अब हम, टेररिज्म के गॉडफादर सऊदी अरब का DNA टेस्ट करेंगे. मित्रों, एक कहावत है..बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय. जो सऊदी अरब वहाबी विचारधारा के जरिए..दुनिया भर में कट्टरता फैलाने की कोशिश करता रहा, वो खुद अब कट्टरता और हिंसा की चपेट में है. जो सऊदी अरब..पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देश को आतंकवाद की मोटी फंडिंग करता रहा, वो खुद अब..एक आतंकी संगठन के हमले का 'पीड़ित' बना बैठा है. यानी सऊदी अरब..आतंकवाद के उस माली की तरह हो गया है, जिसे आतंकवाद का कांटा..लहूलुहान कर रहा है.
जिस सऊदी अरब को मिडिल ईस्ट में सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता था..आज वो, हूती विद्रोहियों के हमले से खौफ में है. सऊदी अरब के एयरपोर्ट..रिफायनरी...सैन्य ठिकाने कुछ भी सुरक्षित नहीं हैं. हूती विद्रोहियों के हमले रुक नहीं रहे. सऊदी अरब की राजधानी रियाद में एक सप्ताह के अंदर चार बड़े हमले हुए हैं. रियाद एयरपोर्ट पर हमलों में 18 लोगों की मौत हुई है. 300 से ज्यादा लोग घायल हैं . ये सऊदी अरब में पिछले 10 साल में हुआ सबसे बड़ा हमला है. हालात इतने खराब हैं कि राजधानी में फ्लाइट नहीं उतर रहीं. आज आपको सऊदी पर हूती विद्रोहियों के हमले का असर जानना चाहिए और ये भी समझना चाहिए मिडिल ईस्ट के सबसे ताकतवर मुल्क की कमजोरियां कैसे दुनिया के सामने आ गई हैं.
आज आपको ये भी जानना चाहिए...किस तरह सऊदी अरब ने एक दौर में भारत समेत दुनिया भर में कट्टर इस्लाम को स्पॉन्सर किया. सऊदी अरब के फंड से कैसे कई आतंकवादी संगठनों का जन्म हुआ...और आज क्यों एक आतंकी संगठन के सामने वो खुद बेबस नजर आ रहा है. सबसे पहले देखिए, सऊदी अरब को हूती ने कैस बेबस कर दिया है. मित्रों. हूती के हमलों के बाद सऊदी अरब में सबसे ज्यादा व्यस्त रहने वाले रियाद एयरपोर्ट को 17 अक्टूबर तक बंद कर दिया गया है. जिससे बड़ी संख्या में तीर्थयात्री सऊदी में फंस गए हैं. भारत समेत कई देशों की एयरलाइंस ने सऊदी अरब की फ्लाइट्स को 17 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है.
सऊदी अरब ने हमलों के बाद स्थिति को सामान्य दिखाने के लिए एक ऊर्जा कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया..लेकिन ज्यादातर बड़ा कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपनी यात्रा स्थगित कर दी. सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ने कहा है...हूती के हमलों का कड़ा जवाब देना बहुत जरूरी है . मतलब सऊदी के नेता भी जानते हैं . इन हमलों से उनकी स्थिति कितनी खराब हो चुकी है . सऊदी अरब के लिए सबसे परेशान करने वाली बात ये है. वो दुनिया के सामने सबसे सुरक्षित होने की जो छवि बनाना चाहता था . हूती के हमलों ने उसकी धज्जियां उड़ा दी हैं .
