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5 दिन बाद दशहरा है. देशभर में जगह-जगह रामलीला हो रही है. कहीं राम के आदर्शों की कथा सुनाई जा रही है, तो कहीं रावण के अहंकार का अंत दिखाया जा रहा है. लेकिन इसी रामलीला के नाम पर कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आ रही हैं, जो कई गंभीर सवाल खड़े करती हैं. जो तस्वीरें सामने आ रही हैं उनमें रामलीला के मंच पर अश्लील डांस हो रहा है, बॉलीवुड के फूहड़ गानों पर ठुमके लगाए जा रहे हैं, धार्मिक पात्र भद्दे इशारे कर रहे हैं, रावण के किरदार को फिल्मी गाने गाते हुए दिखाया जा रहा है. मित्रों हम रामलीला के मंचों पर हो रही इस फूहड़ता का DNA टेस्ट करने के लिए इसीलिए विवश हुए हैं क्योंकि ऐसी तस्वीरों की बाढ़ सी आ गई है..
DNA मित्रों, रामलीला सिर्फ एक नाटक नहीं है. यह भारतीय समाज की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है. करोड़ों लोग इसमें भगवान राम के जीवन से आदर्श, त्याग, संयम और मर्यादा की प्रेरणा खोजते हैं. भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है. यानी ऐसा आदर्श, जिसमें शक्ति होने के बावजूद संयम है, अधिकार होने के बावजूद कर्तव्य है और लोकप्रियता से ऊपर मर्यादा है. लेकिन अगर रामलीला के मंच पर ही मर्यादा गायब हो जाए, तो फिर उस मंचन का उद्देश्य क्या रह जाता है?
#DNAमित्रों | 'रावण' फिल्मी गाना गा रहा..'शूर्पणखा' नाच रही रामलीला के मंच पर अश्लीलता का 'मंचन' क्यों? रामलीला के नाम पर फूहड़ता के खिलाफ 'शंखनाद' #DNA #DNAWithRahulSinha #Ramleela #Dussehra @rahulsinhatv https://t.co/Ju4pziakXW
— Zee News (@ZeeNews) October 15, 2026
मित्रो, कलियुग का वर्णन करते हुए गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा था
"श्रुति संमत हरि भक्ति पथ, संजुत बिरति बिबेक.
तेहिं परिहरहिं बिमोह बस, कल्पहिं पंथ अनेक॥"
यानि लोग वेद-सम्मत भक्ति का मार्ग छोड़कर मनमाने रास्ते गढ़ लेंगे....
गोस्वामी तुलसीदास जी ने जिस कलियुग का वर्णन किया था.. आज वो अलग अलग रामलीला मंचों पर कैसे दिख रहा है.. आपको हमारी इस वीडियो रिपोर्ट में देखना चाहिए..
अभद्र
अशिष्ट
अशोभनीय
भद्दे
घृणित
नीच
बेहुदगी
इन तस्वीरों के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे.. लेकिन देश के कई शहरों में रामलीला के नाम पर जो फूहड़पन चल रहा है, उसकी तस्वीरें कम नहीं पड़ेंगी...
ऐसा ही एक दृश्य देखिये.. शूर्पणखा और लक्ष्मण जी के बीच में कायदे से संवाद में शूर्पणखा ने लक्ष्मण जी से कहा था..
"कुंवर मनोहर तोउ दोउ भ्राता. मुनिबर भेष स्याम अरु गाता॥"
यानी दोनों भाई बहुत ही सुंदर और मन को मोहने वाले राजकुमार हैं.
लेकिन रामलीला के नाम पर चल रही फूहड़ता में शूर्पणखा क्या कह रही है
रामलीला के मंचन में रावण की विलासिता को भी दर्शाया जाता है.. इसे कई प्रसंगों और संवादों के माध्यम से मंच पर प्रस्तुत किया जाता है.. कई मंचों पर श्री रामचरितमानस की इन पंक्तियों से रावण का वर्णन किया जाता है...
