क्या अमेरिकी मीडिया पर नकेल कसने के लिए आया 'ट्रंप टीवी'? व्हाइट हाउस के 'म्यूट' वीडियो का असली सच क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने फैसलों से सिर्फ दुनिया ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी मीडिया भी परेशान है. ट्रंप अपने ही देश के पत्रकारों और चैनलों के साथ वैसा ही सुलूक कर रहे हैं, जैसा वो ईरान जैसे देशों के साथ करते आए हैं. जिस तरह उन्होंने ईरान पर तमाम तरह की पाबंदियां लगा रखी हैं, ठीक उसी तरह अब कई बड़े मीडिया घरानों पर बैन लगा दिया है और खुलेआम उनसे उलझने लगे हैं. आइए समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है...
व्हाइट हाउस और अमेरिकी मीडिया के बीच की जंग अब आर-पार की लड़ाई में तब्दील हो चुकी है. सीएनएन और पॉलिटिको जैसे बड़े मीडिया संस्थानों पर बैन लगाने के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप ने 'TRUMP TV' नाम से अपना अलग डिजिटल मंच खड़ा कर लिया है. राष्ट्रपति भवन में नए हेलीपैड के उद्घाटन का बिना आवाज वाला वीडियो जारी कर ट्रंप ने साफ संदेश दे दिया है कि जो उनके सुर में सुर नहीं मिलाएगा, उसे खबरों से बेदखल कर दिया जाएगा. गिरती लोकप्रियता और तल्ख रिश्तों के बीच क्या ट्रंप टीवी निष्पक्ष पत्रकारिता की जगह ले पाएगा, आइए समझते हैं इस पूरे टेलीविजन वॉर को.
दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपना एक न्यूज़ चैनल लॉन्च कर दिया है. इस चैनल को नाम दिया गया है TRUMP TV. दूसरे न्यूज़ चैनल्स की तरह TRUMP TV में पत्रकार काम नहीं करेंगे, बल्कि इस कथित चैनल में राष्ट्रपति ट्रंप का खासम-खास स्टाफ काम करेगा, जो सिर्फ और सिर्फ वही न्यूज़ देंगे जो डॉनल्ड ट्रंप को पसंद आएगी. यानी यह TRUMP TV, हमारी तरह दर्शकों की पसंद और उनके सरोकार से जुड़े समाचार नहीं दिखाएगा. यह डिजिटल न्यूज़ चैनल डॉनल्ड ट्रंप का नया लाउडस्पीकर बनेगा, जिस पर सिर्फ और सिर्फ ट्रंप की कामयाबियों के कथित किस्से सुनाए जाएंगे. यानी अमेरिका में अब प्राइवेट टीवी वर्सेस TRUMP TV का दौर शुरू होने वाला है.
प्राइवेट टीवी बनाम 'ट्रंप टीवी' की नई जंग
एक तरफ निजी न्यूज़ चैनल्स अपनी खबरें दिखाएंगे, दूसरी तरफ इन खबरों का जवाब देने के लिए TRUMP TV भी अपनी कमर कसकर तैयार रहेगा. ट्रंप और अमेरिकी मीडिया की तनातनी कहां तक पहुंच गई है, यह आपने देख और समझ लिया. अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ट्रंप और मीडिया के बीच टेंशन इतनी ज्यादा कैसे और क्यों बढ़ गई है?
सीएनएन समेत तीन बड़े मीडिया घरानों पर बैन
दरअसल, डॉनल्ड ट्रंप ने अमेरिका के तीन न्यूज़ चैनल्स और समाचार एजेंसियों पर बैन लगा दिया है. ट्रंप के टारगेट पर प्रसिद्ध अमेरिकी चैनल CNN, समाचार एजेंसी MS-NOW और पॉलिटिको आए हैं. ट्रंप की दलील है कि ये तीनों उनकी सरकार को निशाना बनाने के लिए फेक और नेगेटिव न्यूज़ का प्रचार-प्रसार करते हैं. दूसरी तरफ अमेरिका के सभी बड़े मीडिया संस्थानों ने इस बैन के खिलाफ एकजुट होने का ऐलान किया है. इन संस्थानों ने साफ कह दिया है कि वे ट्रंप सरकार द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की रिपोर्टिंग या कवरेज नहीं करेंगे.
म्यूट वीडियो से मीडिया को कड़ा संदेश
इसी अदावत की वजह से TRUMP TV को लॉन्च किया गया है. ट्रंप ने सिर्फ अपना न्यूज़ चैनल लॉन्च नहीं किया बल्कि एक ऐसा कदम भी उठाया है, जिसे सीधे तौर पर अमेरिकी मीडिया को सख्त जवाब माना जा रहा है. ट्रंप के इस एंटी-मीडिया एक्शन को समझने के लिए आपको एक वीडियो बेहद गौर से देखना चाहिए.
अब से कुछ ही घंटे पहले व्हाइट हाउस में नया हेलीपैड यानी हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के स्थान का निर्माण पूरा हुआ है. इस नए हेलीपैड का फीता काटने के लिए ट्रंप एक बड़ी सी कैंची लेकर आए थे. फीता काटा गया और ट्रंप ने अपने स्टाफ से हाथ भी मिलाया, लेकिन इस पूरे वीडियो में बातचीत का ऑडियो बंद कर दिया गया था. वीडियो में ट्रंप के होंठ हिलते नजर आ रहे हैं, लेकिन ट्रंप ने क्या बोला, उसका ऑडियो नहीं सुनाई देगा. वीडियो के बैकग्राउंड में सिर्फ हेलीकॉप्टर के उड़ने की आवाज आती है.