रियाद में मौजूद दुनिया भर के देशों के दूतावासों ने अपने अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी करके सुरक्षित स्थानों पर रहने को कहा है. अमेरिका ने अपनी एडवायजरी में कहा है. सऊदी में काम कर रहे अमेरिकी कर्मचारियों के लिए किसी भी सऊदी एयरपोर्ट का इस्तेमाल करने के लिए विशेष अनुमति लेना जरूरी है. सऊदी अरब में 25 से 30 लाख भारतीय रहते हैं . 10 अक्टूबर के हमले में भारतीय नागरिक मोहम्मद यूसुफ अली की मौत हुई. उनका अंतिम संस्कार 12 अक्टूबर को रियाद में हुआ . इसके अलावा 8 भारतीय घायल हुए हैं . जिनका इलाज चल रहा है .गंभीर खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने भी अपने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है . आज आपको भी इसके बारे में जानना चाहिए .
मतलब दुनिया भी समझ चुकी है..इस वक्त सऊदी अरब सुरक्षित जगह नहीं है और इसे असुरक्षित बनाने वाला हूती सिर्फ सऊदी के अंदर नहीं यमन में भी सऊदी फोर्स के लिए काल बन गया है . यमन में सऊदी अरब के ऊपर हूती विद्रोही किस तरह भारी पड़ रहे हैं इसका वीडियो विश्लेषण भी आपको ध्यान से देखना चाहिए. मित्रों..आज सऊदी अरब अपने घर से लेकर पड़ोसी देश यमन तक ईरान के प्रॉक्सी कहे जाने वाले हूती विद्रोहियों के आतंक के निशाने पर है...लेकिन सऊदी अरब खुद भी कट्टरता और आतंकी संगठनों के मददगार के तौर पर कुख्यात रहा है .
अमेरिकी विद्वान और शोधकर्ता विलियम मैक केंट्स ने कहा था- कट्टरपंथी इस्लाम के मामले में सऊदी अरब आग लगाने वाला भी है और आग बुझाने वाला भी. यानी सऊदी अरब ने एक तरफ वहाबिज्म जैसी कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया. जिसने आगे चलकर अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों को वैचारिक खाद-पानी दिया..और दूसरी तरफ जब ये आतंकी संगठन खुद सऊदी अरब के लिए खतरा बन गए, तो सऊदी सरकार को इनसे मुकाबला भी करना पड़ा. आज आपको इस आतंक को वैचारिक खुराक देने वाली वहाबी विचारधारा और इसके प्रचार प्रसार में सउदी अरब के योगदान के बारे में भी जानना चाहिए
ऐसे कठोर नियमों के कारण समाज में कट्टरता फैलती है, जिससे आतंकवादियों को लोगों का ब्रेनवॉश करने का मौका मिल जाता है.और सऊदी अरब ने तेल से पैसा कमाने के बाद दुनिया में इस विचारधारा का खूब प्रचार प्रसार किया . इसके लिए सऊदी ने क्या क्या किया आज आपको ये भी जानना चाहिए. वहाबी विचारधारा के प्रचार के लिए सऊदी ने 1962 में 'मुस्लिम वर्ल्ड लीग' और 1972 में 'वर्ल्ड असेंबली ऑफ मुस्लिम Youth' जैसे बड़े वैश्विक संगठन बनाए.
वहाबिज्म को बढ़ावा देने के लिए पिछले चार दशकों में सऊदी अरब ने 10 बिलियन डॉलर यानी 95 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं . यूरोपियन यूनियन की रिसर्च के मुताबिक इसमें से 15 से 20 % पैसा अलकायदा और दूसरे आतंकी संगठनों तक भी पहुंचा . सऊदी अरब की इस फंडिंग का प्रभाव भारत पर भी पड़ा..वहाबिज्म को बढ़ावा देने के लिए भारत में मस्जिदों और मदरसों के निर्माण के लिए मोटी फंडिंग हुई. कश्मीर में कट्टरता के विस्तार के लिए सऊदी से खूब पैसे भेजे जाते थे. आज से 10 वर्ष पूर्व मैंने खुद कश्मीर जाकर कट्टरता की फंडिंग वाली साजिश पर कई दिनों तक पड़ताल की थी. और पड़ताल करने के बाद हमने पूरी रिपोर्ट तैयार की थी. कश्मीर के अलग अलग इलाकों में जाकर विदेशी फंडिंग से बन रहे कट्टरता के केंद्रों पर खुलासे की हमारी सीरीज..कई दिनों तक चली थी. जिसे ज़ी न्यूज़ पर आपमें से कई लोगों ने शायद तब देखा भी होगा. आज आपको उस सीरीज का एक मिश्रित अंश हम फिर से दिखाना चाहते हैं.
