जिनपिंग या पुतिन...किसका लाव-लश्कर सबसे भारी? BRICS में पहुंची सुपरपावर की सुपर सिक्योरिटी
दिल्ली में BRICS समिट के लिए पुतिन और जिनपिंग खास सुरक्षा इंतजामों के साथ पहुंच रहे हैं. पुतिन के 40 गाड़ियों वाले काफिले से लेकर जिनपिंग के 400 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तक, जानिए दोनों नेताओं की सुरक्षा, काफिले और प्रोटोकॉल से जुड़ी खास बातें.
BRICS सिर्फ एक समूह नहीं बल्कि ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा प्रतिनिधि बनकर उभरा है. दुनिया में लंबे वक्त तक पश्चिमी जगत का दबदबा रहा है. BRICS की शक्ल में ग्लोबल साउथ इसी प्रभुत्व के सामने एक मजबूत पक्ष बनकर खड़ा है. दिल्ली में हो रही BRICS समिट में ग्लोबल साउथ के हेवीवेट यानी बड़े नेता आ रहे हैं. इन नेताओं की सुरक्षा और उनके लाव-लश्कर से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां सामने आई हैं.
सबसे पहले बात रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की करते हैं. पुतिन की सुरक्षा की वजह से उनके लाव-लश्कर की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन कुछ जानकारियां सामने आ चुकी हैं. जिस काफिले से पुतिन सफर करेंगे, उसमें 20 से 40 गाड़ियां शामिल होने की बात सामने आई है.
इन गाड़ियों में पुतिन की निजी गाड़ी ऑरस सीनेट भी शामिल है. यह एक बख्तरबंद गाड़ी है, जो बारूदी सुरंग के धमाके को भी सह सकती है. पुतिन की गाड़ी में इमरजेंसी के लिए एक छोटी मेडिकल यूनिट भी रहती है. पुतिन की सिक्योरिटी में 150 से 200 सुरक्षाकर्मी शामिल रहेंगे. इनमें रूस की इलीट FSO और SPB एजेंसी से जुड़े सुरक्षाकर्मी शामिल हैं.
पुतिन के साथ पहुंचे सुरक्षा से जुड़े विमान
पुतिन के काफिले और सिक्योरिटी का एक हिस्सा भारत पहुंच चुका है. ग्रेटर नोएडा के जेवर एयरपोर्ट पर तीन रूसी विमानों ने लैंडिंग की है. इनमें एक IL-76 विमान भी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक IL-76 से पुतिन के पर्सनल बॉडीगार्ड्स दिल्ली पहुंचे हैं. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि पुतिन की सुरक्षा के लिए एक डिकॉय एयरक्राफ्ट भेजा गया है. यह ऐसा विमान होता है जो देखने में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के विमान जैसा ही लगता है. सुरक्षाकर्मियों और प्रतिनिधिमंडल में शामिल स्टाफ के रहने के लिए भी व्यापक व्यवस्था की गई है.
ITC मौर्य में पुतिन के लिए 150 कमरे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने दिल्ली के ITC मौर्य होटल को पुतिन के लिए बुक किया है. होटल में रूस ने करीब 150 कमरे बुक किए हैं. इनमें 50 सुइट यानी VIP सुविधाओं वाले कमरे हैं. ये सुइट राष्ट्रपति पुतिन और उनके साथ आने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के लिए हैं. पुतिन की सुरक्षा के लिए होटल में एक कमांड सेंटर बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है. पुतिन के खाने-पीने की टेस्टिंग के लिए एक फूड लैब तैयार की गई है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक पुतिन जिस खाने को चखकर छोड़ देते हैं, उसे भी सिक्योरिटी स्टाफ अपने साथ रखता है. इस खास प्रोटोकॉल के पीछे सुरक्षा से जुड़ी वजह बताई जाती है. इसका मकसद पुतिन के DNA के निशानों को सुरक्षित रखना और दूसरे देशों या संभावित विरोधियों को उनके DNA से जुड़ी जानकारी हासिल करने से रोकना है.
