भारत की धरती से करीब 13 हजार किलोमीटर दूर यूएस और भारत ने एक बड़ा ज्वाइंट ऑपरेशन कर अपराध के संगठित नेटवर्क पर विध्वंसक चोट की है. ये कार्रवाई अमेरिका में अमेरिकी एजेंसियों ने की. लेकिन इस एक्शन में भारतीय एजेंसियों का सहयोग भी था. भारतीय एजेंसियों के सटीक इनपुट पर ही दो कुख्यात गैंगस्टर आज अमेरिका में सलाखों के पीछे पहुंचे हैं. इस एक्शन से साफ है अमेरिका अब भारत के अपराधियों के लिए सुरक्षित शरणस्थली नहीं है. अमेरिका अब भारत के अपराधियों को पनाह नहीं देगा बल्कि उन्हें पकड़ेगा भी और उन पर कार्रवाई भी करेगा.
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन का विचार है कि कानून लागू करने वाली संस्थाओं को मजबूत करना और अपराधियों को सजा देना हर चुनी हुई सरकार की पहली जिम्मेदारी है.
अमेरिका एजेंसियों ने अपने इसी दायित्व को निभाते हुए भारत के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया को गिरफ्तार किया है. दोनों गैंगस्टर्स को लॉस वेगास से गिरफ्तार किया गया. भारत में ऑर्गनाइज क्राइम सिंडिकेट चलानेवाले इन गैंगस्टर्स को लॉस वेगास में कैसे गिरफ्तार किया गया, गिरफ्तारी में भारतीय एजेंसियों की क्या भूमिका रही, पहले उसे समझते हैं.
हिमांशु भाऊ गिरफ्तार.. लॉरेंस खुश क्यों होगा? गैंगस्टर्स को अमेरिका पनाह नहीं देगा, पकड़ेगा ! गैंगस्टर्स पर भारत-यूएस का 'ज्वाइंट ऑपरेशन' https://t.co/vzZSKNuSEK
— Zee News (@ZeeNews) October 24, 2026
गैंगस्टर हिमांशु भाऊ को अमेरिका की इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट एजेंसी ने लॉस वेगास से पकड़ा. अमेरिकी एजेंसी अचानक गैंगस्टर के ठिकाने पर नहीं पहुंची थी. हरियाणा की STF ने उन्हें जानकारी दी थी. भारतीय एजेंसियों ने तकनीकी निगरानी और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर उसके लास वेगास के ठिकाने की सटीक लोकेशन अमेरिकी एजेंसियों से साझा की थी. इसी इनपुट पर हिमांशु भाऊ को गिरफ्तार किया गया. ये संगठित अपराध के खिलाफ भारतीय और अमेरिकी एजेंसियों का ज्वाइंट एक्शन था.
नीरज फरीदपुरिया को भी लॉस वेगास से ही गिरफ्तार किया गया. नीरज हिमाशु भाऊ के साथ ही रह रहा था. उसे पहले भी अमेरिकी अधिकारियों ने इमिग्रेशन कानून के उल्लंघन के मामले में हिरासत में लिया था. जमानत मिलने के बाद उसने पैर में लगा इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग डिवाइस हटा दिया था और छिपकर रह रहा था. भारतीय एजेंसियों के इनपुट पर उसे दोबारा गिरफ्तार किया गया.
हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया की गिरफ्तारी क्यों भारतीय एजेंसियों के लिए बड़ी कामयाबी मानी जा रही है. क्यों इसे भारत में संगठित अपराध तंत्र पर विध्वंस प्रहार माना जा रहा है, इसे समझने के लिए हमें इन दोनों गैंगस्टर्स की क्राइम कुंडली को समझना होगा. लॉस वेगास में गिरफ्तार किए गए दोनों गैंगस्टर्स में ज्यादा कुख्यात हिमांशु भाऊ है.
