट्राइक की प्रैक्टिस

अमेरिकी और इजरायली वायुसेना ने संयुक्त युद्धाभ्यास शुरु कर दिए हैं . इन अभ्यासों के जरिए ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर बमबारी की ट्रेनिंग की जा रही है . अमेरिकी नेवी ने भी अरब सागर में अपनी तैनाती बढ़ाई है . अमेरिका का तीसरा विमानवाहक ग्रुप, यानी USS थियोडर रूज़वेल्ट...नवंबर के दूसरे हफ्ते तक अरब सागर में पहुंच जाएगा . अमेरिका ने सऊदी अरब से अपने गैर जरूरी स्टाफ को वापस बुला लिया है . इजरायली वायुसेना ने हाल ही में ईरान की सीमा के नजदीक जाकर, ईरानी एयर डिफेंस यानी हवाई रक्षा प्रणालियों की क्षमता को परख भी लिया है .

इजरायल और अमेरिका कर चुके दोबारा युद्ध की तैयारी?

संयुक्त युद्धाभ्यास और नए जहाजों की तैनाती...ये तथ्य बताते हैं कि इजरायल और अमेरिका दोबारा युद्ध लड़ने के लिए कमर कस चुके हैं . ट्रंप को बस मध्यावधि चुनाव खत्म होने का इंतजार है . इसी वजह से ईरान अलर्ट मोड में है...और उसने जवाबी हमले में इंटरनेट केबल्स को तबाह करने की धमकी दी है . मित्रो ईरान उसी रणनीति का इस्तेमाल करना चाहता है, जिसका इस्तेमाल रूस और यूक्रेन के युद्ध में हुआ था . वर्ष 2023 से 2025 के बीच यूक्रेन को इंटरनेट सप्लाई करने वाले इंटरनेट केबल्स को 4 मौकों पर नुकसान पहुंचाया गया था .

व्यापारिक जहाज भी कर सकते हैं हमले?

NATO के मुताबिक रूस और चीन के व्यापारिक जहाजों ने इन हमलों को अंजाम दिया था . सुनकर आप भी चौंक गए होंगे, कि व्यापारिक जहाज से किस तरह हमला किया जा सकता है . दरअसल रूस और चीन के व्यापारिक जहाज समंदर में अपना भारी भरकम लंगर डालकर उसे समुद्र की तलहटी पर घसीटते थे . जब ये लंगर किसी इंटरनेट केबल में फंस जाता था, तो वो ज्यादा खिंचाव की वजह से टूट जाता था . ईरान और रूस के इरादों में बस एक छोटा सा फर्क है . रूस ने चोरी छिपे व्यापारिक जहाजों से इंटरनेट केबल्स को नुकसान पहुंचाया था . ईरान बारूदी हथियारों के जरिए, इंटरनेट केबल्स को बड़ा नुकसान पहुंचाने की खुलेआम वॉर्निंग दे रहा है. ईरान जैसी ही योजना का जिक्र आचार्य चाणक्य के अर्थशास्त्र में भी है .

आचार्य चाणक्य ने दिया कूटयूद्ध का सिद्धांत

अर्थशास्त्र में आचार्य चाणक्य ने कूटयुद्ध का सिद्धांत दिया है . कूटयुद्ध एक ऐसी सैन्य कार्रवाई होती है, जिसमें शत्रु देश के मित्र देशों और उनके नागरिकों को नुकसान पहुंचाया जाता है . नागरिकों को नुकसान पहुंचाने के लिए उनके व्यापारिक रास्ते और जरूरी सामग्री पहुंचाने वाले मार्गों को बंद कर दिया जाता है . ऐसा करने से जनता परेशान होती है और वो अपने राजा पर युद्ध से दूर रहने के लिए दबाव डालती है .

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ईरान अरब देशों के नागरिकों को बनाएगा निशाना?

ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं . सैन्य अड्डों के साथ ही साथ अरब देशों के तेल संयंत्रों और कारखानों को भी निशाना बनाया है, इसके बावजूद अमेरिका और इजरायल दोबारा हमले की तैयारी करने से परहेज नहीं कर रहे हैं . यही कारण है कि अब ईरान ने अरब देशों के नागरिकों को त्रस्त करने का प्लान बनाया है . इंटरनेट के अभाव में जाहिर तौर पर नागरिक परेशान होंगे, और वो सरकार पर दबाव बनाने की भी कोशिश करेंगे . ईरान की इस योजना से उसकी एक कमजोरी भी जाहिर होती है . ये कमजोरी है - कि अब ईरान की सैन्य क्षमता सीधे अमेरिकी या इजरायली हितों को नुकसान पहुंचाने लायक नहीं बची है . ईरान की इसी कमजोरी का आकलन प्रसिद्ध थिंक टैंक CSIS, यानी सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ ने भी किया है .

ईरानी नौसेना को युद्ध में बड़ी क्षति पहुंची

CSIS के आकलन में बताया गया है - युद्ध में सबसे बड़ा नुकसान ईरान की नौसेना को हुआ है . ईरान की नौसेना के लगभग 90 प्रतिशत संसाधन खत्म हो चुके हैं . ईरान में मिसाइल बनाने वाले कारखानों और संयंत्रों में से 70 प्रतिशत तक को तबाह किया जा चुका है . ईरान की ड्रोन पावर भी कम हुई है . अमेरिका और इजरायल ने ईरान के 40 प्रतिशत ड्रोन बनाने वाले कारखाने पूरी तरह बर्बाद कर दिए हैं . ईरान अब ज्यादा लंबी दूरी तक हमले करने की स्थिति में नहीं है .

इजरायल और अमेरिका समझ चुके ईरान की कमजोरी

ईरान की इस कमजोरी को इजरायल और अमेरिका भी समझ चुके हैं, इसी वजह से हमलों के दूसरे अध्याय की तैयारी शुरु की जा चुकी है . फिलहाल बयानों और धमकियों से दोनों पक्ष एक दूसरे को तोल रहे हैं . अगर अमेरिका के मध्यावधि चुनाव तक ईरान के रूख में बदलाव हुआ तो युद्ध टल सकता है, वर्ना मिडिल ईस्ट में दोबारा एक टकराव शुरु हो जाएगा . हालांकि एक सच ये भी है, कि इस्लामिक क्रांति से जन्मा ईरान का सिस्टम झुकने वाला नहीं है . इस्लामिक क्रांति के जनक अयातुल्ला रुहुल्ला खुमैनी ने एक नारा दिया था . ये नारा था - WAR, WAR...UNTILL VICTORY . इसका अर्थ है कि जब तक जीत हासिल ना हो जाए तब तक जंग करो . आज चालीस साल बाद भी ईरान की सेना और सरकार इसी सिद्धांत पर चल रही है .

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About the Author

रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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