)
UPI Charges : UPI लेन-देन पर चार्ज लगने के एलान के बाद लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल हैं. दुकानदारों के बीच भी कन्फ्यूजन है. इसको लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं. एक तरफ सरकार कह रही है कि आम लोगों पर कोई चार्ज नहीं लगाया गया है.वहीं, दूसरी तरफ विपक्ष कह रहा है कि सरकार ने लोगों पर UPI टैक्स लगा दिया है और ये फ़ैसला अमेरिकी दबाव में लिया गया है. आख़िर UPI पर असली तस्वीर क्या है?
जब संसद ने पिछले महीने मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR चार्ज से जुड़ा बिल पास किया था, उस वक़्त UPI को लेकर कई तरह के सवाल खड़े हुए थे. अब जब UPI पर चार्ज लगाने का औपचारिक एलान कर दिया गया है, तो उस समय भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं. आज एक बार फिर आपको UPI को लेकर भ्रम और तथ्य के बीच का अंतर जानना चाहिए. लेकिन सबसे पहले सुनिए कि UPI को लेकर क्या राजनीति हो रही है. ये तो UPI पर राजनीतिक विवाद हो गया, जो आगे भी जारी रहेगा. लेकिन आपको जानना चाहिए कि UPI को लेकर जो फ़ैसला लिया गया है, उससे क्या आप पर सचमुच असर पड़ेगा? विपक्ष के आरोप कितने सही हैं? और 10 साल तक मुफ्त रहने के बाद अब UPI लेन-देन पर चार्ज क्यों लगाया जा रहा है?
पिछले 10 सालों में UPI ने पेमेंट के मामले में लोगों का जीवन आसान बना दिया है. चाय की दुकान हो या शॉपिंग मॉल, सब्ज़ी खरीदनी हो या राशन का सामान. UPI ने पेमेंट से जुड़ी दिक़्क़तों को ख़त्म कर दिया है. अब न तो जेब में पैसे लेकर चलने की जरूरत है, न ही खुदरा रखने का झंझट. QR कोड स्कैन करते ही पेमेंट दुकानदार के खाते में चला जाता है. लेकिन 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट को लेकर नियमों में बदलाव होने जा रहा है.
2000 रुपये से ज़्यादा का बिल आने पर दुकानदारों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR लागू होगा. यानी एक तरह का चार्ज. लेकिन, ये चार्ज ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा बल्कि व्यापारियों को देना होगा. हालांकि, इसका दूसरा पहलू ये है कि जो चार्ज व्यापारी देंगे, वो ग्राहकों से वसूला जा सकता है. व्यापारी अपनी जेब से या अपने मुनाफे से वो चार्ज नहीं देना चाहेंगे. UPI चार्ज छोटे व्यापारियों से भी नहीं लिया जाएगा. जैसे फल-सब्ज़ी बेचने वाले, रेहड़ी वाले. महीने में 1 लाख रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर कोई पैसा नहीं देना होगा.
कई लोगों के मन में ये सवाल भी है कि क्या अब वो अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को UPI के जरिए पैसे भेजेंगे तो उस पर भी चार्ज देना होगा? इसका जवाब ये है कि UPI चार्ज सिर्फ व्यापारियों से लेन-देन में लगेगा यानी पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजेक्शन में लगेगा और वो चार्ज भी मर्चेंट देगा.पर्सन टू पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे देने पर कोई चार्ज नहीं लगेगा,ये पूरी तरह से मुफ्त रहेगा.
ये भी अलग-अलग है. व्यापारिक लेन-देन पर 2,000 रुपये तक के ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. लेकिन उससे ऊपर के ट्रांजेक्शन पर 0.4% चार्ज लगेगा और उसके ऊपर 18% GST अलग होगा. यानी 2,500 रुपये के लेन-देन पर 10 रुपये और 3,000 रुपये के लेन-देन पर 12 रुपये लगेंगे. लेकिन अधिकतम चार्ज भी फिक्स किया गया है. UPI पर व्यापारियों को एक पेमेंट के लिए 300 रुपये से ज़्यादा चार्ज नहीं देना होगा. मान लीजिए, 1 लाख रुपये का लेन-देन होता है. इसका 0.4% 400 रुपये होता है. लेकिन अधिकतम चार्ज 300 रुपये होने की वजह से 300 रुपये ही देने होंगे. GST मिलाकर ये 354 रुपये हो जाएगा.