महज 17 साल की उम्र में अपराध की दुनिया में कदम रखनेवाले हिमांशु भाऊ पर भारत में 41 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं. उसपर हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, जालसाजी, आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर केस हैं. हरियाणा पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी पर ढाई लाख और दिल्ली पुलिस ने 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया था.
2022 में फर्जी पासपोर्ट के जरिए भारत से फरार हुए हिमांशु भाऊ के खिलाफ अगस्त 2023 में भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था. रेड कॉर्नर नोटिस के तहत दुनिया भर की पुलिस से अपराधी को तलाश कर गिरफ्तार करने की अपील की जाती है.
वहीं, 14 साल की उम्र में पहला क्राइम करनेवाले नीरज फरीदपुरिया पर भारत में 25 से ज्यादा गंभीर आपराधिक केस दर्ज हैं
2015 में हत्या के केस में लोअर कोर्ट ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी. 2019 में वो जमानत पर बाहर आया और फर्जी पासपोर्ट के जरिए दुबई के रास्ते कनाडा फिर अमेरिका भाग गया. नीरज पर हरियाणा पुलिस ने 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था.
यू-ट्यूबर एल्विश यादव के घर फायरिंग, दिल्ली के राजौरी गार्डन के कैफे में शूटआउट के जरिए हिमांशु भाऊ ने खौफ का साम्राज्य बनाया. मार्च 2022 में उसने हरियाणा में महज 24 घंटे में तीन टारगेट किलिंग कर सनसनी फैला दी थी. सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस उसे गिरफ्तार करती उससे पहले ही देश छोड़कर फरार हो गया था.
अमेरिका में गिरफ्तार हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया पर आगे की कानूनी कार्रवाई क्या होगी. उन्हें कैसे भारत लाया जाएगा हम विस्तार से आपको बताएंगे लेकिन पहले समझिए कि इन दो गैंगस्टर्स की गिरफ्तारी से लॉरेंस विश्नोई गैंग में क्यों जश्न मन रहा है.
हिमांशु भाऊ क्राइम वर्ल्ड में लॉरेंस के विरोधी बंबीहा और नीरज बवाना गैंग का इंटरनेश्नल पोस्टर ब्वॉय था. पुर्तगाल, दुबई और अमेरिका में बैठे उसके गुर्गे भारत में वसूली, कॉन्ट्रैक्ट किलिंग और जबरन कब्जा का नेटवर्क चलाते हैं. यही काम लॉरेस गैंग भी करता है. बंबिहा और बवाना गैंग के अपराधियों की फरारी में भी हिमांशु भाऊ मदद करता था.
नीरज फरीदपुरिया लॉरेस के दुश्मन बंबीहा गैंग का ऑपरेशनल क्राइम हेड था. गैंगस्टर कौशल चौधरी के जेल जाने और दविंदर बंबीहा के एनकाउंटर के सिंडिकेट के जमीनी नेटवर्क को नीरज फरीदपुरिया ही संभाल रहा था. यानी हिमांशु भाऊ, गैंग का इंटरनेशनल ऑपरेशनल हेड था तो नीरज फरीदपुरिया भारत में बंबीहा गैंग की क्राइम कंपनी का प्रमुख था.
दिल्ली-NCR, हरियाणा और पंजाब का इलाका लॉरेंस गैंग का कोर एरिया रहा है. इसी इलाके में लॉरेंस गैग वसूली, अवैध कब्जा और कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का नेटवर्क चलाता है. लॉरेंस गैंग के कोर एरिया में ही हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया भी
ऑपरेट करते थे. दोनों गैंग्स में दुश्मनी की सबसे बड़ी वजह यही है.
दोनों गैंग दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के टोल प्लाजा, शराब के ठेकों और रियल एस्टेट से होने वाली अवैध वसूली पर अपना वर्चस्व चाहते हैं. पिछले कुछ दिनों में भाऊ गैंग ने लॉरेंस के गुर्गों को निशाना बनाकर अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश की थी. इसलिए हिमांशु भाऊ के पकड़े जाने के बाद अब पंजाब से दिल्ली तक क्राइम सिंडिकेट पर लॉरेंस गैंग की पकड़ मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है.