गोर्बाचेव से जुड़ी घटना के बाद बदला सुरक्षा प्रोटोकॉल
रूसी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा व्यवस्था के पीछे एक ऐतिहासिक घटना का भी जिक्र किया जाता है. वर्ष 1987 में तत्कालीन सोवियत संघ के राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव अमेरिका गए थे. इस यात्रा का मकसद सोवियत संघ और अमेरिका के बीच एक परमाणु संधि पर सहमति बनाना था.
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक इस यात्रा के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA और ब्रिटिश खुफिया एजेंसी MI6 ने एक साझा ऑपरेशन किया था. दावा किया जाता है कि CIA ने गोर्बाचेव के बाथरूम के पाइप्स की दिशा को बदल दिया था. इसका मकसद बाथरूम से निकलने वाले पानी के जरिए गोर्बाचेव की सेहत से जुड़ी जानकारी हासिल करना था.
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि को लेकर सवाल भी रहे हैं. बताया जाता है कि रूसी खुफिया एजेंसी KGB को इस ऑपरेशन की भनक लग गई थी. इसके बाद रूसी राष्ट्राध्यक्षों की सुरक्षा में यह प्रोटोकॉल और सख्त किया गया कि राष्ट्रपति के शारीरिक संपर्क में आने वाली चीजों को मेजबान देश में पीछे न छोड़ा जाए.
जिनपिंग के साथ 400 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल
पुतिन के बाद BRICS समिट में आने वाले दूसरे बड़े नेता चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग हैं. जिनपिंग की दिल्ली यात्रा को लेकर भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली की BRICS समिट में जिनपिंग सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल लेकर आने वाले नेताओं में शामिल हैं. चीन के डेलिगेशन में करीब 400 सदस्य शामिल होने की बात सामने आई है. इस प्रतिनिधिमंडल में चीन के वरिष्ठ मंत्रियों से लेकर अधिकारी तक शामिल हैं.
वर्ष 2019 में जब जिनपिंग भारत आए थे, तब उनके साथ करीब 200 सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल आया था. यानी इस बार चीन के प्रतिनिधिमंडल की संख्या करीब दोगुनी बताई जा रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शी जिनपिंग और उनके अधिकारियों के रहने के लिए दिल्ली के ताज पैलेस होटल को चुना गया है. खास बात यह है कि पुतिन के करीबी माने जाने वाले बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्जेंडर लुकाशेंको भी इसी होटल में ठहरने वाले हैं.
जिनपिंग के काफिले में 30 गाड़ियां
जिनपिंग की सुरक्षा में भी व्यापक इंतजाम किए गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनकी सुरक्षा में 150 से 200 सुरक्षाकर्मी तैनात रहेंगे. इनमें करीब 80 सुरक्षाकर्मी चीन के सेंट्रल सिक्योरिटी ब्यूरो से जुड़े बताए जाते हैं. इस ब्यूरो की जिम्मेदारी चीन के राष्ट्राध्यक्ष की सुरक्षा संभालना है.
जिनपिंग के सफर के लिए करीब 30 गाड़ियों का काफिला निकलने की बात सामने आई है. इस काफिले में दो बख्तरबंद हॉन्गची गाड़ियां शामिल होंगी. जिनपिंग के काफिले में एक जैसी दिखने वाली दो बख्तरबंद गाड़ियां रखे जाने का मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि यह आसानी से पता न चल सके कि जिनपिंग किस गाड़ी में सफर कर रहे हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक जिनपिंग की ये बख्तरबंद गाड़ियां भारत पहुंच चुकी हैं. जिनपिंग अपने विमान से भारत आएंगे और उनके साथ एक सिक्योरिटी विमान भी उड़ान भरेगा. उनके हवाई फ्लीट में दो ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी शामिल होंगे. इन विमानों के जरिए जरूरी साजो-सामान भारत लाया जा रहा है.