कई दूसरी सेवाओं के लिए चार्ज 5 रुपये फिक्स किया गया है. जैसे 2,000 रुपये से ऊपर के रेलवे टिकट, पेट्रोल-डीज़ल, मोबाइल बिल और इंश्योरेंस प्रीमियम के भुगतान पर कंपनियों को 5 रुपये ही देना होगा. यानी 0.4% चार्ज का नियम लागू नहीं होगा. बिजली, पानी, पाइप गैस बिल और स्कूल की फीस पर भी 2,000 रुपये से ज़्यादा पर फ्लैट 5 रुपये का चार्ज लगेगा. वहीं, इन्वेस्टमेंट से जुड़े लेन-देन पर 0.02% चार्ज लगेगा यानी म्यूचुअल फंड और स्टॉक ब्रोकर को 10,000 के भुगतान पर 2 रुपये देना होगा. इसकी भी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी. वहीं, UPI मैंडेट के जरिए OTT, SIP और बिल के पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा.
ऊपर जितने भी चार्ज की बात की गई है, वो ग्राहकों को अपनी जेब से नहीं देना होगा. ये चार्ज जिसके खाते में पेमेंट गया है.उसको देना होगा यानी दुकानदार को. UPI पर चार्ज लगने का एलान होने के बाद आज हमने बाज़ार में दुकानदारों और ग्राहकों से भी बात की. 2,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन पर चार्ज लगने जा रहा है. अब आपको ये भी जानना चाहिए कि देश में 2,000 रुपये से ऊपर के कितने UPI ट्रांजेक्शन होते हैं जिन पर ये चार्ज लगेगा.
वित्त वर्ष 2025-26 में व्यापारी से होने वाले कुल लेन-देन यानी पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजेक्शन में केवल 4 प्रतिशत 2,000 रुपये से ज़्यादा का था. यानी 100 में से केवल 4 लेन-देन 2,000 रुपये से ज़्यादा के होते हैं. इसका दूसरा अर्थ ये है कि केवल 4% लेन-देन पर चार्ज लगेगा. लेकिन वैल्यू के मामले में ये बहुत ज़्यादा है. 2,000 रुपये से ज़्यादा के लेन-देन की वैल्यू कुल लेन-देन की वैल्यू में 65% है. यानी भले ही संख्या के मामले में 2,000 रुपये से ज़्यादा के लेन-देन सिर्फ़ 4 होते हैं लेकिन इनके ज़रिए दो-तिहाई पैसे का भुगतान किया जाता है.
विपक्ष आरोप लगा रहा है कि UPI पर टैक्स लगाया गया है. लेकिन सरकार का कहना है कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट कोई टैक्स नहीं बल्कि UPI के इकोसिस्टम को मज़बूत करने के लिए लगाया गया है. इसका किसी दूसरे देश के दबाव से कोई लेना-देना नहीं है. 2016 में शुरू होने के बाद UPI के अब 10 साल पूरे हो गए हैं. पिछले 10 साल के दौरान UPI दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है. दुनिया में जितने रियल टाइम पेमेंट होते हैं, उनमें से लगभग आधा UPI के जरिए होता है. अगस्त महीने में UPI के जरिए 2,451 करोड़ लेन-देन हुए. इसका ये मतलब है कि एक दिन में करीब 79 करोड़ लेन-देन UPI के जरिए होते हैं. वहीं, UPI के जरिए भुगतान की बात करें तो अगस्त में करीब 30 लाख करोड़ रुपये UPI के जरिए ट्रांसफर किए गए. यानी 1 दिन में लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के आसपास. सरकार की दलील है कि इतने बड़े सिस्टम को बनाए रखने पर भारी खर्च करना पड़ता है. हर लेन-देन के पीछे कुछ न कुछ खर्च होता है.
वित्तीय सेवाओं के विभाग ने संसद की समिति को UPI पर होने वाले खर्च के बारे में बताया था. इसके मुताबिक सिर्फ पर्सन टू मर्चेंट ट्रांजेक्शन पर हर साल 20,700 करोड़ रुपये खर्च होते हैं. ये पैसा बैंक, NPCI यानी नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और पेमेंट ऐप जैसे कि फोन पे, गूगल पे और दूसरी कंपनियों को लगाना पड़ता है लेकिन उन्हें इससे सीधी कमाई नहीं होती. इस खर्च का एक हिस्सा केंद्र सरकार इंसेंटिव या सब्सिडी के रूप में देती है. 2026-27 के बजट में इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान है. लेकिन ये कुल खर्च का लगभग 10% ही है. लंबे समय में इस सिस्टम को आत्मनिर्भर और वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए वित्त मंत्रालय ने इस चार्ज की ज़रूरत बताई है. इससे जो पैसा मिलेगा वो बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और UPI ऐप को मिलेगा ताकि वो UPI के इंफ्रास्ट्रक्चर के सुधार में लगाएं. UPI का विस्तार गांव-गांव तक करें.
