DNA: बुढ़ापे की लाठी...बुजुर्गों की पीठ पर ही क्यों बरस रही है? रिश्तों के कलियुग की ये कैसी तस्वीर
जमीन के लालच में बेटों द्वारा बुजुर्ग माता-पिता की पिटाई ने रिश्तों, परिवार और बुजुर्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
DNA: हमारे समाज में संतानों को बुढ़ापे की लाठी कहा जाता है. लेकिन सोचिए, जब यही बुढ़ापे की लाठी अपने ही माता-पिता की पीठ पर पड़ने लगे तो क्या कहेंगे. 65 साल के तुकाराम राउत पर उनके ही दो बेटों ने हमला किया. ये कहानी रिश्तों के कलह युग की कहानी है. तुकाराम राउत पर अंधाधुंध डंडे से उनके बेटे ने पीटा, जिसका नाम संजय राउत है. इतना ही नहीं दूसरे बेटे राजेंद्र राउत ने भी पिता से मारपीट की. वहीं, मां अंजना कलह युगी संतानों से पिता को छोड़ देने की मिन्नत करती रही.
ये धनलोभ में रिश्तों की हत्या, परिवार की टूटती मर्यादा, बुजुर्गों के अपमान और सांस्कृतिक गिरावट का साक्ष्य है. जानते हैं संजय राउत और राजेंद्र राउत ने अपने पिता-माता पिता की पिटाई क्यों की क्योंकि तुकाराम राउत ने अपनी पत्नी अंजना के नाम पर खरीदी हुई दो एकड़ जमीन बेच दी थी.
क्या है पूरा मामला?
18 साल से दोनों बेटे अलग रहते थे. उन्हें अपने हिस्से की जमीन और घर भी मिल चुका है. लेकिन, कौरव वृति यानी सबकुछ हमारा है कि शापित सोच के शिकार दोनों बेटों ने बुजुर्ग मां-बाप पर जमीन के एक टुकड़े के लिए हमला कर दिया. तुकाराम राउत ने जो जमीन बेची वो उनकी पुश्तैनी जमीन नहीं थी. जमीन उन्होंने अपनी कमाई से अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी थी.
क्या होती है पैतृक संपत्ति?
पैतृक संपत्ति वह होती है जो किसी हिंदू को अपने पिता, दादा या परदादा से विरासत में मिलती है. इस संपत्ति पर संतान यानी बेटा और बेटी का अधिकार जन्म से ही माना जाता है. संतान पिता के जीवित रहते हुए भी पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा मांग सकती है. पिता संतान को पैतृक संपत्ति से बेदखल नहीं कर सकता, क्योंकि यह अधिकार जन्मसिद्ध है. लेकिन, तुकाराम राउत ने जो जमीन बेची थी वो उनकी स्वअर्जित यानी अपनी कमाई से खरीदी हुई संपत्ति है.
स्वअर्जित संपत्ति की कानूनी स्थिति अलग है. जब तक पिता जीवित हैं, स्व अर्जित संपत्ति पर उनका पूर्ण अधिकार होता है पिता अपनी इच्छा से इसे बेच सकते हैं, गिफ्ट या ट्रांसफर कर सकते हैं. इसके लिए बच्चों की सहमति जरूरी नहीं है. इसलिए तुकाराम राउत के लिए संपत्ति बेचने से पहले बेटों की सहमति लेना जरूरी नहीं था. पिता के जीवित रहते बच्चे ऐसी संपत्ति में हिस्से की मांग नहीं कर सकते हैं.
61% बुजुर्गों को बहुएं प्रताड़ित करती हैं
जिस संपत्ति पर इन बेटों का कोई कानूनी अधिकार भी नहीं है. उसके लिए इन्होंने अपने बुजुर्ग माता-पिता को बीच सड़क पर लाठी से पीटा. इनके नन्हें हाथों को थामकर तुकाराम और अंजना ने चलना सिखाया होगा. आज, वही हाथ बुजुर्ग माता-पिता पर लाठी बरसा रहे हैं. जाने कितनी बार माता-पिता से भूखे रहकर अपने बच्चों का पेट भरा होगा. आज वही संतान धन की भूख में बुजुर्ग माता-पिता से मारपीट कर रही है.
दोनों बेटे जमीन बेचने का कॉन्ट्रैक्ट रद्द नहीं करने पर जन्म देनेवाले माता-पिता को जान से मारने की धमकी दे रहे है. तुकाराम राउत के साथ जो हुआ ये सिर्फ एक घटना नहीं है. देश में बुजुर्गों से जुड़े जो आंकड़े हैं वो और भी परेशान करनेवाले हैं. हेल्प-एज इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि देश में 61% बुजुर्गों को बहुएं प्रताड़ित करती हैं. 59% बुजुर्गों को बेटे प्रताड़ित करते हैं. 41% बुजुर्गों से घर में गाली-गलौज हुई. 33% बुजुर्ग अपमान का सामना करते हैं. जबकि 29% बुजुर्गों को घर में पूरी तरह नजरअंदाज किया जाता है. 50% बुजुर्ग महिलाओं ने बताया कि उन्हें घर में शारीरिक हिंसा का सामना किया है.
ये पाप घर में हो रहा है. उसी घर में जिसे बुजुर्गों ने उस उम्मीद में बनाया कि संतान खुशहाल होगी और बुढ़ापा अच्छे से कटेगा. बुजुर्गों को अपमानित करनेवाला निकृष्ट व्यवहार किसी एक प्रांत या एक शहर में नहीं हो रहा है. हेल्पएज इंडिया के सर्वे के मुताबिक हैदराबाद के करीब 38%, कोलकाता के 28%, दिल्ली के 20% बुजुर्गों ने माना कि उन्हें प्रताड़ित किया गया.
बोझ लगने लगते हैं बुजुर्ग!
जिस समाज में बुजुर्गों को देवतुल्य कहा गया है. उसी समाज में उन्हें अपमानित क्यों किया जाता है. इसकी वजह भी समझते हैं. देश में लगभग 70% बुजुर्ग अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए पूरी तरह परिवार पर निर्भर करते हैं यानी आर्थिक तौर पर संतान पर निर्भर होते ही बुजुर्ग बोझ लगने लगते हैं. देश में सिर्फ 30% बुजुर्गों को ही पेंशन या सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत नकद सहायता मिलती है. लेकिन, ये पैसा उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी नहीं होता है. करीब 60% बुजुर्गो के पास खुद या अपने जीवनसाथी के नाम पर घर होता है. हालांकि, कई बार उन्हें उसी घर से बेदखल कर दिया जाता है.