कवरेज का बहिष्कार और व्हाइट हाउस का पलटवार
तीन मीडिया संस्थानों पर ट्रंप के बैन के बाद हेलीपैड के उद्घाटन की कवरेज के लिए कोई बड़ा न्यूज़ चैनल या अखबार नहीं पहुंचा था. इसी के जवाब में ट्रंप ने यह वीडियो जारी करते हुए संदेश दिया कि अगर न्यूज़ चैनल व्हाइट हाउस नहीं आएंगे, तो व्हाइट हाउस से जुड़ी जानकारियां भी मीडिया तक नहीं पहुंचेंगी. व्हाइट हाउस से जारी किए गए वीडियो में ट्रंप की आवाज नहीं थी, लेकिन उद्घाटन के बाद ट्रंप ने कुछ विशेष पत्रकारों को इंटरव्यू भी दिया. यह भी एक संदेश था कि जो ट्रंप से टकराएगा, वह न्यूज़ हासिल नहीं कर पाएगा.
गिरती लोकप्रियता और अप्रूवल रेटिंग का दबाव
जैसा कि हमने आपको बताया कि यह पहली बार नहीं है जब डॉनल्ड ट्रंप और अमेरिकी मीडिया आमने-सामने आए हों. वर्ष 2017 से 2021 के बीच अपने पहले कार्यकाल में भी ट्रंप ने कुछ मीडिया चैनल्स और पत्रकारों पर अस्थायी बैन लगा दिया था. अब सवाल यह है कि आखिर ट्रंप को मीडिया से इतनी एलर्जी क्यों है? वर्तमान परिस्थितियों में इसका एक ही जवाब है—अमेरिका में ट्रंप की तेजी से नीचे गिरती लोकप्रियता.
एक हालिया सर्वे के मुताबिक अमेरिका में ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग्स 32 प्रतिशत रह गई है. अप्रूवल रेटिंग्स का मतलब होता है कि जनता का कितना बड़ा हिस्सा वर्तमान सरकार से खुश है या फिर नाराज है. 32 प्रतिशत की रेटिंग बताती है कि अमेरिका के मतदाता का ट्रंप में भरोसा कम होता जा रहा है. सर्वे के मुताबिक सिर्फ ट्रंप ही नहीं बल्कि उनकी रिपब्लिकन पार्टी के प्रति भी मतदाता का भरोसा कम हुआ है.
जनता को समाचार मीडिया से मिलते हैं, और समाचारों के आधार पर ही जनता का मूड तय होता है. जाहिर है अमेरिकी मीडिया ने ट्रंप की नाकामियों से जुड़ी खबरें जनता के सामने रखी हैं और इसी वजह से मीडिया के प्रति ट्रंप का रवैया भी आक्रामक हुआ है.
प्रेस फ्रीडम रिपोर्ट पर सवाल और यूएन की आपत्ति
इसी साल अमेरिका स्थित फ्रीडम हाउस नाम के एक NGO ने पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक कथित रिपोर्ट जारी की थी. इस रिपोर्ट में भारत को दुनिया में 157वें नंबर पर रखा गया था. आज हम इसी NGO से पूछना चाहते हैं, क्या ये लोग अमेरिकी मीडिया की स्वतंत्रता के लिए ट्रंप से सीधी टक्कर लेंगे? इस सवाल का जवाब भी हम जानते हैं. यह बिकाऊ लॉबी ट्रंप से टकराने की हिम्मत ही नहीं कर सकती, क्योंकि ऐसे NGOs की जेब, ट्रंप और उन जैसे बड़े उद्योगपतियों के चंदे से ही भरती है. NGO भले ही चुप हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने ट्रंप के खिलाफ अपना रुख जरूर सामने रखा है. अमेरिका के न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र की महासभा के दौरान पहले मीडिया संवाद में UN के प्रतिनिधियों ने मीडिया पर बैन को गलत करार दिया है.
ट्रंप की शख्सियत बताती है कि वे किसी की भी नहीं सुनते, तो भला संकेतों में दी गई संयुक्त राष्ट्र की नसीहत को वो तवज्जो क्यों देंगे? ट्रंप का रवैया यह भी बता रहा है कि मीडिया से उनकी अदावत लंबी चलेगी.
धातु की पट्टियों पर निकलता था पहला अखबार
अमेरिका में जारी इस हलचल के बीच हम आपको मीडिया यानी समाचारों की दुनिया से जुड़ी एक रोचक जानकारी देते हैं, क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला अखबार कौन-सा था?
हमारी धरती के लिखित इतिहास के मुताबिक पहला अखबार रोमन साम्राज्य में शुरू किया गया था. इस अखबार का नाम था 'एक्टा डिउर्ना'. लातिनी भाषा के शब्द 'एक्टा डिउर्ना' का अर्थ है दैनिक गतिविधियों की जानकारी. जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 59 वर्ष में इस अखबार की स्थापना की थी. चूंकि उस ज़माने में कागज़ का प्रयोग नहीं होता था, तो धातु के टुकड़ों पर शब्दों को उकेरा जाता था और इस अखबार को बाज़ारों जैसे व्यस्त इलाकों में बांटा जाता था, ताकि रोमन साम्राज्य के नागरिकों को शासन से जुड़ी जानकारियां मिलती रहें और साम्राज्य में अफवाह न फैले.