कांग्रेस ये आरोप भी लगा रही है कि UPI पर चार्ज लगाने का सबसे बड़ा फायदा अमेरिकी कंपनियों को होगा. इसी वजह से कांग्रेस कह रही है कि ये फ़ैसला अमेरिका के दबाव में लिया गया है. वैसे सच्चाई ये है कि MDR चार्ज लगाने से जो पैसा मिलेगा, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा भारतीय बैंकों का होगा. इसका गणित भी आपको जानना चाहिए.
मान लीजिए, आपने 5,000 रुपये की ख़रीदारी की. इस तरह दुकानदार को 20 रुपये चार्ज के रूप में चुकाना होगा. अब इस 20 रुपये के बंटवारे को समझिए. इस 20 रुपये में से 40% यानी 8 रुपये उस बैंक को मिलेंगे जिसमें ग्राहक का खाता है. वहीं, 30% यानी 6 रुपये उस बैंक को मिलेंगे जिसमें दुकानदार का अकाउंट है. 20% यानी 4 रुपये उस ऐप को मिलेंगे जिसके ज़रिए भुगतान होगा यानी गूगल पे, फोन पे या पेटीएम. वहीं, 10% यानी 2 रुपये ऐप के बैंकिंग पार्टनर को मिलेंगे. यानी चार्ज का बंटवारा 4 हिस्सों में होगा और गूगल पे या फ़ोन पे जैसी कंपनियों को 20% ही मिलने वाला है. MDR चार्ज से हर साल 16 हज़ार से लेकर 21 हज़ार करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है. इसका 80% बैंकों को मिलेगा.
सरकार कह रही है कि आम लोगों पर कोई चार्ज नहीं लगेगा. पैसा सिर्फ़ मर्चेंट यानी व्यापारी को देना होगा. लेकिन ये भी एक सच्चाई है कि अगर व्यापारी का मार्जिन बहुत कम हो तो वो ये चार्ज ग्राहक से ही वसूलेगा. जैसे पेट्रोल पंप वाले कार्ड से भुगतान करने पर ख़ुद चार्ज चुकाने के बदले ग्राहक से वसूलते हैं. इसी तरह ज्वेलरी दुकानदार भी कार्ड पर MDR की भरपाई के लिए सरचार्ज लगाते हैं. इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर भी कार्ड से पेमेंट करने पर एक्स्ट्रा चार्ज लगाया जाता है सरकार कह रही है कि UPI का चार्ज व्यापारी देगा, ग्राहक नहीं. लेकिन भारत में कार्ड पेमेंट का पुराना अनुभव बताता है कि दुकानदार पर लगाया गया चार्ज हमेशा उसकी जेब तक सीमित नहीं रहता. अब UPI के मामले में भी ये चार्ज ग्राहकों पर डाला जा सकता है.इस चार्ज का एक और पहलू है. अगर दुकानदार लोगों पर UPI का बोझ डालने लगेंगे तो बाज़ार में कैश में लेन-देन ज़्यादा लगेगा. यानी कैश का चलन बढ़ेगा. इससे RBI को ज़्यादा संख्या में नोट छापने पड़ेंगे.पिछले साल RBI ने नए नोट छापने पर करीब 5,000 करोड़ रुपये खर्च किए थे. अब अगर कैश में लेन-देन होंगे तो नोट छापने पर खर्च में भी बढ़ोतरी होगी. साथ ही लोगों को पैसे निकालने के लिए बैंक और ATM ज़्यादा जाना होगा. इससे बैंकिंग सिस्टम पर भी बोझ बढ़ेगा. बैंकों को नए ATM लगाने पर ज़्यादा खर्च करना होगा.
इन परेशानियों से बचने का एक ही तरीक़ा है कि चार्ज से आम लोगों पर कोई बोझ न बढ़े. भारत जैसे प्राइस सेंसिटिव बाज़ार में लोग एक्स्ट्रा पैसा लगने पर UPI का इस्तेमाल कम कर देंगे. इसलिए सरकार को ये सुनिश्चित करना होगा कि व्यापारी चार्ज का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाले. UPI देश का गर्व है. आज ये पेमेंट सिस्टम दुनिया के 11 देशों में काम कर रहा है. इसकी सबसे बड़ी ताक़त है कोई चार्ज नहीं लगना. इसका और विस्तार करना चाहिए. इसे और मजबूत बनाना चाहिए.लेकिन, अगर जनता पर इसका बोझ पड़ा तो UPI सिस्टम की सेहत को नुकसान पहुंच सकता है.