मित्रों...आज से 10 साल पहले देश में 700 से ज्यादा मस्जिदों का निर्माण करवाया गया था और इसके लिए लगभग 17 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. जो रिपोर्ट हमने आपको दिखाई वो सिर्फ कश्मीर पर आधारित थी. लेकिन अगर पूरे देश की बात करेंगे तो ये तस्वीर बहुत बड़ी है. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लिखा था...चिंगारी का खेल बुरा होता है. औरों के घर आग लगाने का जो सपना...वो अपने ही घर में सदा खरा होता है. वाजपेयी जी ने ये कविता आतंकी देश पाकिस्तान के लिए लिखी थी. लेकिन ये सऊदी अरब पर भी पूरी तरह से फिट बैठ रही है. सऊदी ने पूरी दुनिया में कट्टरता के बीज बोए. बाद में अपने ही फंड से मजबूत हुए अलकायदा जैसे संगठनों से भी उसे युद्ध लड़ना पड़ा . अब हूती उसकी जान का दुश्मन बना है . हालांकि हूती का वहाबी विचारधारा से कुछ लेना देना नहीं है . हूती विद्रोही शिया जैदी समुदाय से आते हैं . लेकिन यमन में वहाबी विचारधारा के प्रचार ने कैसे हूती को मजबूत किया आज आपको ये भी समझना चाहिए.
सऊदी अरब ने यमन में फंडिंग करके सुन्नी-सलाफी मदरसे बनवाए. जिनके जरिए शिया बहुल क्षेत्रों और हूती विद्रोहियों की घेराबंदी की कोशिश की गई लेकिन ज़ैदी शिया समुदाय ने इस वहाबी प्रभाव को अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान पर सीधा खतरा माना. सऊदी के इस वैचारिक हस्तक्षेप के विरोध में हूती विद्रोहियों को स्थानीय जनता को अपने पक्ष में एकजुट करने का एक मजबूत बहाना मिल गया. इसके बाद 2015 के सऊदी अरब ने यमन में बमबारी शुरू कर दी . जिसने हूती को राष्ट्रवाद की आड़ में खुद को 'प्रतिरोध आंदोलन' के रूप में पेश करने का मौका दिया. विदेशी हमले से उपजी सहानुभूति और गुस्से के कारण हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता और जनसमर्थन दोनों कई गुना बढ़ गए.
सऊदी हमलों और प्रतिबंधों से अलग-थलग पड़ने पर हूती हथियारों और तकनीक के लिए पूरी तरह ईरान पर निर्भर हो गए. और ईरान और हूती के साथ ने उसकी ताकत कई गुना बढ़ा दी. यानी वहाबी प्रभाव को बढ़ाने की सऊदी रणनीति उल्टी पड़ी...इससे हूती और अधिक आक्रामक व मजबूत बनकर उभरे और अब सऊदी के लिए सबसे बड़ा सरदर्द बन गए हैं. हूती के हमलों से बौखलाए सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने थोड़ी देर पहले यमन की राजधानी सना में तेल कंपनी और भंडारण केंद्रों को खाली करने की चेतावनी दी है. गठबंधन ने कहा कि इन ठिकानों पर संभावित हमला हो सकता है और लोगों की सुरक्षा के लिए जगह खाली कराई जा रही है. जबकि हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी कि सना पर हमला हुआ तो सऊदी राजधानी रियाद को कड़ा जवाब दिया जाएगा. यानी अब ये युद्ध और ज्यादा खतरनाक होने जा रहा है.