बैठ जाइ तेहिं मंदिर रावन. लागे किंनर गुन गन गावन॥
बाजहिं ताल पखाउज बीना. नृत्य करहिं अपछरा प्रबीना॥
यानी लंका के शिखर पर एक भव्य भवन है, जहां नाच-गाने की महफिल सजती है. रावण वहां बैठता है, उसके गुण गाये जाते हैं और अप्सराएं नृत्य करती हैं. लेकिन रामलीला के नाम पर यहां रावण की विलासिता का वर्णन बॉलीवुड के गाने और अश्लील डांस से किया जा रहा है.
एक मंच पर तो रावण के पात्र से ऋषि कपूर की फिल्म प्रेम राग का गाना गवा दिया गया.. और तो और एक चाचा रावण के ऊपर एक नोट उड़ाकर चले गए.. हद तो तब हो गई जब रामलीला के नाम पर यूपी के रामपुर में हो रहे आयोजन में अश्लील नृत्य हो रहा है. ऐसी तस्वीरों की मानो बाढ़ सी आ गई है.. जहां रामलीला के नाम पर अश्लील डांस हो रहे हैं.. रामलीला के कलाकारों के सामने ही ये पाप हो रहा है.. लेकिन हद तो तब हो गई जब एक मंच पर कलाकार ही अश्लील इशारे करने लग गए. रामलीला के नाम पर हो रहे इस फूहड़ मंचन पर लोग तालियां भी बजा रहे हैं.
मानस के बालकांड में सती प्रसंग के दौरान तुलसीदास कहते हैं-
"संत संभु श्रीपति अपबादा.
सुनिअ जहाँ तहँ अस मरजादा॥"
यानी जहां ईश्वर या संतों की निंदा हो रही हो, उसे या तो रोका जाए, या वहां से हट जाया जाए. यही मर्यादा है. चुपचाप बैठकर तमाशा देखना भी दोष माना गया है. मूकदर्शक भी जवाबदेह है. लेकिन जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, उसमें लोग इस फूहड़ता को सिर्फ देख ही नहीं रहे हैं.. बल्कि उसमें शामिल भी हो रहे हैं. मित्रो, ऐसा नहीं है कि रामलीला के हर मंच पर फूहड़ता ही हो रही है.. कई ऐसी रामलीला समितियां हैं जहां रामलीला का बेहतरीन मंचन हो रहा है.. प्रभु श्री राम की लीला को शालीनता के साथ दिखाया जा रहा है.. प्रभु राम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है.
देश ही नहीं विदेशों तक रामकथा की महिमा आज भी जीवंत है.. अमेरिका से लेकर यूरोप तक रामलीला का मंचन किया जा रहा है.. प्रभु श्री राम की लीला को दर्शाया जा रहा है.. लेकिन भारत की जिस संस्कृति को दुनिया अपना रही है.. उसी को हमारे देश में मौजूद चंद लोग तार तार कर रहे हैं. मित्रो, हमारे देश में चंद मंचों से भले ही प्रभु राम के जीवन चरित्र के मंच का गलत इस्तेमाल हो रहा है.. लेकिन आज आपको जानना चाहिए कि भगवान राम के आदर्श दुनियाभर में कितने देशों की संस्कृति का हिस्सा हैं..
हमारी संस्कृति को पूरा विश्व मान रहा है.. भारतवर्ष के राम की उपासना पूरा विश्व कर रहा है.. लेकिन उसी भारत में रामलीला के नाम पर ये फूहड़ता चल रही है...
मित्रो, मानस की एक चौपाई है..
"मन कामना सिद्धि नर पावा.
जे यह कथा कपट तजि गावा॥"
यानी जो मनुष्य छल-कपट छोड़कर मन में सच्ची श्रद्धा के साथ श्री रामजी की इस कथा का गान करते हैं, उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं. रामलीला का मंच ऐसा होना चाहिए, जहां से लोग प्रभु श्री राम के आदर्शों को सीखकर लौटें... युवा मर्यादा का अर्थ समझें और समाज अपनी सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े. इसलिए दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के साथ साथ फूहड़ता वाली इन कुरीतियों का त्याग करना भी अत्यंत आवश्यक है..
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