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सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्किए के साथ सुन्नी इस्लामिक NATO बना लिया. उसके समझौते को लागू भी कर दिया गया, लेकिन इसके बावजूद सऊदी अरब के एयरपोर्ट और रिफाइनरी पर हूती की मिसाइलें गिर रही हैं. अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है, सऊदी के क्राउन प्रिंस को बंकर वाले महलों में रहना पड़ रहा है, लेकिन हूती ने जो हाल सऊदी का किया, वैसा ही हाल अब पाकिस्तान का भी होने वाला है, क्योंकि हूती के बाद अब ईरान ने भी पाकिस्तान को अल्टीमेटम दे दिया है.
ईरान ने पाकिस्तान को बताया है, अगर हूती पर हमले में उसने सऊदी अरब का साथ दिया तो उसे कौन-कौन से नतीजे भुगतने होंगे. इस आर्टिकल में हम आपको पाकिस्तान पर टूटने वाली नई मुसीबत की पूरी जानकारी दे रहे हैं.
दरअसल, हूती ने सिर्फ सऊदी अरब पर हमला नहीं किया, बल्कि इसे खुलकर स्वीकार भी किया. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह हमला किसी भी खाड़ी देश में हुआ सबसे घातक हमला था, जिसमें इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. सऊदी अरब ने इस हमले के नए वीडियो जारी किए हैं. हूती के हमलों से सऊदी में डर का माहौल है. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान बेहद सतर्कता बरत रहे हैं.
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस कड़ी सुरक्षा वाले महलों के बीच लगातार आवाजाही कर रहे हैं. मतलब अपना ठिकाना बार-बार बदल रहे हैं. मोहम्मद बिन सलमान सिर्फ़ उन्हीं महलों में रह रहे हैं, जिनमें मजबूत बंकर बने हुए हैं. इस दौरान उनके साथ विशेष रूप से चुने गए सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहते हैं. सऊदी अरब के पास मिसाइलों को हवा में ही नष्ट करने वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार भी कम होता जा रहा है. इस कारण से सऊदी अरब को अपने ऊर्जा ढांचे और शाही महलों की सुरक्षा करने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
यानी हूती के हमलों की वजह से पूरे सऊदी अरब में डर और तनाव का माहौल है. और अब ये तनाव पाकिस्तान तक पहुंच गया है. हूती ने पाकिस्तान को पहले ही धमकाया था, अगर उसने यमन पर हमलों में सऊदी का साथ दिया तो हूती पाकिस्तान पर रहम नहीं करेगा, लेकिन अब जिस देश के पास हूती की चाबी है. उस ईरान ने पाकिस्तान को अल्टीमेटम दे दिया है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई से जब पूछा गया कि क्या हजारों पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात किया जा सकता है? तो उनका जवाब पाकिस्तान के लिए एक चेतावनी माना जा रहा है. बकाई ने कहा, 'हमने भी यह अफवाह सुनी है और उम्मीद करते हैं कि यह सच नहीं होगी. क्षेत्र के देश अच्छी तरह जानते हैं कि यमन के मामले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप क्षेत्र के लिए अवांछित परिणाम पैदा कर सकता है, हमें उम्मीद है, मक्का समझौते का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय के हितों और कल्याण के खिलाफ नहीं किया जाएगा.'
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के साथ-साथ ईरान के कई ताकतवर चेहरे अब मक्का गठबंधन और पाकिस्तान पर सख्त दिखाई दे रहे हैं. ईरान के कुछ नेता इस गठबंधन को कागजी बता रहे हैं... तो कुछ पाकिस्तान को सीधे-सीधे धमका रहे हैं. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा, 'इस तरह के समझौते ईरान को अपनी नीतियां तय करने से रोक नहीं सकते.' मतलब तीन देशों की सम्मिलित शक्ति को ईरान ने खारिज कर दिया. सऊदी के साथ गठबंधन तुर्किये ने भी किया है, लेकिन ईरान पाकिस्तान की ज़्यादा आलोचना कर रहा है. इसकी एक बड़ी वजह तेहरान और वॉशिंगटन के बीच मध्यस्थता कराने में इस्लामाबाद की भूमिका है.
ईरानी सांसद अहमद नादेरी ने मध्यस्थता में निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान को धमकाया है. अहमद नादेरी ने कहा 'अगर पाकिस्तान यमन की जनता के खिलाफ युद्ध में सऊदी अरब के साथ शामिल होता है, तो उसे अब मध्यस्थ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संघर्ष में हस्तक्षेप करने वाले देश के रूप में देखा जाएगा.' मतलब, पाकिस्तान को ईरान का दुश्मन भी माना जाएगा. वहीं ईरान की मीडिया मक्का गठबंधन को यमन के उत्पीड़ित लोगों के खिलाफ बनाया गया गठबंधन बता रही है.
इन धमकियों का ही असर है, जिस पाकिस्तान के नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने पहले सऊदी में सैनिकों की तैनाती और सऊदी पर हमले को खुद पर हमला मानने की बात कही थी, उसी पाकिस्तान ने अमेरिकी मीडिया की उन खबरों को फौरन गलत बताया, जिसमें हूती पर हमलों में उसके फाइटर प्लेन के इस्तेमाल की बात कही गई थी और सऊदी के एयरपोर्ट पर हमले पर दुनिया के दूसरे देशों की तरह पाकिस्तान ने भी सिर्फ निंदा की है. सोचिए... सऊदी की सुरक्षा का दावा करने वाले पाकिस्तान को हूती से कितना डर लगता है.