43 साल देश सेवा, अब राम मंदिर की जिम्मेदारी... फिर जितेंद्र मिश्रा की जाति क्यों खोज रहे नेता?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO बने, लेकिन नियुक्ति पर जाति और विचारधारा को लेकर सवाल उठे. चार दशक की सैन्य सेवा के बाद अब उनकी नई जिम्मेदारी बड़ी है.
एक सैनिक सिस्टम के निशाने पर है और दूसरे सैनिक जाति की सियासत करने वाले नेताओं के निशाने पर. ये दूसरे सैनिक हैं- रिटायर्ड एयर मार्शल और राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO जितेंद्र मिश्रा. जितेंद्र मिश्रा को कल ही राम मंदिर ट्रस्ट का CEO नियुक्त किया गया है, लेकिन इन्हें भी कुछ नेता..जाति के चश्मे से देख रहे हैं. इनमें से कुछ ऐसे भी हैं..जिन्हें CEO का सरनेम मिश्रा होने से दिक्कत है.
इसलिए आज हम, 'मिश्रा' से नफरत करने वाली 'जाति' का DNA टेस्ट करेंगे. मित्रों, जिस जाति का DNA टेस्ट हम करेंगे..ये किसी अगडे-पिछडे, SC-ST वाली जाति नहीं है. ये उन सियासतदानों की जाति है, जिसके दिमाग से जाति...जाती ही नहीं.
जिस सैनिक ने अपने 4 दशक देश की सेवा में दिए, उसके बारे में ऐसे सवाल उठाने से पहले सोचा तक नहीं गया. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम जैसे ही राम मंदिर से जुड़ा, वैसे ही उनकी देशभक्ति को भुला दिया गया. एक सैनिक को खास विचारधारा से जोड़ा जाने लगा. ऐसे नेताओं के बयान सुनिए और पहचानिए.
DNA मित्रो, सुना आपने. कैसी-कैसी बातें कही जा रही हैं. जो व्यक्ति इतने वर्षों तक केवल देश के सैनिक के रूप में पहचान रखते थे, उन्हें अचानक RSS का आदमी बताया जा रहा है. किसी को इस बात पर आपत्ति है कि उनके नाम में मिश्रा क्यों लगा है या फिर एक मिश्रा को ही CEO क्यों बनाया गया.
मित्रो, कहा जाता है कि सैनिक की कोई जाति-धर्म नहीं होती. देश की सेवा और सुरक्षा ही उनका कर्म और धर्म है. लेकिन राजनीति जो न कराए.
जिस तरह राजनीति में जाति को ढूंढा जाता है, ठीक उसी तरह एक सैनिक की जाति बताई जा रही है. इतना ही नहीं, जो कम्युनिस्ट पार्टी धर्म में विश्वास नहीं रखती, वो भी राम मंदिर के CEO में दिलचस्पी रखती है. उसे भी CEO की नियुक्ति पर एतराज है.
ये लोग आपको एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की उपलब्धियों के बारे में नहीं बताएंगे. लेकिन आज आपको जानना चाहिए कि देश की सेवा उन्होंने किस तरह से की है.
- जितेंद्र मिश्रा 17 साल की उम्र में 1983 में नेशनल डिफेंस एकेडमी के कैडेट बने
- दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के रूप में उन्हें वायुसेना में कमीशन मिला.
- बाद में उन्होंने वायुसेना में चीफ टेस्ट पायलट के रूप में काम किया. किसी एयरक्राफ्ट के टेस्टिंग स्टेज में वो उसे उडाकर उसकी परफॉर्मेंस जांचते थे.
- 2016 में पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के बाद उन्हें एयरबेस का प्रमुख बनाया गया. उन्होंने पठानकोट एयरबेस की प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की.
- एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा वायुसेना के हथियारों की खरीद के लगभग 75 प्रोजेक्ट के साथ जुडे रहे.
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वो वायुसेना के वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे
- इस दौरान ज्यादातर हवाई अभियान वेस्टर्न एयर कमांड से ही चलाए गए थे
- उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एयरक्राफ्ट और एयर डिफेंस की तैनाती से जुडे फैसले किए.
- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया.
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के पास प्लानिंग, कोऑर्डिनेशन, लॉजिस्टिक और बड़ी टीम को संभालने का लंबा अनुभव है. इसी वजह से उन्हें 5,585 आवेदकों में से राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के रूप में चुना गया. अपने अनुभव का इस्तेमाल वो राम मंदिर की व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए करेंगे. लेकिन विरोधियों की कुंठा का स्तर ये है कि वो उनकी विचारधारा पर सवाल उठा रहे हैं. उनकी योग्यता को नकार रहे हैं. उनकी जाति तलाश रहे हैं. आपत्ति जताने वाले ये वही लोग हैं जिन्हें राम मंदिर से कोई मतलब नहीं है. जो राम मंदिर के धुर विरोधी थे.
DNA मित्रो, विपक्ष की आलोचनाओं की परवाह किए बिना एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अपने अगले मिशन में लग गए हैं. CEO के रूप में नियुक्ति के 24 घंटे के भीतर ही वो अयोध्या पहुंच गए.
सबसे पहले राम मंदिर जाकर भगवान राम के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. इसके बाद उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में हिस्सा लिया. नए CEO के साथ ट्रस्ट के सदस्यों का औपचारिक परिचय हुआ.
अगले दो से पांच दिनों तक वो सदस्यों के साथ बैठकर ट्रस्ट के काम-काज को समझेंगे. सभी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी जुटाने के बाद वो CEO के रूप में औपचारिक काम संभालेंगे.
43 साल तक राष्ट्र सेवा का दायित्व निभाने के बाद एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अब राम भक्तों की सेवा का मौका मिला है. राम मंदिर के CEO के रूप में उनके सामने एक बड़ी जिम्मेदारी है. चंदा चोरी की घटना के बाद न केवल उन्हें राम भक्तों का विश्वास लौटाना है, बल्कि राम मंदिर की व्यवस्था को एक उदाहरण के रूप में भी प्रस्तुत करना है.
CEO के रूप में उनके सामने कई जिम्मेदारी होंगी. इनमें मंदिर का प्रबंधन, मंदिर की संपत्ति का प्रबंधन, साफ-सफाई और सुरक्षा शामिल हैं. इसके अलावा श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुविधाएं, दान का हिसाब और बैंक खातों के साथ-साथ वित्तीय व्यवस्था का संचालन शामिल हैं.