कुछ BRICS सदस्य सामान्य प्रोटोकॉल के साथ पहुंचेंगे
BRICS सम्मेलन में कुछ ऐसे सदस्य देश भी शामिल होंगे, जिनके राष्ट्राध्यक्ष या प्रतिनिधि अपेक्षाकृत सामान्य प्रोटोकॉल के साथ सफर कर रहे हैं. अफ्रीकी देश बुरुंडी के प्रतिनिधियों को पांच सितारा होटल में रहने की जगह दी गई है, लेकिन यह होटल BRICS के प्रीमियम होटल की लिस्ट में नहीं है. इथोपिया, इंडोनेशिया, कजाकस्तान और थाईलैंड के प्रतिनिधियों को एक ही होटल में ठहरने की व्यवस्था की गई है. इन देशों के प्रतिनिधियों के लिए अलग-अलग होटल का आवंटन नहीं किया गया है.
ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और इजिप्ट के प्रतिनिधियों के साथ उनके काफिले नहीं आए हैं. यानी इन देशों के प्रतिनिधियों को भारत सरकार की ओर से मुहैया कराई गई गाड़ियों से सफर करना होगा. यह अंतर दिखाता है कि BRICS में शामिल देशों के प्रतिनिधिमंडलों की सुरक्षा और प्रोटोकॉल उनकी जरूरतों और स्तर के हिसाब से अलग-अलग हैं.
BRICS को लेकर ट्रंप की चिंता
दिल्ली में BRICS समिट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से हाल में कोई बड़ी टिप्पणी सामने नहीं आई है. हालांकि, ट्रंप पहले BRICS को लेकर कई सख्त बयान दे चुके हैं. ट्रंप साफ कह चुके हैं कि अगर BRICS देशों ने डॉलर को कमजोर करने की कोशिश की तो उन पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है. BRICS को ट्रंप की दूसरी धमकी यह रही है कि अगर समूह ने अमेरिका विरोधी कदम उठाए तो उसके सदस्यों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.
ट्रंप प्रशासन की तरफ से यह आरोप भी लगाया गया है कि BRICS के सदस्य देश अमेरिका के पड़ोस में दखल देने की कोशिश कर रहे हैं. भारत और रूस जैसे देश पहले ही साफ कर चुके हैं कि BRICS कोई कॉमन करेंसी नहीं लाने जा रहा है. यानी डॉलर को नुकसान पहुंचाने के लिए साझा मुद्रा लाने की कोई योजना नहीं है, लेकिन ट्रंप की चिंता सिर्फ डॉलर तक सीमित नहीं है. BRICS के लगातार विस्तार को भी अमेरिका के लिए एक चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है.
BRICS में 11 स्थायी सदस्य और 10 पार्टनर देश
BRICS पिछले दो दशकों में तेजी से विस्तार करने वाला समूह बन चुका है. करीब 20 साल पहले इस समूह में सिर्फ चार सदस्य थे. आज BRICS में 11 स्थायी सदस्य और 10 पार्टनर देश शामिल हैं. BRICS के विस्तार की वजह से विदेश नीति के विशेषज्ञ इसे आने वाले समय में एक बड़ी वैश्विक शक्ति के रूप में देखते हैं. अमेरिका के लिए यह स्थिति ऐसे समय में चुनौतीपूर्ण है, जब ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राष्ट्र के अहम संगठन WHO से अमेरिका को बाहर कर लिया है और NATO को लेकर भी ट्रंप लगातार सख्त रुख अपनाते रहे हैं.
ऐसे समय में BRICS का विस्तार सिर्फ पश्चिमी जगत के लिए ही नहीं, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति के लिए भी चुनौती माना जा रहा है. यही वजह है कि ट्रंप कभी डॉलर का नाम लेकर तो कभी अमेरिका के हितों की दलील देकर BRICS के विस्तार और उसके इरादों पर सवाल उठाते रहे हैं.