हालांकि हिमांशु भाऊ की गिरफ्तारी के बाद उसका गैंग कमजोर तो होगा लेकिन पूरी तरह खत्म होगा, इस पर संशय है. क्योंकि उसके विदेश में छिपे होने के दौरान नेटवर्क को संभालने की जिम्मेदारी योगेश कादियान पर थी. साहिल रिटोली, नसीब ऊर्फ डाकू कुलासिया और अमन भैंसवाल जैसे हिमांशु के करीबी अब भी जेल से बाहर हैं और एक्टिव हैं. मित्रो यहां हम आपको एक दिलचस्प जानकारी शेयर कर रहे हैं. आमतौर पर सरगना के गिरफ्तार होने या उसकी मौत के बाद गैंग बिखर जाता है.
दुनिया के सबसे बड़े ड्रग लॉर्ड पाब्लो एस्कोबार की मौत के बाद उसका मेदेलिन कार्टेल खत्म हो गया था. प्रतिद्वंद्वी 'काली कार्टेल' ने पूरे मार्केट पर कब्जा कर लिया था. ड्रग तस्कर अल चापो की गिरफ्तारी के बाद उसका सिनालोआ कार्टेल दो हिस्सों में बंट गया. इससे कार्टेल की ताकत कमजोर हो गई. 2015 में बाली में छोटा राजन को गिरफ्तार किया गया था. छोटा राजन की गिरफ्तारी के बाद उसका संगठित सिंडिकेट निष्क्रिय हो गया.
भारत और अमेरिकी एजेंसियों के ज्वाइंट ऑपरेशन में गिरफ्तार हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया फिलहाल नेवादा के हेंडरसन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं. जल्द ही उन्हें भारत लाने की प्रक्रिया शुरू होगी. उन्हें कैसे भारत लाया जाएगा ये पूरी प्रक्रिया बहुत ध्यान से सुनिए और समझिए.
दोनों को भारत लाने के लिए दो कानूनी विकल्प है. पहला है निष्कासन और दूसरा है प्रत्यर्पण. हिमांशु भाऊ और नीरज फरीदपुरिया दोनों की फर्जी पासपोर्ट बनवाकर अमेरिका पहुंचे थे. दोनों गैंगस्टर अवैध दस्तावेजों के साथ अमेरिकी धरती पर रह रहे थे, इसलिए अमेरिकी इमिग्रेशन कोर्ट उन्हें इमिग्रेशन कानून के उल्लंघन का दोषी मानकर सीधे भारत निष्कासित कर सकती है. हाल ही में लॉरेंस बिश्नोई के भाई अनमोल बिश्नोई को भी इसी इमिग्रेशन कानून के तहत अमेरिका से डिपोर्ट कर भारत लाया गया था.
दूसरा रास्ता है प्रत्यर्पण का. भारत और अमेरिका के बीच 1997 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी. विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय इन हिमांशु और नीरज के खिलाफ खिलाफ भारत में दर्ज मुकदमों के आधिकारिक साक्ष्य और अदालती वारंट अमेरिकी न्याय विभाग को सौंपेंगे. अमेरिकी कोर्ट जांच करेगी की भारत की तरफ से लगाए गए आरोप प्रत्यर्पण की शर्तों को पूरा करते हैं या नहीं.
दस्तावेज सही पाए जाने पर कोर्ट प्रत्यर्पण को मंजूरी देगा और अमेरिकी विदेश मंत्री अंतिम प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे. दोनों गैंगस्टर्स के खिलाफ पहले ही इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. इसलिए उनकी पहचान को सत्यापित करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. ये भारत की शुरुआती कामयाबी है. जल्द ही उन्हें भारत भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू होगी. इसके लिए भारतीय एजेंसियों की टीम अमेरिकी एजेंसियों से समन्वय करेगी.